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गोरखपुर खून माफिया: बीआरडी स्टाफ की मिलीभगत से गैंग चला रहा था निगम कर्मी, गिरफ्तार; ऐसे करता था खेल

Tue, 29 Aug 2023 10:54 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Tue, 29 Aug 2023 10:54 AM IST
सार

एसपी ने बताया कि इनका एक गैंग है, जो पिछले छह महीने से मेडिकल काॅलेज के पास सक्रिय है। सरगना वसील खान पहले नगर निगम का सफाई कर्मी था। वर्तमान में वह खून की दलाली कर रहा है। जबकि केशर देव खुद मजदूरी करता है और साथी मजदूरों को फंसाता है।

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Gorakhpur Blood Mafia Corporation worker running gang in connivance with BRD staff
खून बेचने के आरोप में पकड़े गए बदमाशों के बारे में जानकारी देते हुए एसपी नार्थ मनोज अवस्थी व अन्य - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

गोरखपुर नगर निगम के सफाई कर्मचारी से खून माफिया बने वसील खान को पुलिस ने साथी समेत जेल भिजवा दिया है। पुलिस की अभी तक की जांच में पता चला है कि वसील खान मजदूरों को निशाना बनाता था। जरूरतमंद तक उसे पहुंचाने में मेडिकल कॉलेज के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी मदद करते थे। आरोपियों से पूछताछ के बाद ब्लड बैंक की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है। पूरे नेटवर्क को खंगालने के लिए पुलिस ने एक महीने में मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक से खून लेने वाले सभी लोगों को बयान देने के लिए बुलाया है।

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पुलिस लाइंस में सोमवार को एसपी नार्थ मनोज अवस्थी व एएसपी मानुष पारिख ने संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस कर पकड़े गए खून माफिया के बारे में जानकारी दी। एसपी ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी तिवारीपुर के बिंद टोला निवासी वसील खान और उसके साथी महराजगंज के फरेंदा निवासी केशर देव को कोर्ट में पेश कर जेल भिजवा दिया गया है। जल्द ही पूरे रैकेट का पर्दाफाश कर लिया जाएगा।
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एसपी ने बताया कि रविवार शाम को वसील खान खजांची चौराहे से मजदूर, महराजगंज के पनियरा निवासी गोरख चौहान को 6000 में एक यूनिट खून देने की बात कहकर ले गया। मेडिकल काॅलेज के ब्लड बैंक में केशर देव मिला। उसने गोरख का खून निकलवाया। बाद में यह खून पिपराइच के रुदलापुर के मरीज मोहन को 10 हजार रुपये में बेच दिया। खून देने वाले गोरख को सिर्फ 1100 रुपये देकर मारपीट कर भगा दिया। इसके बाद पुलिस ने केस दर्ज कर दोनों को गिरफ्तार कर लिया है।

एसपी ने बताया कि इनका एक गैंग है, जो पिछले छह महीने से मेडिकल काॅलेज के पास सक्रिय है। सरगना वसील खान पहले नगर निगम का सफाई कर्मी था। वर्तमान में वह खून की दलाली कर रहा है। जबकि केशर देव खुद मजदूरी करता है और साथी मजदूरों को फंसाता है।

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ऐसे काम करता है गिरोह

गिरोह का सरगना वसील खान अपने साथी एजेंट केशर देव की मदद से खजांची व अन्य जगहों पर काम की तलाश में आने वाले मजदूरों को निशाना बनाते थे। जिन मजदूरों को कई दिनों से काम नहीं मिलता था, उसे ही टारगेट करते थे और फिर रुपयों का लालच देकर खून देने के लिए राजी करा लेते थे। खून को बेचने में इनकी मदद बीआरडी मेडिकल कॉलेज के कुछ सफाई कर्मचारी करते थे।

सफाई के दौरान ये कर्मचारी उन मरीजों के तीमारदारों की जानकारी जुटाते थे, जो खून के लिए परेशान हों। फिर उन्हें वसील खान का नंबर दे देते थे। कहते थे कि वसील आसानी से खून दिलवा देगा। परेशान तीमारदार, वसील के नंबर पर संपर्क करते थे, इसके बाद मजदूर को लाया जाता था।

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उससे खून लेकर उसके बदले जिस ग्रुप के खून की जरूरत होती थी, उसे दिला देते थे। मजदूर को तय करने के लिए छह हजार प्रति यूनिट खून डोनेट करने का प्रलोभन दिया जाता था। जरूरतमंद से जितने पर सौदा तय हो जाए, उसी हिसाब से चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को भी कमीशन दिया जाता था। कई जरूरतमंदों से इन लोगों ने 25 हजार रुपये तक वसूले थे।

नेटवर्क में कौन-कौन शामिल, जांच में जुटी पुलिस

खून माफिया के इस नेटवर्क में कौन- कौन शामिल है, पुलिस जांच में जुट गई है। पुलिस के मुताबिक, मेडिकल काॅलेज के कुछ वार्ड बॉय की भूमिका भी संदिग्ध मिली है। पुलिस यह जानकारी भी जुटा रही है कि कितने लोगों को इस गिरोह ने शिकार बनाया है। पिछले एक महीने में इस माफिया से खून लेने वाले मरीजों के तीमारदारों को भी बुलाकर बयान लिया जाएगा।

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खून की हो जरूरत तो यहां पर करें संपर्क, पुलिस से भी ले सकते हैं मदद
खून की जरूरत होने और डोनर न होने की दशा में ऑनलाइन डोनर की तलाश की जा सकती है। इसके लिए जिलास्तर की वेबसाइट bbdhgorakhpur.com पर जाकर डोनर खोज सकते हैं। इसके अलावा प्रदेश स्तर पर भी एक वेबसाइट है।

इन दोनों ही वेबसाइट पर डोनर के नाम के साथ ही नंबर है, जो स्वैच्छिक रक्तदाता हैं और शहर में रहने पर खून दे सकते हैं। एसपी नार्थ मनोज अवस्थी ने बताया कि पुलिस विभाग में भी रक्तदाताओं का एक ग्रुप है। अगर किसी को खून की जरूरत है तो सिपाही राजन को 8924091231 पर काॅल करें। वे निशुल्क रक्तदान कराएंगे।
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