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शिक्षक दिवस विशेष: स्पेस में ऊर्जा की बर्बादी रोकने वाला मटेरियल तैयार कर रहे डॉ. प्रशांत, जापान की मदद से रिसर्च में जुटे

Sun, 05 Sep 2021 02:42 AM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sun, 05 Sep 2021 02:42 AM IST
सार

गोरखपुर विश्वविद्यालय में हैं भौतिकी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर, यूनिवर्सिटी ऑफ टोक्यो, जापान की मदद से रिसर्च में जुटे हैं।

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Teacher Day Special story Dr. Prashant preparing material to stop wastage of energy in space
असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. प्रशांत शाही। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

गोरखपुर विश्वविद्यालय में भौतिकी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. प्रशांत शाही न सिर्फ अध्यापन करते हैं, बल्कि सोलर सिस्टम, इलेक्ट्रिक सर्किट व स्पेस में ऊर्जा की बर्बादी रोकने वाले मटेरियल को भी तैयार कर रहे हैं। यह ऐसी तकनीक है जिस पर पूरी दुनिया में खोज चल रही है। डॉ. शाही को इस दिशा में कामयाबी भी मिली है, जिसका मूल्यांकन चल रहा है।

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मूलत: कुशीनगर के बनवीरा गांव के निवासी डॉ. प्रशांत बांसगांव कॉलोनी में रहते हैं। उनके पिता अखिलेश्वर शाही अधिवक्ता हैं। डॉ. शाही ने बताया कि वह थर्मोइलेक्ट्रिकल मटेरियल पर शोध कर रहे हैं। सोलर सिस्टम, इलेक्ट्रिकल सर्किट व स्पेस में हम बड़ी मात्रा में ऊर्जा की बर्बादी करते हैं। हम जितनी ऊर्जा सर्किट, सोलर सिस्टम या स्पेस में प्रयोग करते हैं उसका 80 फीसदी तक हिस्सा हीट यानी गर्मी के रूप में बर्बाद होता है। विश्व के कई देश इस पर रिसर्च कर रहे हैं, ताकि हीट के रूप में बर्बाद होने वाली ऊर्जा को कम किया जा सके।
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अभी तक के रिसर्च में उन्होंने थर्मोइलेक्ट्रिक पॉवर की प्रापर्टी के मेजरमेंट के लिए अत्याधिक दबाव वाली तकनीक ईजाद कर ली है। इस तकनीक की जांच अब यूनिवर्सिटी ऑफ टोक्यो, जापान में होगी जिसकी मदद वे अपना रिसर्च कर रहे हैं। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने उन्हें इस कार्य के लिए वर्ष 2019 में 32 लाख का ग्रांट दिया है।
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प्रकाशित हो चुके हैं 30 से ज्यादा शोधपत्र
डॉ. प्रशांत ने गोरखपुर विवि से एमएससी करने के बाद आईआईटी बीएचयू से स्ट्रांगली कोरिलेटेड मटेरियल पर शोध कार्य वर्ष 2015 में पूरा किया। पीएचडी पूरा करने के बाद डॉ शाही ने यूनिवर्सिटी ऑफ टोक्यो जापान एवं चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंस से पीडीएफ किया। इस दौरान सुपरकंडक्टिविटी और थर्मोइलेक्ट्रिकल मटेरियल्स पर शोध किया। इसी दौरान कुछ ऐसे थर्मोइलेक्ट्रिक मटेरियल्स तैयार हुआ, जिनके इस्तेमाल से ऊर्जा की बर्बादी तीन से चार फीसदी तक कम की जा सकती है।



 

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