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गोरखपुर: रोजगार के द्वार भी खोलेगा अनुपूरक उद्योग का दर्जा, 500 लोगों को मिलेगा काम

Wed, 26 Jan 2022 01:05 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 26 Jan 2022 01:05 PM IST
सार

गोरखपुर खाद कारखाने की जरूरतों को पूरा करने के लिए यहां के उद्योगों में कम से कम 500 लोगों को रोजगार मिलेगा। कुछ फैक्ट्रियों ने क्षमता विस्तार शुरू किए तो कुछ ने प्रोजेक्ट को रोका।

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status of supplementary industry will also open doors of employment in Gorakhpur
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : पीटीआई

विस्तार

गोरखपुर के उद्योगों को यदि खाद कारखाना प्रबंधन, अनुपूरक उद्योग का दर्जा दे तो रोजगार के द्वार भी खुलेंगे। जानकारों के मुताबिक, अनुपूरक उद्योग बन जाने से ज्यादा उत्पादन की आवश्यकता होगी। इससे कम से कम 500 और लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है।

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वैसे तो कुछ फैक्ट्रियों में खाद कारखाने की जरूरतों के मुताबिक उत्पाद तैयार हो रहे हैं, लेकिन इनको क्षमता विस्तार करने की जरूरत पड़ेगी। वहीं, कुछ उद्यमियों ने एंसिलरी उद्योग का दर्जा नहीं मिलने की वजह से अपने प्रोजेक्ट को रोक दिया।
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गोरखपुर की मॉडर्न लैमिनेटर्स और मॉडर्न पैकेजिंग में रोजाना करीब तीन लाख हाई डेंसिटी पॉलिथीन (एचडीपी) यानी उत्कृष्ट गुणवत्ता वाली प्लास्टिक की बोरियां तैयार होती हैं। इन बोरियों को प्रदेश के विभिन्न पार्टियों के अलावा देश के अन्य राज्यों के खाद कारखानों को भी आपूर्ति की जाती है। गोरखपुर में खाद कारखाने के खुलने के बाद से इन फैक्ट्रियों ने अपनी क्षमता का विस्तार करना शुरू कर दिया है।
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उद्यमियों को पूरी उम्मीद भी है कि आने वाले समय में खाद कारखाना गोरखपुर के उद्योगों को अनुपूरक उद्योगों का दर्जा देगा और गोरखपुर के उत्पादों की खपत बढ़ेगी। लिहाजा रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।

मॉडर्न लैमिनेटर्स के निदेशक किशन बथवाल ने कहा कि वह अपनी कंपनी का विस्तार कर रहे हैं। फैक्ट्री की क्षमता एक लाख बोरे की बढ़ाई जा रही है। इससे कम से कम 300 लोगों को रोजगार मिलेगा। इसके अलावा श्रीकृष्णा पॉलीफैब के भोला जायसवाल ने एचडीपी प्लास्टिक की बोरियां बनाने की दो यूनिट लगाने की योजना बनाई थी, लेकिन उन्होंने अब सिर्फ एक फैक्ट्री लगाने का निर्णय लिया है। एक फैक्ट्री में भी कम से कम सौ से डेढ़ सौ लोगों को रोजगार मिलेगा।

गुणवत्ता जांचने में खाद कारखाने को भी होगी सहूलियत

अगर गोरखपुर की फैक्ट्रियों को अनुपूरक उद्योगों का दर्जा मिल जाए तो खाद कारखाने को आपूर्ति संबंधी उत्पादों की गुणवत्ता जांचने में भी काफी सहूलियत होगी। इसके अलावा उनके लिए यह आर्थिक रूप से भी फायदेमंद साबित होगा। उत्पादों की गुणवत्ता जांचने के लिए उन्हें अपनी टीम को ना सिर्फ बहुत कम दूर भेजना पड़ेगा, बल्कि समय की भी बचत होगी। ट्रांसपोर्टेशन पर आने वाले खर्च में भी कमी आएगी।

पॉलीफैब श्रीकृष्णा के निदेशक भोला जायसवाल ने कहा कि गोरखपुर खाद कारखाने के खुलने से हमें काफी उम्मीदें थी। हम अपने उत्पादों की आसानी से सप्लाई कर सकते थे, लेकिन ऐसा होता नहीं दिखाई दे रहा है। अनुपूरक उद्योग का दर्जा नहीं मिलने की वजह से पहले जहां, प्लास्टिक की बोरियां तैयार करने संबंधी दो फैक्ट्रियां लगाने की योजना थी, अब सिर्फ एक फैक्ट्री ही लगा रहे हैं। इसमें 100 से डेढ़ सौ लोगों को रोजगार मिलेगा। दो फैक्ट्रियां खुल जातीं तो कम से कम 300 लोगों को रोजगार मिलता।

चेंबर ऑफ इंडस्ट्रीज अध्यक्ष विष्णु अजीत सरिया ने कहा कि खाद कारखाने द्वारा गोरखपुर की फैक्ट्रियों को अनुपूरक उद्योगों का दर्जा अवश्य दिया जाना चाहिए। यह सिर्फ गोरखपुर के उद्योगों के लिए ही नहीं खाद कारखाने के लिए भी फायदेमंद साबित होगा। उन्हें बहुत ही कम समय में अपनी फैक्ट्री की जरूरत संबंधित उत्पाद आसानी से मिल सकेंगे। अगर उन्हें क्वालिटी जांचने की आवश्यकता पड़ेगी, तब भी वह दूरी कम होने की वजह से आसानी से कर सकते हैं।
  

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