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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   Sawan Somwar 2021 Childless will get child happiness on second Monday of Savan

Sawan Somwar 2021: निसंतानों को संतान सुख दिलाएगा श्रावण का दूसरा सोमवार, ग्रह और नक्षत्रों का बन रहा है सुखद संयोग

Mon, 02 Aug 2021 09:29 AM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 02 Aug 2021 09:29 AM IST
सार

श्रावण मास का दूसरा सोमवार कल, शिवालयों में उमड़ेंगे श्रद्धालु। भक्तों के लिए शिवालय सजकर तैयार।

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Sawan Somwar 2021 Childless will get child happiness on second Monday of Savan
सावन का दूसरा सोमवार 2021। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भगवान शिव को अति प्रिय श्रावण मास का दूसरा सोमवार दो अगस्त यानी आज है। श्रद्धालु आज शिवालयों में पहुंचकर  भगवान शिव का जलाभिषेक और पूजन-अर्चन कर उन्हें प्रसन्न कर रहे हैं। भक्तों की भीड़ को लेकर मंदिर प्रबंधन ने रविवार को ही तैयारियां कर ली थी। वाराणसी से प्रकाशित हृषिकेश पंचांग के अनुसार, इस दिन ग्रह और नक्षत्रों का सुखद संयोग बन रहा है। इस दिन कृत्तिका के बाद रोहिणी नक्षत्र, वृद्धि योग, गर करण और सुस्थिर नामक औदायिक योग है। चंद्रमा उच्चाभिलाषी हैं। इस दिन के व्रत से स्थिर लक्ष्मी के साथ ही निसंतानों को संतान की प्राप्ति होगी।
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श्रावण मास में रूद्राभिषेक से लाभ
ज्योतिषाचार्य पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार, रूद्राभिषेक का मानव जीवन में अत्यन्त महत्वपूर्ण स्थान है। रूद्राभिषेक से मन शुद्ध और सत्वगुणी होता है। इससे संकल्प शक्ति में वृद्धि होती है। इसके साथ ही ज्ञानशक्ति, विचारशक्ति, श्रद्धा, भक्ति और पवित्रता मे भी वृद्धि होती है। धन लाभ और आरोग्यता प्राप्त होती है। बताया कि धर्मशास्त्र में कहा गया है कि वेद शिव है और शिव वेद है। इसलिए वेद मंत्रों द्वारा भगवान आशुतोष का पूजन अभिषेक किया जाता है। जैसे ब्रह्म सभी पदार्थों मे व्याप्त है। वैसे ही भगवान रूद्र (शिव) अग्नि, जल, औषधि, वनस्पति आदि सभी पदार्थो मे समाहित हैं। समस्त ब्रह्मांड को वह अपनी शक्ति से सामर्थ्यवान बनाते हैं। इसलिए उनका नाम रूद्र पड़ा है। श्वेताश्वरोपनिषद् मे कहा गया है कि ‘एको हि रूद्रो न द्वितीयाथ तस्थुः’ अर्थात ब्रह्मांड में केवल एक रूद्र की ही सत्ता है, किसी दूसरे की नहीं।
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पदार्थों से रूद्राभिषेक और उससे मिलने वाला फल
जल से वर्षा, कुशा के जल से शांति, दधि से पशु प्राप्ति, मधु और घी से धन, तीर्थजल से मोक्ष, दुग्ध से शीघ्र संतान प्राप्ति, प्रमेह रोग की शंति और मनोवांछित फलों की प्राप्ति, शर्करा मिले दूध से रूद्राभिषेक करने से जड़ बुद्धि निर्मल होता है। सरसो के तेल से करने पर विरोधियों का प्रभाव न्यून होता है। जिस ग्रह की जो समिधा है उसको मिलाकर कर अभिषेक करने से उस ग्रह का प्रकोप समाप्त होता है। रूद्रभिषेक से संक्रामक रोगों का नाश, शारीरिक समस्त दोषों का नाश, सर्वविध अमंगलों का नाश, पैशाचिक कष्टों से निवृति और सभी प्रकार की विघ्न बाधाएं दूर हो जाती है। रूद्राभिषेक से शत्रु भी मित्र हो जाते हैं। असाध्य कार्य भी साध्य हो जाता है और सर्वत्र विजय प्राप्त होती है। इससे अतिवृष्टि, अनावृष्टि, अकाल मृत्यु रोगादि का भी शमन हो जाता है।
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