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एमएमएमयूटी के छात्रों का कमाल: अब एआई सिस्टम बता देगा हड्डियों की उम्र भी, 6 महीने तक सटीक अनुमान

Thu, 17 Sep 2026 04:01 PM IST
Rohit Singh पुरुषोत्तम राय, गोरखपुर
पुरुषोत्तम राय, गोरखपुर Published by: Rohit Singh Updated Thu, 17 Sep 2026 04:01 PM IST
सार

मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) के छात्रों ने एक ऐसा एआई सिस्टम बनाया है जो हाथ और कलाई के एक्स-रे को देखकर बच्चों की हड्डियों की उम्र का पता लगा सकता है। इससे पता चलेगा कि उम्र के हिसाब से बच्चों की हड्डियों का विकास सही हो रहा है या नहीं।

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AI system to determine bone age too: Research by MMUT students
एमएमएमयूटी( सांकेतिक) - फोटो : स्त्रोत- सोशल मीडिया

विस्तार

बच्चों की हड्डियां कितनी विकसित हुई हैं और उनकी उम्र के हिसाब से उनका विकास सही तरीके से हो रहा है या नहीं, यह पता लगाने के लिए एमएमएमयूटी के छात्रों ने एक एआई सिस्टम तैयार किया है। यह सिस्टम हाथ और कलाई के एक्स-रे को देखकर बच्चे की बोन एज (हड्डियों की उम्र) का अनुमान लगा सकता है।

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एमएमएमयूटी के छात्र अमर्त्य पांडेय और सक्षम शर्मा ने डॉ. रितेश मौर्य और डॉ. अभिषेक वर्मा के मार्गदर्शन में यह ‘एआई आधारित बाल अस्थि आयु पूर्वानुमान प्रणाली’ तैयार की है। यह सिस्टम कंप्यूटर विजन तकनीक के जरिए हाथ और कलाई के एक्स-रे का विश्लेषण करता है और हड्डियों की परिपक्वता के आधार पर बोन एज का अनुमान लगाता है। इससे डॉक्टरों को बच्चे की हड्डियों के विकास का आकलन जल्दी और एक समान तरीके से करने में मदद मिल सकती है।
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12,715 एक्स-रे से तैयार हुआ सिस्टम
सिस्टम को तैयार करने के लिए 12,715 एक्स-रे तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया। इनमें रेडियोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ नॉर्थ अमेरिका (आरएसएनए) और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के बोन एज से जुड़े डेटासेट शामिल हैं।
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सिस्टम में प्री-ट्रेंड कन्वनेक्स्ट-लार्ज (पहले से प्रशिक्षित एआई मॉडल) तकनीक का उपयोग हुआ है। मॉडल की क्षमता जांचने के लिए केवल प्रशिक्षण में इस्तेमाल किए गए एक्स-रे पर निर्भर नहीं किया गया। स्वतंत्र डेटासेट पर भी इसका परीक्षण किया गया।

आईसीएमआर और आईआईटी कानपुर से जुड़े स्वतंत्र परीक्षण में सिस्टम के अनुमान और वास्तविक हड्डी की उम्र के बीच औसत अंतर करीब छह महीने रहा।इससे यह जांचने में मदद मिली कि प्रशिक्षण में इस्तेमाल नहीं किए गए नए एक्स-रे पर सिस्टम कैसा प्रदर्शन करता है। छात्रों के इस प्रोजेक्ट ने आईसीएमआर-एनएचए-आईआईटी कानपुर हैकथॉन में भी जीत हासिल की है।

अभी इन दो विधियों से जांची जाती है हड्डियों की उम्र
बच्चों की हड्डियों की उम्र जानने के लिए अभी ग्रीलिच-पाइल और टैनर-व्हाइट हाउस विधियां प्रचलित हैं। ग्रीलिच-पाइल में हाथ और कलाई के एक्स-रे की मानक चित्रों से तुलना कर बोन एज का अनुमान लगाया जाता है। टैनर-व्हाइट हाउस में हाथ की अलग-अलग हड्डियों के विकास को अंक देकर कुल स्कोर के आधार पर उम्र निर्धारित की जाती है।

दोनों विधियां बच्चे के शारीरिक विकास का आकलन करने में उपयोगी हैं। आकलन चिकित्सा विशेषज्ञों की टीम करती हैं जिसमें एक हड्डी एवं जोड़ विशेषज्ञ को शामिल किया जाना अनिवार्य होता है।

सिस्टम में होगी एक्स-रे की सुविधा
डॉ.अभिषेक वर्मा ने बताया कि अभी सिस्टम में एक्स-रे प्लेट का उपयोग किया जा रहा है। जल्द ही इसमें बॉक्सनुमा एक्स-रे मशीन भी जोड़ी जाएगी। बच्चे का हाथ बॉक्सनुमा मशीन में डालकर सिस्टम से हड्डियों की उम्र का आकलन किया जा सकेगा।

कानपुर में हाल ही में आयोजित एआई मंथन 2.0 में एआई आधारित बाल अस्थि आयु पूर्वानुमान प्रणाली का प्रदर्शन किया गया था। अटल बिहारी बाजपेयी चिकित्सा विश्वविद्यालय के कुलपति ने इस सिस्टम को देखने के बाद मिलकर काम करने की इच्छा जताई है। भविष्य में इस संभावना पर भी काम किए जाने का प्रयास होगा: प्रो. अनुपमा काैशिक शर्मा, कुलपति, एमएमएमयूटी
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