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Gorakhpur News: बीआरडी में ऑक्सीजन कांड से मच गया था सूबे में बवाल
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10 अगस्त 2017 को हुई थी घटना, 32 बच्चों की हुई थी मौत
जांच में आक्सीजन की कमी या सप्लाई बंद होना नहीं पाया गया
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में अगस्त 2017 की घटना ने सूबे को हिलाकर रख दिया था। इस घटना में पहले ऑक्सीजन की कमी का मामला सामने आया था। 32 बच्चों की मौत हो गई थी, लेकिन बाद में प्रशासनिक जांच में ऑक्सीजन सप्लाई बंद या खत्म होना नहीं पाया गया था।
बच्चों की मौत में लापरवाही पाए जाने पर पूर्व प्राचार्य डॉ. राजीव मिश्रा, उनकी पत्नी डॉ. पूर्णिमा शुक्ला, डॉ. कफील खान, एनेस्थीसिया के पूर्व हेड डॉ. सतीश कुमार, लेखा विभाग के सुधीर पांडेय और संजय त्रिपाठी को निलंबित कर दिया गया था। मामले में सभी की गिरफ्तारी भी हुई थी। ये सभी आरोपी लंबे समय तक जेल में भी रहे। पूरे मामले की जानकारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी ली थी। डीएम ने मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय कमेटी बनाई थी।
डॉ कफील हुए थे बर्खास्त
बीआरडी मेडिकल काॅलेज में ऑक्सीजन कांड में 22 अगस्त 2027 को डॉक्टर कफील को निलंबित कर दिया गया था। तभी से उनके खिलाफ जांच चल रही थी। जांच में दोषी पाए जाने के बाद उन्हें बर्खास्त कर दिया गया। निलंबित चल रहे डाॅ. कफील को महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा (डीजीएमई) कार्यालय से संबद्ध किया गया था।
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जांच रिपोर्ट में ऑक्सीजन आपूर्तिकर्ता को दोषी माना गया
गोरखपुर। मेडिकल कॉलेज में कथित रूप से ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित होने के मामले में जांच समिति ने प्रधानाचार्य समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों एवं कर्मचारियों के अलावा ऑक्सीजन आपूर्तिकर्ता कंपनी को प्रथमदृष्टया जिम्मेदार ठहराया। इसी समिति की रिपोर्ट के हवाले से बताया गया कि बच्चों की मौत ऑक्सीजन की कमी से नहीं हुई। तत्कालीन डीएम राजीव रौतेला की ओर से गठित पांच सदस्यीय जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि ऑक्सीजन आपूर्तिकर्ता कंपनी मेसर्स पुष्पा सेल्स प्राइवेट लिमिटेड ने ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित कर दी, जिसके लिए वह जिम्मेदार है। उसे ऐसा नहीं करना चाहिए था, क्योंकि इसका प्रत्यक्ष संबंध मरीजों के जीवन से था। जांच समिति ने पाया था कि मेडिकल कॉलेज के एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम वार्ड के नोडल अधिकारी डॉक्टर कफील खान ने एनेस्थीसिया विभाग के प्रमुख डॉक्टर सतीश कुमार को वार्ड का एयर कंडीशनर खराब होने की लिखित सूचना दी थी, लेकिन उसे समय पर ठीक नहीं किया गया। डॉक्टर सतीश 11 अगस्त 2017 को बिना किसी लिखित अनुमति के मेडिकल कॉलेज से गैरहाजिर थे। डॉक्टर सतीश वार्ड में ऑक्सीजन की निर्बाध आपूर्ति के लिए जिम्मेदार थे। 10-11 अगस्त को मेडिकल कॉलेज में बच्चों की मौत होने के बाद डॉ कफील को हटा दिया गया था।
ये वार्ड हुए थे प्रभावित
-ट्रॉमा सेंटर
-100 बेड वाला इंसेफेलाइटिस वार्ड
-नियोनेटल यूनिट
- इमरजेंसी मेडिसिन वार्ड-14
- मेडिसिन आईसीयू
- एपीडेमिक मेडिसिन वार्ड-12
- बालरोग वार्ड 6
- वार्ड नंबर 2
- एनेस्थिसिया आईसीयू
- लेबर रूम
- जनरल सर्जरी
-न्यूरो सर्जरी ओटी
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जांच में आक्सीजन की कमी या सप्लाई बंद होना नहीं पाया गया
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में अगस्त 2017 की घटना ने सूबे को हिलाकर रख दिया था। इस घटना में पहले ऑक्सीजन की कमी का मामला सामने आया था। 32 बच्चों की मौत हो गई थी, लेकिन बाद में प्रशासनिक जांच में ऑक्सीजन सप्लाई बंद या खत्म होना नहीं पाया गया था।
बच्चों की मौत में लापरवाही पाए जाने पर पूर्व प्राचार्य डॉ. राजीव मिश्रा, उनकी पत्नी डॉ. पूर्णिमा शुक्ला, डॉ. कफील खान, एनेस्थीसिया के पूर्व हेड डॉ. सतीश कुमार, लेखा विभाग के सुधीर पांडेय और संजय त्रिपाठी को निलंबित कर दिया गया था। मामले में सभी की गिरफ्तारी भी हुई थी। ये सभी आरोपी लंबे समय तक जेल में भी रहे। पूरे मामले की जानकारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी ली थी। डीएम ने मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय कमेटी बनाई थी।
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डॉ कफील हुए थे बर्खास्त
बीआरडी मेडिकल काॅलेज में ऑक्सीजन कांड में 22 अगस्त 2027 को डॉक्टर कफील को निलंबित कर दिया गया था। तभी से उनके खिलाफ जांच चल रही थी। जांच में दोषी पाए जाने के बाद उन्हें बर्खास्त कर दिया गया। निलंबित चल रहे डाॅ. कफील को महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा (डीजीएमई) कार्यालय से संबद्ध किया गया था।
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जांच रिपोर्ट में ऑक्सीजन आपूर्तिकर्ता को दोषी माना गया
गोरखपुर। मेडिकल कॉलेज में कथित रूप से ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित होने के मामले में जांच समिति ने प्रधानाचार्य समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों एवं कर्मचारियों के अलावा ऑक्सीजन आपूर्तिकर्ता कंपनी को प्रथमदृष्टया जिम्मेदार ठहराया। इसी समिति की रिपोर्ट के हवाले से बताया गया कि बच्चों की मौत ऑक्सीजन की कमी से नहीं हुई। तत्कालीन डीएम राजीव रौतेला की ओर से गठित पांच सदस्यीय जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि ऑक्सीजन आपूर्तिकर्ता कंपनी मेसर्स पुष्पा सेल्स प्राइवेट लिमिटेड ने ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित कर दी, जिसके लिए वह जिम्मेदार है। उसे ऐसा नहीं करना चाहिए था, क्योंकि इसका प्रत्यक्ष संबंध मरीजों के जीवन से था। जांच समिति ने पाया था कि मेडिकल कॉलेज के एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम वार्ड के नोडल अधिकारी डॉक्टर कफील खान ने एनेस्थीसिया विभाग के प्रमुख डॉक्टर सतीश कुमार को वार्ड का एयर कंडीशनर खराब होने की लिखित सूचना दी थी, लेकिन उसे समय पर ठीक नहीं किया गया। डॉक्टर सतीश 11 अगस्त 2017 को बिना किसी लिखित अनुमति के मेडिकल कॉलेज से गैरहाजिर थे। डॉक्टर सतीश वार्ड में ऑक्सीजन की निर्बाध आपूर्ति के लिए जिम्मेदार थे। 10-11 अगस्त को मेडिकल कॉलेज में बच्चों की मौत होने के बाद डॉ कफील को हटा दिया गया था।
ये वार्ड हुए थे प्रभावित
-ट्रॉमा सेंटर
-100 बेड वाला इंसेफेलाइटिस वार्ड
-नियोनेटल यूनिट
- इमरजेंसी मेडिसिन वार्ड-14
- मेडिसिन आईसीयू
- एपीडेमिक मेडिसिन वार्ड-12
- बालरोग वार्ड 6
- वार्ड नंबर 2
- एनेस्थिसिया आईसीयू
- लेबर रूम
- जनरल सर्जरी
-न्यूरो सर्जरी ओटी