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यूपी: एसएसपी के 'जैसे को तैसा' फार्मूले से महकमे में मचा हड़कंप, पुलिस वालों के उड़े होश

Fri, 25 Dec 2020 11:30 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Fri, 25 Dec 2020 11:30 AM IST
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SSP Jogendra kumar action against corruption in Gorakhpur Police upset
गोरखपुर के एसएसपी जोगेंद्र कुमार। - फोटो : अमर उजाला
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में खाकी को शर्मसार करने वाली दो घटनाएं सामने आई हैं। एफआईआर दर्ज करने में आनाकानी और मुकदमे से नाम हटाने के एवज में पैसा मांगने के आरोप में गोला थाने में तैनात दरोगा विवेक चतुर्वेदी के खिलाफ भ्रष्टाचार की धाराओं में केस दर्ज कराया गया है। भ्रष्टाचार का आरोप जांच में सही पाया गया तो एसएसपी जोगेंद्र कुमार ने दरोगा को निलंबित कर दिया है। दूसरी तरफ गोवंश तस्करी में देवरिया के सलेमपुर थाने में तैनात सिपाही रामानंद यादव को बृह्स्पतिवार को गोरखपुर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।
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बता दें कि खाकी वर्दी की करतूत नई नहीं है, मगर इन पर केस दर्ज करने की जो शुरुआत एक बार फिर एसएसपी जोगेंद्र कुमार ने की है उससे महकमे में हड़कंप है। एसएसपी के 'जैसे को तैसा' फार्मूला की चर्चा महकमे में खूब है। यह भी कहा जा रहा है कि इस खौफ का कुछ असर पुलिसिया कार्यप्रणाली पर पड़ सकता है।
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जानकारी के मुताबिक, संगीन धाराओं में मुल्जिमों को जेल भेजने वाले खाकी वाले भी कई बार पुलिस की बदनामी का सबब बने हैं। गोरखपुर रेंज में ही पिछले सालों में कई पुलिस वाले इसके उदाहरण हैं जो अपराध से नाता रख चुके हैं। बड़ी बात यह है कि वर्दी वालों पर जब भी आरोप लगे है वह संगीन रहे हैं, कोई छोटा मामला नहीं रहा है। कभी हत्या तो कभी अपहरण कर फिरौती, दुष्कर्म जैसे अपराध में इनकी भूमिका रही है।
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अब तक हस्तक्षेप की जरूरत पड़ती थी

मामला पकड़ में आने के बाद इन पर कार्रवाई होती है और फिर बदनामी पुलिस ही होती है। इससे पहले गोरखपुर में एसएसपी रहे सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज ने भी कुछ ऐसा ही किया था और तब उरूवा थाने में तैनात रहे दरोगाओं पर अपहरण कर रंगदारी मांगने का केस दर्ज हुआ था। एक बार फिर लंबे समय बाद उसी तेवर में कार्रवाई होने से महकमे में कई तरह  की चर्चाएं हैं। सभी अफसरों की सख्ती की चर्चा तो कर रहे हैं लेकिन खुद को बचाने को सतर्क भी हो गए हैं। पुलिस वालों ने इस कार्रवाई को जैसे को तैसा का नाम भी दे डाला है।

ऐसा नहीं है कि पुलिस वालों पहले केस नहीं हुए हैं लेकिन ऐसे मामलों में हस्तक्षेप की जरूरत पड़ी है। कभी मुख्यमंत्री ने कहा तो कभी भ्रष्टाचार निरोधक टीम ने दबोचा। तब जाकर पुलिस वालों पर कानून तोड़ने की कार्रवाई हुई और बेनकाब होने पर भागे-भागे फिरे।

केस एक
18 दिसंबर 2017: उरूवा थाने में तैनात रहे ट्रेनी दरोगा अभिजीत कुमार और रद्युनंदन त्रिपाठी को गिरफ्तार किया गया था। आरोप था कि बिहार के गोपालगंज के छात्र एहसान आलम को धोखे से उसका दोस्त अफजल गोरखपुर लाया था फिर परिचित दोनों दरोगा की मदद से तीन लाख रुपये की फिरौती मांगी गई थी। मामला संज्ञान में आने पर तत्कालीन एसएसपी सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज ने दोनों पर केस दर्ज कराकर गिरफ्तारी कराई थी।

दरोगा ने मांगी थी डॉक्टर से रंगदारी, सीएम के हस्तक्षेप पर हुआ था केस

केस दो
2006 में कुशीनगर जिले के एक कारखाने में युवक की हत्या हुई थी। जिसका सिर काट लिया गया था। आरोप था कि सरकारी जीप का इस्तेमाल कर दरोगा निर्भय नारायण सिंह ने शव को गंडक नदी में बहा दिया था। इस मामले में आईजी के आदेश पर तब केस दर्ज हुआ था और बाद में दरोगा की गिरफ्तारी भी हुई थी। यह मामला भी काफी चर्चित रहा था। इसमें पूरी कार्रवाई आईजी की देखरेख में हुई थी।

केस तीन
2000 में शाहपुर थाने में पूछताछ को लाए गए एक युवक की मौत हो गई थी। आरोप था कि एएसपी ने मारपीट की, इसमें थानेदार भी शामिल थे। पुलिस ने इस मामले में हत्या का केस तत्कालीन थानेदार रहे संजय सिंह पर दर्ज किया था। बाद में उनकी गिरफ्तारी की गई थी और जेल भेजा गया था। तब एसएसपी विजय कुमार यहां पर थे और उनके आदेश पर ही कार्रवाई हुई थी लेकिन माना जाता है कि इस मामले में एक प्रमुख सचिव के आदेश पर ही पुलिस हरकत में आई थी।

22 मई 2019 को वरिष्ठ मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉक्टर रामशरण श्रीवास्तव से रंगदारी वसूलने के मामले में ट्रांसपोर्ट नगर चौकी इंचार्ज रहे शिव प्रकाश सिंह और कथित पत्रकार प्रणव त्रिपाठी पर एफआईआर दर्ज की गई थी। मगर यह केस पुलिस ने नहीं दर्ज किया था। ना ही तब डॉक्टर को पुलिस पर भरोसा था। दो लाख रुपये देने के बाद डॉक्टर ने सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर शिकायत की थी और उनके ही आदेश पर रातोंरात पुलिस हरकत में आ गई थी। आरोपियों पर केस दर्ज करने के साथ ही उनकी गिरफ्तारी भी की गई थी। पुलिस ने इस मामले में रुपये भी वापस कराए थे। तब भी मामला ऑडियो से ही खुला था और डॉक्टर को एक लड़की की धौंस देकर निशाना बनाया गया था, जो लड़की वास्तव में कहीं थी ही नहीं सिर्फ कल्पनाओं में थी।
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