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एक रेल यात्रा ऐसी जिसमें ट्रेन से उतरकर स्टीमर की करनी पड़ती थी सवारी, पढ़िए ये रोचक कहानी

Tue, 26 May 2020 04:05 PM IST
vivek shukla राजन राय गोरखपुर।
राजन राय गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Tue, 26 May 2020 04:05 PM IST
सार

  • पहलेजा घाट से महेंद्रू घाट तक स्टीमर से सवारी कर दूसरी ट्रेन से पूरी होती थी कोलकाता की यात्रा
  • ट्रेन में जिस क्लास की टिकट उसी क्लास में स्टीमर में भी कराई जाती थी यात्रा

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special journey Kolkata from Pahleza Ghat to Mahendra Ghat by train
NER - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

तकरीबन 35 से 40 साल पहले एक ऐसी रेल लाइन थी, जिस पर ट्रेन से सफर में यात्रियों को एक ऐसी अद्भुत रोमांच का अवसर मिलता था जो अब यादों में ही तरोताजा है। यात्री ट्रेन से उतरकर गंगा नदी को स्टीमर में बैठकर पार करते थे और फिर ट्रेन में बैठते थे।

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यह यात्रा एक किलोमीटर की होती थी। खास बात यह है कि यात्रियों को स्टीमर में भी उसी क्लास में बैठाया जाता था, जिस क्लास में उनका ट्रेन में आरक्षण होता था।
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पूर्वोत्तर रेलवे में गोरखपुर से कोलकाता और पटना जाने के लिए यात्रियों को हाजीपुर स्टेशन के पास गंगा नदी के पहलेजा घाट के पहले ट्रेन से उतार दिया जाता था। उसके बाद स्टीमर (फेरी) में बैठाया जाता था।

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धरोहर है फेरी से ट्रेन के यात्रियों को ले जाना

स्टीमर नदी पार कर महेंद्रू घाट तक जाती थी, जहां से यात्रियों को आगे जाने वाली दूसरी ट्रेन में बैठाया जाता था। यात्रियों को ट्रेन से उतारने, फेरी में बैठाने और फिर फेरी से उतार ट्रेन में बैठाने के लिए बकायदा रेल स्टाफ तैनात रहते थे।

पूर्वोत्तर रेलवे के महाप्रबंधक कार्यालय में जब पुरानी तस्वीरों का डिजिटलाइजेशन कराया जा रहा था। उस वक्त फेरी (स्टीमर) की तस्वीर सामने आई।

एनईआर सीपीआरओ पंकज कुमार सिंह ने कहा कि अत्यधिक प्रवाह के कारण गंगा नदी पर पुल नहीं बन पाते थे। ऐसे में पलहेजा से महेंद्रू घाट तक एक तरफ ट्रेन से उतार कर फेरी में बैठाकर दूसरी ओर ले जाया जाता था। जिसके बाद दूसरी ट्रेन में बैठाकर यात्रा पूरी कराई जाती थी।

डिजिटलाइजेश के दौरान स्टीमर की तस्वीर सामने आई है। यह काफी रोमांचित करने वाली तस्वीर है। धरोहर के रूप में इसे महाप्रबंधक कार्यालय में संरक्षित किया गया है।
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