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पहले परिवार का सहारा बनीं, फिर दूसरों के लिए खोली आजीविका की राह

Fri, 25 Sep 2020 10:47 AM IST
vivek shukla चंद्रकेतु सिंह, गोरखपुर।
चंद्रकेतु सिंह, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Fri, 25 Sep 2020 10:47 AM IST
सार

  • बांसगांव के शिवशक्ति स्वयं सहायता समूह ने आपदा को अवसर में बदला
  • बैग की सिलाई से शुरू हुआ सफर मास्क, पीपीई किट व स्कूल ड्रेस बनाने तक पहुंचा

 

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Special story of Sangita Mishra who gives lot of Women employment
काम करतीं शिवशक्ति स्वयं सहायता समूह की महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

गोरखपुर जिले के बांसगांव इलाके के जिगिना भियांव गांव की संगीता मिश्रा एक मिसाल हैं। कोरोना काल में जब लोगों की नौकरी-व्यापार सब ठप होने से आजीविका का संकट था, ऐसे समय में शिवशक्ति स्वयं सहायता समूह चलाने वाली संगीता ने न केवल खुद को संभाला, बल्कि दूसरों को भी रोजगार के अवसर मुहैया कराए।
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साधारण सी दिखने वाली महिला संगीता जब पांच साल पहले अपनी जिंदगी में झांकती हैं तो गंभीर हो जाती हैं। मुफलिसी में जिंदगी का हर लम्हा कठिन हो गया था। पति, बैग की सिलाई करते थे, मगर उससे होने वाली आय से परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा था। तब संगीता ने भी ठान लिया कि घर के चौके-बर्तन से समय निकालकर पति का हाथ बटाएंगीं। चार हाथ हुए तो आमदनी भी बढ़ी।
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दोनों ने मिलकर कुचैटा बाजार में छोटी सी दुकान भी खोल ली। धीरे-धीरे जब बैग की मांग बढ़ी तो संगीता ने 2015 में राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत शिवशक्ति स्वयं सहायता समूह का गठन कर डाला। समूह से 15 महिलाएं जुड़ीं। तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी शकील अहमद ने समूह के गठन में मदद की।
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हाथ बढ़े तो मांग के अनुरूप आपूर्ति भी बढ़ी। हर महिला सदस्य रोजाना 300 से आठ सौ रुपये कमाने लगी। समूह को 2017 में गोरखपुर महोत्सव में स्टॉल लगाने का मौका मिला तो एक सप्ताह में ही 30 हजार रुपये से अधिक की आय हुई। इससे सदस्यों का हौसला तो बढ़ा ही, बड़े फलक की अहमियत भी समझ में आई।   

 

दफ्तरों से लेकर बाजार तक पहुंचे समूह के मास्क और पीपीई किट

कोरोना संक्रमण काल में जब बड़ी-बड़ी कंपनियों के कर्मचारी काम बंद होने से घर लौट रहे थे तो शिवशक्ति स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने रोजगार के अवसर खोज डाले।

कमिश्नर, डीएम, सीडीओ और एनआरएलएम के अफसरों के सहयोग व प्रोत्साहन से महिलाओं ने 25,000 मास्क और सात हजार पीपीई किट भी तैयार किया। इससे करीब पांच लाख रुपये की आय हुई। समूह के बनाए मास्क और पीपीई किट की आपूर्ति सरकारी दफ्तरों, अस्पतालों से लेकर बाजार तक हुई।

14 हजार स्कूल ड्रेस सिलने का मिला है आर्डर
मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना के तहत यह समूह परिषदीय विद्यालयों के बच्चों के लिए स्कूल ड्रेस बना रहा है। 14 हजार स्कूल ड्रेस सिलने का आर्डर मिला है। विभाग की तरफ से कपड़ा मुहैया कराया गया है। एक ड्रेस सिलने के एवज में 110 रुपये मिल रहे हैं। समूह अब तक चार हजार ड्रेस सिल चुका है।

ड्रेस सिलने के काम से 15 दिन में समूह की संगीता मिश्रा, शशिकला और इंद्रावती को दस-दस हजार रुपये, साधना को आठ हजार रुपये, स्नेहलता को पांच हजार, खुशबू को छह हजार, मीरा व किरन को 3500, सुनीता को आठ हजार, आरती को चार हजार और सीता को तीन हजार रुपये की आय हो चुकी है।

इस तरह समूह की अध्यक्ष संगीता अपने परिवार के साथ साथ समूह की अन्य महिलाओं को भी आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में अपना महत्वपूर्ण सहयोग कर रही हैं।

बांसगांव क्षेत्र की जिगिना भियांव गांव की रहने वाली शिव शक्ति स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष संगीता मिश्रा ने कहा कि स्वयं सहायता समूह के गठन के बाद महिलाएं आत्मनिर्भर हुईं हैं। समूह की सदस्य अपने पति, पिता और भाई का भी हाथ बंटाने के साथ परिवार के जीविकोपार्जन में सहयोग दे रही हैं। समूह के आगे बढ़ने में एनआरएलएम के डीसी अवधेश, डीएमएम सचिन और पूर्वांचल ग्रामीण बैंक का विशेष सहयोग रहा है। महिलाओं को सशक्त बनाने की मुहिम अनवरत जारी रहेगी।

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