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कोरोना काल में रोल मॉडल बन गईं 'गुजराती', आपदा को अवसर में बदला

Thu, 03 Sep 2020 04:24 PM IST
vivek shukla संतोष श्रीवास्तव, सिद्धार्थनगर।
संतोष श्रीवास्तव, सिद्धार्थनगर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 03 Sep 2020 04:24 PM IST
सार

  • उसका ब्लॉक के फुलवरिया की गुजराती समाज के लिए बनी रोड मॉडल
  • कोरोना काल में अगेती सब्जी की खेती से परिवार का आर्थिक संकट दूर

 

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special story of Gujarati devi for agriculture news
गुजराती देवी। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

कोरोना संक्रमण काल में गुजराती देवी ने स्वयं के मेहनत से चुनौती को अवसर में बदलने का कार्य किया। प्रतिकूल परिस्थितियों (कोविड-19) में भी बेहतर जीवन यापन करने की राह को आसान कर दिखाया। वह समाज के लिए रोल मॉडल बन गई हैं।

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उसका विकास खंड के फुलवरिया ग्राम पंचायत अंतर्गत बनगांव ग्राम की 39 वर्षीय गुजराती देवी के पति त्रियुगी गांव में ही दिहाड़ी मजदूर हैं। खेती योग्य 0.5 एकड़ जमीन है। महामारी के कारण पति की दिहाड़ी बंद होने और बाहर से बेटे के घर लौटने से गुजराती के घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया था।
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इसी बीच गौतम बुद्ध जागृति संस्था की ओर से चलाई जा रही सुपोषण परियोजना के माध्यम से गुजराती देवी को कृषक प्रशिक्षण में प्रतिभाग करने का अवसर मिला। प्रशिक्षण अगेती सब्जी की खेती कैसे करें, विषय पर आधारित था। अगेती सब्जियों जैसे मिर्ची, लौकी, नेनुआ और तोरई इत्यादि के बीज निशुल्क उपलब्ध कराया।

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खेती से अच्छी हुई कमाई

मचान विधि से सब्जी की खेती करने की तकनीकी पर ट्रेनिंग भी कराई। इसके बाद गुजराती ने एक ही खेत में मचान पर लौकी, नेनुआ और तरोई, मचान के नीचे मिर्ची की खेती की शुरूआत की। गुजरती के मुताबिक सब्जियों की खेती करने में कुल लागत 7200 रुपये आया था, जबकि शुद्ध आय 28,490 रुपये मिले हैं।

गुजराती ने बताया कि संस्था की ओर से बकरी पालन भी कर रही हूं। इससे 17,000 रुपये कमा चुकी हूं। संस्था के सचिव श्रीधर पांडेय ने बताया वंचित समुदाय के पास कोरोना महामारी के कारण रोजगार छीन जाने के कारण नकद पैसे भी नहीं है। गुजराती देवी की तरह 475 कृषक महिलाओं के साथ मचान विधि की ओर से सब्जी की खेती, मुर्गी पालन, बकरी पालन के माध्यम से कोविड-19 के कारण उत्पन्न आर्थिक संकट से निपटते हुए आत्मनिर्भर हो रहे हैं।
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