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इस मंदिर के सामने अंग्रेजों को भी पड़ा था झुकना, चाहकर भी नहीं कर पाए थे ये काम

Sun, 31 May 2020 12:53 PM IST
vivek shukla विष्णुदत्त पांडेय, बरियारपुर (देवरिया)।
विष्णुदत्त पांडेय, बरियारपुर (देवरिया)। Published by: vivek shukla Updated Sun, 31 May 2020 12:53 PM IST
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Siddha Peetha Durga Temple special story in Deoria
Deoria news - फोटो : अमर उजाला।

देवरिया के अहिल्यापुर गांव स्थित सिद्धपीठ दुर्गा मंदिर के आगे अंग्रेजी हुकूमत ने भी घुटने टेक दिए थे। तकरीबन आधी दुनिया जिस ब्रिटिश हुकूमत के आगे नतमस्तक थी, उस अंग्रेजी शासन को भी आदि शक्ति मां दुर्गा के समक्ष शीश झुकना पड़ा था। जी हां, अहिल्यापुर में स्थित मंदिर में विराजमान माता दुर्गा जी की स्वयंभू पिंड के बारे में बुजुर्गो से यही सुनने को मिलता है।

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इस मंदिर को लेकर आसपास के गांव के लोग कई तरह के वृतांत बताते हैं। स्थानीय लोगों की मानें तो सदियों पुराने इस मंदिर से जुड़ा इतिहास भी कम दिलचस्प नहीं है। ग्रामीणों की मानें तो देवी की शक्ति के आगे फिरंगी हुकूमत को भी घुटने टेकने पड़े थे।
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अहिल्यापुर स्थित मंदिर से थोड़े दूर से एक रेलवे लाइन गुजरती है। अंग्रेजों के जमाने में इस रेलवे लाइन को मंदिर से होकर गुजरना था लेकिन मां की शक्ति के आगे अंग्रेज अधिकारियों की एक ना चली। गोरखपुर से बनारस और बिहार की ओर जाने वाले रेलवे ट्रैक पर देवरिया के बाद अहिल्यापुर रेलवे स्टेशन पड़ता है।

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मां ने ऐसे दिखाया था चमत्कार

यहां लगभग 113 साल पहले जब अंग्रेजों द्वारा इस रूट पर मीटर गेज लाइन का निर्माण चल रहा था। उस समय अंग्रेज अधिकारियों ने फैसला ले लिया कि रेलवे लाइन इस मंदिर से होकर गुजरेगी। स्थानीय लोगों ने अंग्रेज अधिकारियों से रेलवे ट्रैक को मंदिर से थोड़ी दूर से ले जाने का आग्रह किया लेकिन उन्होंने बात नहीं मानी।

अंग्रेज अधिकारियों ने रेलवे लाइन वहीं से गुजारने का फरमान भी जारी कर दिया। अंग्रेज अफसरों के होश उस वक्त उड़ गए जब शाम को बिछाई गईं पटरियां सुबह अपने क्षतिग्रस्त मिलीं। पहले तो उन्हें इसके पीछे ग्रामीण का हाथ लगा लेकिन उन्होंने कई प्रयास किए और हर बार यहीं परिणाम सामने आया।

एक दिन रेलवे के तत्कालीन इंजीनयर को स्वप्न में माता के दर्शन हुए, उन्होंने उससे आदेश देते हुए कहा कि रेल की पटरियों को कही अन्य जगह बिछाओ अन्यथा गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे। अंत में मां भवानी के आगे अंग्रेज अफसरों ने भी घुटने टेक दिए और रेल की पटरी को 100 मीटर दक्षिण स्थापित करने का निर्णय लिया।

यह मंदिर सिद्धपीठ देवरिया जनपद मुख्यालय से 8 किमी. की दूरी पर उत्तर ग्रामसभा अहिल्वार बुजुर्ग से सटे स्थित रेलवे लाइन के उत्तर तरफ मौजूद है। वैसे तो वर्ष भर यहां श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है किन्तु चैत्र एवं शारदीय नवरात्रि के दौरान लाखों की संख्या में भक्तजन यहां अपनी मनोकामनां लेकर पहुंचते हैं।

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