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परिवार नियोजन में निजी अस्पतालों की भूमिका अहम: डॉ. नंद कुमार
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फोटो
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बॉस्केट ऑफ च्वाइस के सभी साधनों की दी गई जानकारी
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। परिवार नियोजन कार्यक्रम में निजी क्षेत्र के अस्पताल अहम भूमिका निभा सकते हैं। ऐसे परिवारों के योग्य दंपति को ‘बॉस्केट ऑफ च्वाइस’ के सभी साधनों की जानकारी देने के साथ उन्हें सेवा दिलाई जाए। जिले में 27 जून से शुरू होकर 10 जुलाई तक चलने वाले दंपती संपर्क पखवाड़े के दौरान योग्य दंपती को सही जानकारी देकर 11 से 31 जुलाई के बीच सेवा से जोड़ने का प्रयास करना है।
यह बातें परिवार कल्याण कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. नंद कुमार ने निजी क्षेत्र के अस्पतालों संचालकों के साथ सीएमओ ऑफिस के प्रेरणा श्री सभागार में आयोजित बैठक में कही। बताया कि जिले में 35 से अधिक निजी अस्पतालों को परिवार नियोजन के लिए तैयार किया जा रहा है। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में आशा और एएनएम को निर्देश दिए गए हैं कि घर-घर जाकर दंपती से संपर्क करें और पात्र लाभार्थी को नसबंदी, आईयूसीडी और त्रैमासिक अंतरा इंजेक्शन सेवा लेने के लिए तैयार करें। इस मौके पर डीपीएम पंकज आनंद, डॉ. अर्चना, डॉ. मधु गुलाटी आदि मौजूद रहीं।
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14.7 फीसदी है जिले की अनमेट नीड
डॉ. नंद कुमार ने बताया कि राष्ट्रीय पारिवारिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएचएफएस)-पांच के आंकड़ों के अनुसार जिले का अनमेंट नीड 14.7 फीसदी है। मतलब हर 100 में 14 से 15 महिला या पुरुष ऐसे हैं, जो परिवार नियोजन का साधन अपनाना चाहते हैं, लेकिन इन साधनों की जानकारी उन तक नहीं पहुंच पा रही है।
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बॉस्केट ऑफ च्वाइस के सभी साधनों की दी गई जानकारी
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। परिवार नियोजन कार्यक्रम में निजी क्षेत्र के अस्पताल अहम भूमिका निभा सकते हैं। ऐसे परिवारों के योग्य दंपति को ‘बॉस्केट ऑफ च्वाइस’ के सभी साधनों की जानकारी देने के साथ उन्हें सेवा दिलाई जाए। जिले में 27 जून से शुरू होकर 10 जुलाई तक चलने वाले दंपती संपर्क पखवाड़े के दौरान योग्य दंपती को सही जानकारी देकर 11 से 31 जुलाई के बीच सेवा से जोड़ने का प्रयास करना है।
यह बातें परिवार कल्याण कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. नंद कुमार ने निजी क्षेत्र के अस्पतालों संचालकों के साथ सीएमओ ऑफिस के प्रेरणा श्री सभागार में आयोजित बैठक में कही। बताया कि जिले में 35 से अधिक निजी अस्पतालों को परिवार नियोजन के लिए तैयार किया जा रहा है। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में आशा और एएनएम को निर्देश दिए गए हैं कि घर-घर जाकर दंपती से संपर्क करें और पात्र लाभार्थी को नसबंदी, आईयूसीडी और त्रैमासिक अंतरा इंजेक्शन सेवा लेने के लिए तैयार करें। इस मौके पर डीपीएम पंकज आनंद, डॉ. अर्चना, डॉ. मधु गुलाटी आदि मौजूद रहीं।
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14.7 फीसदी है जिले की अनमेट नीड
डॉ. नंद कुमार ने बताया कि राष्ट्रीय पारिवारिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएचएफएस)-पांच के आंकड़ों के अनुसार जिले का अनमेंट नीड 14.7 फीसदी है। मतलब हर 100 में 14 से 15 महिला या पुरुष ऐसे हैं, जो परिवार नियोजन का साधन अपनाना चाहते हैं, लेकिन इन साधनों की जानकारी उन तक नहीं पहुंच पा रही है।
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