यहां भगवान शिव इस वेश में हुए थे प्रकट, ऐसे पूरी कर दी थी इस शख्स की मुराद
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उत्तर प्रदेश के सिसवा-घुघली मार्ग पर घिवहां उर्फ हरपुर पकड़ी गांव में बउरहवा बाबा मंदिर श्रद्धालुओं के आस्था का केंद्र है। इस प्राचीन शिवलिंग के बारे में मान्यता है कि भगवान शिव इसी स्थान पर बउरहवा रूप धारण किए थे। यहीं शिवलिंग का प्रादुर्भाव हुआ है।
चार खंडों में स्थापित इस मंदिर में धरती से प्रकट बउरहवा बाबा शिवलिंग, दूसरे खण्ड पर विष्णु-लक्ष्मी, तीसरे खण्ड पर मां जगदम्बा तथा 70 फुट उंची आकाशीय खंड पर महादेव शिव की प्रतिमा मंदिर के अंदर हैं। जहां महाशिवरात्रि पर दर्शन के लिए भीड उमड़ती है।
जनश्रुतियों के अनुसार वर्षों पूर्व एक निःसंतान घी के व्यापारी घृतवाह को संतान के पूर्ति के लिए बउरहवा बाबा का स्वप्न में दर्शन हुआ। इस पर घृतवाह ने घिवहां में जमीन से निकले शिवलिंग की खोजकर कई दिनों तक भगवान शिव का पूजा-अर्चना किया। इसके उपरान्त घृतवाह को भगवान शिव का दर्शन हुआ।
साथ ही भगवान शिव ने उसे पुत्रवान बनने का आर्शीवाद दिया। शिव की कृपा से व्यापारी को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। दूसरी जनश्रुति के अनुसार भगवान शिव और माता पार्वती काशीनगरी से हिमालय की ओर जा रहे थे।
साधू वेष धारी महात्मा प्रकट हुए थे
रास्ते में इसी स्थान पर माता उमा के आग्रह पर भगवान शिव ने बउरहवा रूप धारण किया था। तभी से इस स्थान का नाम बउरहवा बाबा पड़ गया। यह आज भी सिद्ध स्थान के रूप में जाना जाता है। ऐसी मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन से बउरहवा बाबा को बेलपत्र चढ़ाकर 108 बार जलाभिषेक करता है, बउरहवा बाबा उसकी मनोकामना जरूर पूरी करते हैं।
मंदिर के पुजाारी लाल बहादुर ने बताया कि बउरहवा बाबा मंदिर से कई प्रसंग जुडे हैं। गुजरे जमाने में एक निषाद का पुत्र मंदिर के पास सर्प के बिल में लकड़ी कुरेदने लगा। तभी उस बिल से निकले सर्प ने उसे डंस लिया। उसके बाद मृत बालक का पिता बउरहवा बाबा के शिवलिंग पर अपना माथा पटक कर विलाप करने लगा।
कुछ देर बाद एक साधू वेष धारी महात्मा प्रकट हुए। उन्होंने उसके पुत्र को जीवित करते हुए उपदेश दिया कि किसी को अकारण नहीं छेड़ना चाहिए। महात्मा ने कहा कि यहां किसी को आज के बाद सांप नहीं काटेंगे। तब से आज तक यहां किसी व्यक्ति को सर्पों ने नहीं डंसा।