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एमएमएमयूटी: स्क्रैप से बनी वाटिका में मसाले वाले पौधों व शुगर पत्ती की महक, ऐसे बढ़ रही वाटिका की खूबसूरती
Thu, 06 Jan 2022 03:05 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Thu, 06 Jan 2022 03:05 PM IST
सार
एमएमएमयूटी के कुलपति प्रो. जेपी पांडेय ने बताया कि वाटिका में कुल 100 पौधे लगाने की योजना है। ज्यादातर औषधियों के पौधे लगाए गए हैं।
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एमएमएमयूटी: वाटिका में पौधों को देखते कुलपति प्रो. जेपी पांडेय।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
मदन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) में स्क्रैप की ईंट का प्रयोग कर वाटिका बना दी गई है। इस वाटिका में मसाले वाले पौधों तो हैं ही, भूख न लगने के लिए गुरूमार जैसी औषधि भी है। वहीं चीनी जैसा स्वाद देने वाली शुगर पत्ती की महक भी है। दूधिया रोशनी से शाम को वाटिका की खूबसूरती और बढ़ जा रही है।
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दअरसल, जिस जगह वाटिका बनाई गई है, पहले यहां झाड़ियां थीं। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जेपी पांडेय ने इस जगह का उपयोग करने के लिए वाटिका बनाने का निर्णय लिया। वाटिका की बाउंड्री बनाने के लिए खेल के मैदान में पड़ी साढ़े चार लाख स्क्रैप की ईंटों का इस्तेमाल किया गया। बीते दिनों दीक्षांत समारोह में आईं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने रुद्राक्ष का पौधा लगाकर इस वाटिका का शुभारंभ किया था। वाटिका में कुल 24 औषधियों के पौधे लगाए गए हैं। इसका दायरा और बढ़ाने की तैयारी है।
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एमएमएमयूटी के कुलपति प्रो. जेपी पांडेय ने बताया कि वाटिका में कुल 100 पौधे लगाने की योजना है। ज्यादातर औषधियों के पौधे लगाए गए हैं। हर पौधे के पास उसकी खासियत से संबंधित संदेश भी फ्लैग पर लिखे गए हैं। वाटिका में सिर्फ लोहे की ग्रिल, लाइट और मजदूरी पर ही खर्च किया गया है।
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ये पौधे लगाए गए हैं
अश्वगंधा, कालमेघ, स्टेविया, गूरूमार, नीबू घास, सर्पगंधा, पत्थरचटा, काली मिर्च, अजवायन, इलायची, तेजपत्ता आदि।