गर्भवती महिला अंतिम माह में बरतें विशेष सावधानी, खुद को ऐसे रखे कोरोना से सुरक्षित
- गर्भावस्था में तीन से चार बार रुटीन चेकअप जरूरी
- जिला अस्पताल में हर माह होती है 300 से अधिक डिलीवरी
विस्तार
कोरोना महामारी के बीच गर्भवती विशेष सावधानी बरतें। गर्भावस्था में संक्रमण का खतरा सबसे अधिक रहता है। क्योंकि उनकी इम्यूनिटी गर्भावस्था के दौरान आम महिलाओं की तुलना में कमजोर हो जाती है। ऐसे में गर्भावस्था के दौरान कम से कम तीन बार रुटीन चेकअप जरूरी है। ऐसे में विशेषज्ञ कोरोना से बचाव को लेकर जो सावधानियां बता रहे हैं, उन पर विशेष अमल करें। सोशल डिस्टेंसिंग, सफाई और हाईजीन का विशेष ध्यान दें।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज की स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ वाणी आदित्य ने बताया कि कोरोना वायरस को लेकर यह बात सामने आई है कि कोरोना संक्रमित गर्भवती का बच्चा कोरोना संक्रमण का शिकार नहीं हो सकता। लेकिन इन सबके बीच जरूरी है विशेष सावधानी बरतने की।
खासकर डिलीवरी के अंतिम समय में विशेष देखभाल करें। अगर इस दौरान लापरवाही होती है, तो गर्भवती को खतरा ज्यादा है। क्योंकि गर्भावस्था के अंतिम समय में महिलाओं की इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है। इसकी वजह से वायरस का असर जल्दी होता है, जो बेहद खतरनाक होता है। इसलिए गर्भावस्था के दौरान कम से तीन से चार बार रुटीन चेकअप जरूर कराएं। बहुत जरूरी हो, तो ही इस वक्त अस्पताल जाएं। जरूरी हो तो टेलीमेडिसिन की सलाह भी ले सकते हैं।
आखिरी तीन माह ज्यादा खतरनाक
गर्भावस्था के दौरान डिलीवरी होने से पहले के तीन माह ज्यादा खतरनाक है। डॉ वाणी आदित्य के मुताबिक संक्रमण का जितना खतरा सामान्य लोगों को है, उतना ही गर्भवती को भी है। लेकिन प्रेग्नेंसी के आखिरी तीन माह बेहद खतरनाक है। ऐसे समय में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
बच्चा संक्रमित है, तो भी मां पिला सकती हैं दूध
डॉ वाणी आदित्य ने बताया कि अगर कोई बच्चा संक्रमित है, तो मां दूध पिला सकती हैं। ऐसे केस मेडिकल कॉलेज में आए भी है। मां को संक्रमण से बचाने के लिए ट्रेनिंग दी गई, जिसका नतीजा यह रहा है कि मां संक्रमित नहीं हुई और बच्चा भी केवल मां के दूध से कोरोना को हराकर घर चला गया।