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Corona in Gorakhpur: गायनी और एनेस्थीसिया का विभाग फिर हुआ शुरू, पहले दिन हुए 8 ऑपरेशन
Wed, 10 Jun 2020 09:24 PM IST
अमर उजाला लोकल ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Wed, 10 Jun 2020 09:24 PM IST
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बीआरडी मेडिकल कॉलेज में गायनी, पीडिया और एनेस्थीसिया विभाग में बुधवार को फिर से मरीजों को देखने का सिलसिला शुरू हो गया है। एनेस्थीसिया के डॉक्टरों ने सुबह में आठ ऑपरेशन कराने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा किए। यह ऑपरेशन गायनी, आर्थोपेडिक और जनरल सर्जरी विभाग के मरीजों के हुए।
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इन सभी मरीजों को पहले से ही ऑपरेशन की तिथि दी गई थी। इसके अलावा इमरजेंसी में भी ऑपरेशन हुए। एनेस्थीसिया के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. नरेंद्र देव ने बताया कि विभाग में हर चार घंटे पर सैनिटाइज होता रहा।
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बताया कि बुधवार को प्राचार्य ने सभी विभागाध्यक्षों के साथ बैठक की। इस दौरान विभाग के गतिविधियों की पूरी जानकारी भी ली है। गायनी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ.वाणी आदित्य पूरे दिन ड्यूटी करती रही। उनके साथ एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुधीर गुप्ता मौजूद रहे।
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उन्होंने बताया कि बुधवार को सिर्फ 12 मरीज इलाज के लिए पहुंचे थे। मरीजों के इलाज में कोविड-19 के नियमों का पालन किया जा रहा है। अब तक करीब 200 मरीजों की कोरोना जांच कराई गई है। इसमें पॉजिटिव नहीं मिला है।
कोरोना वार्ड में ड्यूटी करने वाले डॉक्टरों ने मांगा वेतन
बीआरडी मेडिकल कालेज के कोरोना वार्ड में तैनात सीनियर रेजीडेंटों ने बुधवार को प्राचार्य से मिलकर वेतन की मांग की है। यह सीनियर रेजीडेंट अंतिम वर्ष के हैं। इनके कोर्स का समय अप्रैल में पूरा हो चुका है। रेजीडेंट डॉक्टरों ने बताया कि कोर्स पूरा हो गया है। इसके बावजूद कोरोना को देखते हुए बीआरडी में ड्यूटी कर रहे हैं।
कोई रेजीडेंट ड्यूटी छोड़कर नहीं गया। अब वेतन का संकट हो गया है। मई का वेतन नहीं मिला है। इससे रेजीडेंटों के सामने आर्थिक समस्या खड़ी हो गई है। प्राचार्य डॉ. गणेश कुमार ने आश्वासन दिया कि कोरोना से जंग में असली सिपाही रेजीडेंट डॉक्टर ही हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि वेतन का भुगतान किया जाएगा।
कोई रेजीडेंट ड्यूटी छोड़कर नहीं गया। अब वेतन का संकट हो गया है। मई का वेतन नहीं मिला है। इससे रेजीडेंटों के सामने आर्थिक समस्या खड़ी हो गई है। प्राचार्य डॉ. गणेश कुमार ने आश्वासन दिया कि कोरोना से जंग में असली सिपाही रेजीडेंट डॉक्टर ही हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि वेतन का भुगतान किया जाएगा।