गोरखपुर में दोहरे हत्याकांड के बाद एसएसपी हुए सख्त, बोले- लापरवाही मिली तो नपेंगे थानेदार
- गगहा और झंगहा में हत्या के मामले में पुलिस की लापरवाही उजागर होने के बाद एसएसपी का आदेश
- एसपी की तय की गई जिम्मेदारी, समीक्षा कर देना होगा जवाब
- हर महीने थानेदार को बताना होगा, दर्ज एनसीआर की विवेचना में क्या मिला
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उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में एनसीआर दर्ज कर फाइल बंद करने का खेल अब नहीं चलेगा। बीते दिनों गगहा में मां-बेटे और झंगहा इलाके में युवक की हत्या के मामले में पुलिस की लापरवाही उजागर होने के बाद अब एसएसपी ने एनसीआर को लेकर सख्त आदेश जारी किया है। इसके मुताबिक, हर महीने 20 से 22 तारीख के बीच एसपी को थानेदार यह बताएंगे कि उनके यहां कितने एनसीआर दर्ज किए गए और उसकी विवेचना में क्या पाया गया। अगर एफआईआर दर्ज करने की जरूरत थी तो फिर किया गया या नहीं।
आमतौर पर पुलिस मारपीट के मामलों में एनसीआर दर्ज कर आरोपित का शांतिभंग में चालान कर देती है। पुलिस का सारा जोर मामले को रफा-दफा करने पर होता है। जबकि होना यह चाहिए कि मामला गंभीर हो तो पीड़ित के चिकित्सीय जांच रिपोर्ट के आधार पर एनसीआर को एफआईआर में तब्दील किया जाए।
जानकारी के मुताबिक, एसएसपी ने यह जिम्मेदारी एसपी को सौंपी है कि वह अपने इलाके के थानेदारों से हर महीने दर्ज एनसीआर की समीक्षा करें और उसकी रिपोर्ट सौंपे। एसएसपी का मानना है कि मानीटरिंग नहीं होने से लापरवाही शुरू हो जाती है। फिर छोटा मामला भी बड़े वारदात के रूप में सामने आता है। इस वजह से एसपी, सीओ सबकी जिम्मेदारी तय की गई है। एसएसपी ने साफ कर दिया है कि विवेचना के दौरान मामला गंभीर पाए जाने पर यदि एफआईआर दर्ज नहीं किया गया तो थानेदार पर कार्रवाई की जाएगी।
एफआईआर दर्ज करने में आनाकानी नहीं चलेगी
दरअसल, गगहा में जिस महुआ के पेड़ को लेकर मां और बेटे की हत्या की गई थी, उस मामले में शिकायत थाने तक पहले भी पहुंची थी, लेकिन तब पुलिस ने मामले को हल्के में लिया था और बड़ी वारदात हो गई। झंगहा इलाके में युवक की हत्या के मामले में भी पुलिस की लापरवाही सामने आई। वहां पर भी विवाद की सूचना थाने पर पहले दी गई थी। पुलिस ने एनसीआर दर्ज करने के बाद उसकी विवेचना नहीं की। बाद में युवक की हत्या हो गई।
फरियाद लेकर अफसरों तक आने वाले लोगों से यह जानकारी जुटाई जा रही है कि वह थाने पर गए थे या नहीं। अगर थाने पर गए थे, तो वहां के रजिस्टर में उनकी इंट्री है या नहीं, इन सब का ब्योरा जुटाया जा रहा है। इस आधार पर थानेदार के काम की मानीटरिंग की जा रही है। यह व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है कि थाने पर सबकी फरियाद सुनी जाए और एफआईआर दर्ज करने में आनाकानी न हो।
थाने पर तैयार की जा रही है टॉप 20 बदमाशों की सूची
जिले के थानों पर टॉप 20 बदमाशों की सूची तैयार की जा रही है। थानेदार और सीओ खुद इसकी मानीटरिंग कर रहे हैं। सूची तैयार करने के साथ ही बदमाशों पर कार्रवाई भी करनी होगी। इसकी मानीटरिंग खुद एसएसपी करेंगे। थानेदार को अपराधियों के संपत्ति का ब्योरा जुटाने का भी आदेश दिया गया है। इस काम में पुलिस गोपनीय रूप से कुछ संभ्रात लोगों की भी मदद लेगी।
एसएसपी जोगेंद्र कुमार ने बताया कि एनसीआर दर्ज करने के बाद उसकी विवेचना करनी होगी। मामला गंभीर पाए जाने पर उसी हिसाब से कार्रवाई की जाएगी। साथ ही थाने पर टॉप 20 बदमाशों की सूची तैयार कराई जा रही है। बदमाशों की संपत्ति का भी ब्योरा जुटाना होगा। किसी भी हाल में बदमाशों को बख्शा नहीं जाएगा, उन पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।