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स्वास्थ्य मंत्री से हुई थी शिकायत: SGPGI और KGMU के डॉक्टर करेंगे गर्भवती की मौत की जांच

Thu, 18 Aug 2022 02:05 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 18 Aug 2022 02:05 PM IST
सार

एमएलसी के पत्र के बाद ने बुधवार को इस मामले में तीन सदस्यीय जांच कमेटी बनाई है। कमेटी में अध्यक्ष के रूप में चिकित्सा-शिक्षा महानिदेशालय के वरिष्ठ अधिकारी डॉ एनसी प्रजापति को शामिल किया गया है। इनके अलावा जांच टीम में एसजीपीजीआई के इमरजेंसी मेडिसिन विभाग के डॉ. आरके सिंह और केजीएमयू के स्त्री व प्रसूति रोग विभाग की प्रोफेसर डॉ अमिता पांडेय को सदस्य बनाया गया है।
 

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SGPGI and KGMU doctors will investigate pregnant death
गर्भवती महिला की मौत के बाद परिजनों ने हंगामा किया था। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 22 जुलाई को गर्भवती की मौत के मामले की जांच एसजीपीजीआई और केजीएमयू के डॉक्टर करेंगे। शिक्षक विधायक ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने मामले की शिकायत उपमुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक से की थी। शिकायत पर महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण श्रुति सिंह ने जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाई है। कमेटी को 31 अगस्त तक महानिदेशक को रिपोर्ट सौंपेगी।  

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जानकारी के मुताबिक, सिद्धार्थनगर के बेलहरा गांव निवासी संदीप त्रिपाठी अपनी पत्नी चंदा को लेकर 22 जुलाई की सुबह सात बजे गंभीर हाल में बीआरडी मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड में पहुंचे थे। मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने सुपर स्पेशियलिटी में जाने की सलाह दी थी, जहां पर उन्होंने सुपर स्पेशियलिटी में ओपीडी का पर्चा कटवाया और हृदय रोग विभाग में दिखाया।
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हृदय रोग विभाग की टीम ने देखने के बाद मरीज को मेडिसिन में इलाज कराने की सलाह दी। इस पर परिजन दोबारा पर्चा कटवाने के लिए लाइन में लग गए। इस बीच पुराने ओपीडी के पास चंदा दर्द से तड़पती रहीं, लेकिन डॉक्टरों ने भर्ती करना जरूरी नहीं समझा। संदीप का आरोप है कि करीब दो से ढाई घंटे तक पर्चा कटवाने के लिए लाइन में लगा रहा।
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इसके बाद फिर से मेडिसिन ओपीडी से मेडिसिन इमरजेंसी और स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग भेज दिया गया। इस बीच मेडिसिन इमरजेंसी में पहुंचने पर फिर से कागजात बनवाने के लिए कहा गया। पर्ची बनवाकर जब तक लौटता, तब तक पत्नी की मौत चुकी थी।

शिक्षक विधायक के बड़े भाई की पुत्रवधू थीं चंदा  
मृतक चंदा शिक्षक विधायक ध्रुव कुमार त्रिपाठी के सगे बड़े भाई की पुत्रवधू थीं। घटना के दिन एमएलसी ने भी कार्यवाहक प्राचार्य और एसआईसी को मदद के लिए फोन किया था। ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने बताया कि बीआरडी के अधिकारियों ने फोन ही नहीं उठाया। जबकि, सुबह 7:28 बजे से ही अधिकारियों को लगातार फोन कर रहा था। विधायक ने अपने शिकायती पत्र में डॉक्टर की लापरवाही का जिक्र करते हुए बताया है कि फोन का न उठाया जाना एक विधायक के विशेषाधिकार का हनन है। साथ ही पीड़िता का उपचार न होना अपराध की श्रेणी में आता है।

मरीज का पर्चा गायब करने का भी आरोप
शिक्षक विधायक ने मरीज का पर्चा गायब करने का आरोप लगाया है। उन्होंने शिकायत पत्र में जिक्र किया है कि तत्काल पर्चा दिखाकर चार मिनट का समय दिखाना निश्चित रूप से उच्च स्तरीय जांच का विषय है। क्योंकि, जो पर्चा अस्पताल के स्टाफ ने बनाया है, उसमें दर्ज दवाओं के आधार पर तैयार किए गए विवरण को देखकर यही प्रतीत होता है कि कम से कम एक घंटे का समय इसे तैयार करने में लिया गया होगा। उस पर मरीज को केवल चार मिनट अस्पताल में उपस्थिति दिखाया गया है। बार-बार मिन्नत करने पर एक डॉक्टर ने सगे भाई का कालर पकड़कर धक्का भी दे दिया। विधायक ने कार्यवाहक प्राचार्य और एसआईसी को भी इसके लिए जिम्मेदार बताया है।   

 

शासन ने गठित की तीन सदस्यीय कमेटी
एमएलसी के पत्र के बाद ने बुधवार को इस मामले में तीन सदस्यीय जांच कमेटी बनाई है। कमेटी में अध्यक्ष के रूप में चिकित्सा-शिक्षा महानिदेशालय के वरिष्ठ अधिकारी डॉ एनसी प्रजापति को शामिल किया गया है। इनके अलावा जांच टीम में एसजीपीजीआई के इमरजेंसी मेडिसिन विभाग के डॉ. आरके सिंह और केजीएमयू के स्त्री व प्रसूति रोग विभाग की प्रोफेसर डॉ अमिता पांडेय को सदस्य बनाया गया है।
 
मृतका मेरे सगे भाई की पुत्रवधू थीं। बीआरडी के डॉक्टरों की लापरवाही से पुत्रवधू की मौत हुई है। जबकि, पुत्रवधू के गर्भ में जुड़वा बच्चे थे। डॉक्टरों की लापरवाही से तीन जिंदगियां अब इस दुनिया में नहीं हैं। जबकि, इलाज को लेकर 22 जुलाई को प्राचार्य और एसआईसी को कई बार फोन किया, लेकिन उन्होंने फोन तक नहीं रिसीव किया। यह विधायक के विशेषाधिकार का भी हनन है। मामले में कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। - ध्रुव कुमार त्रिपाठी, एमएलसी

गर्भवती की मौत बेहद दुखद थी। इसमें लापरवाही की बात सामने आई है। शासन की ओर से गठित कमेटी की जानकारी अब तक नहीं मिली है। कमेटी आएगी तो उसे पूरी जानकारी देते हुए पूरा सहयोग किया जाएगा। - डॉ. गणेश कुमार, प्राचार्य।

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