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Gorakhpur News: आईसीएचआर के शोध अनुदान के लिए डीडीयूजीयू के सात शोधार्थियों का चयन
Sat, 11 Jul 2026 02:16 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Sat, 11 Jul 2026 02:16 AM IST
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गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के शोधार्थियों ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी शोध क्षमता का लोहा मनवाया है। भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद (आईसीएचआर) के शोध अनुदान के लिए डीडीयू के सात शोधार्थियों का चयन हुआ है।
इस वर्ष मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग के पांच शोधार्थियों क्रमश: शुभांगी मिश्रा, पूजा श्रीवास्तव, सत्या निषाद, कुमारी संजू और अनन्या त्रिपाठी का चयन हुआ है। वहीं, प्राचीन इतिहास विभाग की मनीषा कुमारी और रोशनी वर्मा ने भी सफलता हासिल की है। पिछले वर्ष भी मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग के पांच शोधार्थियों ने आईसीएचआर की ओर से अनुदान प्राप्त किया था।
मध्यकालीन इतिहास विभाग के अध्यक्ष प्रो. मनोज कुमार तिवारी व प्राचीन इतिहास विभाग की अध्यक्ष प्रो. प्रज्ञा चतुर्वेदी ने सभी सफल शोधार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि विभाग में गुणवत्तापूर्ण शोध, शिक्षकों के मार्गदर्शन और शोधार्थियों की मेहनत का परिणाम है।
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विश्वविद्यालय में शोध और नवाचार को बढ़ावा देना सर्वोच्च प्राथमिकता है। शिक्षण और शोध की गुणवत्ता को लगातार मजबूत करने के प्रयास किए जा रहे हैं। शोधार्थियों की यह सफलता विश्वविद्यालय की अकादमिक उत्कृष्टता का प्रमाण है और आने वाले समय में अन्य विद्यार्थियों को भी बेहतर शोध के लिए प्रेरित करेगी।
- प्रो. पूनम टंडन, कुलपति, डीडीयूजीयू
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इस वर्ष मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग के पांच शोधार्थियों क्रमश: शुभांगी मिश्रा, पूजा श्रीवास्तव, सत्या निषाद, कुमारी संजू और अनन्या त्रिपाठी का चयन हुआ है। वहीं, प्राचीन इतिहास विभाग की मनीषा कुमारी और रोशनी वर्मा ने भी सफलता हासिल की है। पिछले वर्ष भी मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग के पांच शोधार्थियों ने आईसीएचआर की ओर से अनुदान प्राप्त किया था।
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मध्यकालीन इतिहास विभाग के अध्यक्ष प्रो. मनोज कुमार तिवारी व प्राचीन इतिहास विभाग की अध्यक्ष प्रो. प्रज्ञा चतुर्वेदी ने सभी सफल शोधार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि विभाग में गुणवत्तापूर्ण शोध, शिक्षकों के मार्गदर्शन और शोधार्थियों की मेहनत का परिणाम है।
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विश्वविद्यालय में शोध और नवाचार को बढ़ावा देना सर्वोच्च प्राथमिकता है। शिक्षण और शोध की गुणवत्ता को लगातार मजबूत करने के प्रयास किए जा रहे हैं। शोधार्थियों की यह सफलता विश्वविद्यालय की अकादमिक उत्कृष्टता का प्रमाण है और आने वाले समय में अन्य विद्यार्थियों को भी बेहतर शोध के लिए प्रेरित करेगी।
- प्रो. पूनम टंडन, कुलपति, डीडीयूजीयू