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यहां पढ़िए वफादार कुत्ते और क्रूर जमींदार की रोचक कहानी, 'डॉन' ने बदल दी थी इस शख्स की जिंदगी

Tue, 25 Aug 2020 05:40 PM IST
vivek shukla संतोष श्रीवास्तव, सिद्धार्थनगर।
संतोष श्रीवास्तव, सिद्धार्थनगर। Published by: vivek shukla Updated Tue, 25 Aug 2020 05:40 PM IST
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Special story of William Pepe and his dog unique love
प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : Pixabay

किताबों में आदमी और जानवर के बीच पनपने वाले प्रेम के अनेक ऐसे किस्से मिल जाते हैं, जो समाज के लिए खास प्रेरणादायी होता हैं। कुछ ऐसा ही किस्सा उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले के बर्डपुर क्षेत्र का है।

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आजादी से पूर्व बर्डपुर कस्बे में ब्रिटिश जमींदार विलियम पेपे और उनकी ओर से पाले गए कुत्ते डॉन के बीच का प्रेम काफी ऐतिहासिक है। जिसके चलते जमींदार पेपे की जीवनधारा बदल गई और वह एक क्रूर जमींदार से रहमदिल इंसान में परिवर्तित हो गए।
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बस्ती गजेटियर के अनुसार डब्ल्यू पेपे बर्डपुर क्षेत्र में लगान वसूली के प्रति बेहद सख्त थे। उसी दौरान डब्ल्यू पेपे गोरखपुर के किसी अंग्रेज अफसर से कुत्ते का एक बच्चा लाए तथा उन्होंने उसका नाम डॉन रखा। डॉन को वह बहुत प्रेम करते थे।

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वर्ष 1941 में पेपे किसी किसान को लगान के मामले में पिटाई कर रहे थे। अचानक उनकी चलाई छड़ी बगल में चहल कदमी कर रहे डॉन को लग गई, जिस पर वह काफी चीखने लगा। यह देख उन्होंने किसान को छोड़ दिया और डॉन की सेवा में लग गए।

डॉन अपने मालिक की चोट से कम उनके क्रूर व्यवहार से अधिक दुखी था। इसके बाद वह बीमार रहने लगा और 1942 में वह मौत की आगोश में चला गया। डॉन की मौत से डब्ल्यू पेपे बहुत सदमे में थे। इसके बाद उनमें काफी बदलाव आ गया। उन्होंने किसानों पर जुल्म ढाना बंद कर दिया।

हालत यह हुई कि आजादी के बाद जब वह इंग्लैंड लौटने लगे तो उन्होंने अपनी जमींदार की जमीनें लोगों को सांकेतिक मूल्य पर उन्होंने देनी शुरू कर दी, जो कुछ दे पाने में अक्षम थे, उन्हें भी जमीनें रजिस्ट्री कर दी।

डब्ल्यू पेपे आज नहीं है, मगर इस क्षेत्र की जनता उनके हृदय परिवर्तन के चलते आज भी अंग्रेज साहब कहकर याद करती है। बर्डपुर स्थित डाकबंगले के पास उनके कुत्ते की मजार इस बात की गवाह है कि उस मासूम जानवर की पीड़ा ने किस प्रकार उनकी जीवनधारा बदल दी।

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