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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   The compensation issue for Jungle Kaudia Sonauli Highway Ring Road could not be resolved in the seventh panchayat. Farmers have started the process of judicial arbitration.

आर्बिटेशन: तैयारी में जुटे किसान

Wed, 14 Jun 2023 01:33 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 14 Jun 2023 01:33 AM IST
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The compensation issue for Jungle Kaudia Sonauli Highway Ring Road could not be resolved in the seventh panchayat. Farmers have started the process of judicial arbitration.
जब न्यायिक मध्यस्थता में ही जाना था तो क्यों करा रहे थे पंचायत
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नाराज किसान तैयार करा रहे दस्तावेज, पीपीगंज क्षेत्र के 100 से अधिक किसानों ने अधिवक्ताओं से की मुलाकात

जंगल कौड़िया सोनौली रिंग रोड का मामला

संवाद न्यूज एजेंसी

गोरखपुर। जंगल कौड़िया सोनौली हाइवे रिंग रोड के लिए मुआवजे मामला सातवीं पंचायत में नहीं सुलझ सका। इससे किसानों ने काफी नाराजगी है। किसानों ने न्यायिक मध्यस्थता (आर्बिट्रेशन) की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अपने दस्तावेज तैयार करा रहे हैं। विधि विशेषज्ञों से सलाह लेकर लोग अपना-अपना वाद दाखिल करने में जुट गए हैं। इसके लिए पीपीगंज के 100 से अधिक किसानों ने अपने अधिवक्ताओं से मुलाकात की। वहीं, किसानों का कहना है कि जब आर्बिट्रेशन (न्यायिक मध्यस्थता) में ही जाना था तो प्रशासनिक अधिकारी पंचायत क्यों करा रहे थे। इससे अच्छा रहता कि शिविर लगाकर इस प्रक्रिया के बारे में जानकारी दे देते।

जंगल कौड़िया सोनौली रिंग के निर्माण के लिए पीपीगंज क्षेत्र के बगहीभारी, जंगल अगही, बिहुली, साहबगंज सहित करीब आधा दर्जन गांवों के किसानों की भूमि अधिगृहित की जा रही है। कुछ किसानों के बैंक खातों में मुआवजा की रकम भेजी भी गई, लेकिन बाद में निकासी पर रोक लगा दी गई। वहीं, शहरी क्षेत्र में शामिल हो चुके गांव के किसान मुआवजे की दर को लेकर आंदोलनरत हैं।
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इसी क्रम में डीएम की पहल पर बीते रविवार को किसानों, तहसील प्रशासन और एसएलओ विशेष भूमि अध्याप्ति धिकारी विभाग के कर्मचारियों की आयोजित बैठक बेनतीजा रही। इसके बाद से ही किसान न्यायिक मध्यस्थता की प्रक्रिया में जुट गए हैं। किसान कृष्णदेव पाठक, ब्रह्मदेव, दीपक चौहान और राधिका ने अपने दस्तावेज जमा करा दिए हैं। किसानों की मांग है कि डीएम इसे प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित कराएं।
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यह है न्यायिक मध्यस्थता की प्रक्रिया
जानकारों का कहना है कि न्यायिक मध्यस्थता, वैकल्पिक विवाद समाधान की एक विधि के रूप में लोकप्रिय प्रक्रिया है। जिस विवाद में एक या अधिक पक्ष हों, वह अपने मामले को कोर्ट में ले जाकर शीघ्र निस्तारण करने के लिए आर्बिट्रेशन दाखिल करते हैं। इसमें पक्षकार अपनी प्राॅपर्टी, जमीन से संबंधित साक्ष्य समेत संबंधित मध्यस्थ के सामने प्रस्तुत कर अपनी बातों को रखते हैं, जिससे कि उनके मामले को शीघ्र निस्तारित किया जा सके। इसकी प्रक्रिया एक माह की होती है। यदि किसान, काश्तकार यदि इससे संतुष्ट नहीं होते हैं, तो वह हाईकोर्ट में अपील कर सकते हैं।


आर्बिट्रेशन के लिए जरूरी दस्तावेज

1.खतौनी

2.आधार कार्ड

3. संबंधित ग्राम सभा के अधिनिर्णय की नकल

4.पैन कार्ड की छाया प्रति

5.बैंक पासबुक की छाया प्रति

6. पांच फोटो

7.संबंधित जमीन, खेत की फोटो

(अवसंरचना रहित या सहित )

8. गजट की कॉपी
पंचायत में बुलाकर बेवजह परेशान किया
हम लोगों को बेवजह पंचायत में बुलाकर परेशान किया जा रहा था। जब इसी प्रक्रिया से गुजरना था तो शिविर लगाकर इसकी जानकारी देते। हम लाेगों ने वाद दाखिल कर दिया है। अन्य लोग भी अधिवक्ताओं से सलाह ले रहे हैं।
कपिल देव पाठक, किसान
ले रहे हैं विधिक सलाह
कानूनी प्रक्रिया के बारे में अधिक लोगों को जानकारी नहीं है। इसलिए लोग विधिक सलाह ले रहे हैं। वाद दाखिल करने के बाद डीएम तत्काल इसका निस्तारण कराएं। : ब्रह्मदेव पाठक, किसान

सामान्य किसानों के लिए कानूनी प्रक्रिया कठिन

सामान्य किसानों के लिए कानूनी प्रक्रिया कठिन होती है। इसलिए किसान अधिवक्ताओं से सलाह ले रहे हैं। सभी किसानों को बताया जा रहा है कि जल्द से जल्द प्रक्रिया पूरी कराएं, जिससे राहत मिल सके। : विमल जायसवाल, किसान



कोट
ऐसे मामलों के लिए मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम 1966 एक्ट बनाया गया है, जो किसी भी विवाद के उत्पन्न के बाद में संबंधित विभाग की सहमति से एक न्यायाधिकरण का गठन करेंगे। : धीरेंद्र द्विवेदी, महामंत्री बार एसोसिएशन, सिविल कोर्ट
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