{"_id":"6a57ea3e94f098f74200690f","slug":"survey-of-land-parcel-chak-in-jungle-aurahi-inspected-gorakhpur-news-c-7-1-gkp1055-1387427-2026-07-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"Gorakhpur News: रोवर तकनीक से जमीन की पैमाइश हुई आसान, मंडलायुक्त ने किया परीक्षण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Gorakhpur News: रोवर तकनीक से जमीन की पैमाइश हुई आसान, मंडलायुक्त ने किया परीक्षण
विज्ञापन
गोरखपुर। राजस्व विभाग में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से अब जमीन की पैमाइश अधिक सटीक और आसान हो गई है। इसी क्रम में मंडलायुक्त अनिल ढींगरा ने बुधवार को तहसील सदर के जंगल औराही गांव पहुंचकर रोवर उपकरण से चक संख्या 306 की पैमाइश का परीक्षण किया। इस दौरान तहसीलदार एवं डिप्टी कलेक्टर ज्ञान प्रताप सिंह ने उन्हें पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी।
निरीक्षण के दौरान बताया गया कि राजस्व परिषद उत्तर प्रदेश की ओर से प्रदेश की सभी तहसीलों को रोवर उपकरण उपलब्ध कराया गया है। इस तकनीक में सबसे पहले एक फिक्स पाॅइंट स्थापित किया जाता है, जिसे सैटेलाइट के माध्यम से अक्षांश और देशांतर के आधार पर निर्धारित किया जाता है। इसके बाद संबंधित चक की पैमाइश अभिलेखों में दर्ज रकबे और नक्शे के अनुसार अत्यंत सटीक तरीके से की जाती है।
अधिकारियों ने बताया कि रोवर तकनीक की खासियत यह है कि पैमाइश के दौरान खेत में पेड़, भवन, पानी भरा होने या ऊंची-नीची जमीन जैसी बाधाओं का कोई असर नहीं पड़ता। इससे शत-प्रतिशत शुद्धता के साथ माप संभव होती है। पैमाइश का पूरा डेटा कंप्यूटर में सुरक्षित रहता है, जिसका भविष्य में उसी गांव की अन्य जमीनों की पैमाइश के लिए भी आधार के रूप में उपयोग किया जा सकता है।
विज्ञापन
मंडलायुक्त अनिल ढींगरा ने रोवर उपकरण की कार्यप्रणाली और विशेषताओं का बारीकी से अवलोकन किया तथा राजस्व अधिकारियों और कर्मचारियों को इस तकनीक का अधिक से अधिक उपयोग करने के निर्देश दिए। इस अवसर पर नायब तहसीलदार सदर देवेंद्र यादव, राजस्व निरीक्षक विनय श्रीवास्तव समेत अन्य राजस्व कर्मचारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
विज्ञापन
निरीक्षण के दौरान बताया गया कि राजस्व परिषद उत्तर प्रदेश की ओर से प्रदेश की सभी तहसीलों को रोवर उपकरण उपलब्ध कराया गया है। इस तकनीक में सबसे पहले एक फिक्स पाॅइंट स्थापित किया जाता है, जिसे सैटेलाइट के माध्यम से अक्षांश और देशांतर के आधार पर निर्धारित किया जाता है। इसके बाद संबंधित चक की पैमाइश अभिलेखों में दर्ज रकबे और नक्शे के अनुसार अत्यंत सटीक तरीके से की जाती है।
विज्ञापन
अधिकारियों ने बताया कि रोवर तकनीक की खासियत यह है कि पैमाइश के दौरान खेत में पेड़, भवन, पानी भरा होने या ऊंची-नीची जमीन जैसी बाधाओं का कोई असर नहीं पड़ता। इससे शत-प्रतिशत शुद्धता के साथ माप संभव होती है। पैमाइश का पूरा डेटा कंप्यूटर में सुरक्षित रहता है, जिसका भविष्य में उसी गांव की अन्य जमीनों की पैमाइश के लिए भी आधार के रूप में उपयोग किया जा सकता है।
विज्ञापन
मंडलायुक्त अनिल ढींगरा ने रोवर उपकरण की कार्यप्रणाली और विशेषताओं का बारीकी से अवलोकन किया तथा राजस्व अधिकारियों और कर्मचारियों को इस तकनीक का अधिक से अधिक उपयोग करने के निर्देश दिए। इस अवसर पर नायब तहसीलदार सदर देवेंद्र यादव, राजस्व निरीक्षक विनय श्रीवास्तव समेत अन्य राजस्व कर्मचारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।