Gorakhpur: मुंबई के प्लंबर के नाम से नगर निगम से जारी हो रहा था वेतन, ऐसे मामला आया समाने
नगर आयुक्त अविनाश सिंह ने कहा है कि जोन के अधिष्ठान लिपिकों द्वारा सुपरवाइजर के अलावा अन्य कर्मचारी को भी मस्टर रोल दे दिया जा रहा है। इससे फर्जी तरीके से कर्मचारियों का वेतन जारी होने की आशंका बनी रहती है।
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गोरखपुर नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग में एक से बढ़कर एक चौंकाने वाले मामले सामने आ रहे हैं। ताजा मामला मुंबई में प्लंबर का काम कर रहे व्यक्ति के नाम से कई महीने से वेतन निकासी का प्रकाश में आया है। इस मामले में नगर आयुक्त अविनाश सिंह ने मेट दीपू को बर्खास्त कर दिया।
नगर निगम में कयामुद्दीन पुत्र खालिक को सफाई कर्मी बताकर कई महीने से फर्जी तरीके से वेतन निकाला जा रहा था। कयामुद्दीन की माता नरगिस बानों द्वारा लिखित पत्र देकर बताया गया कि उनका पुत्र कयामुद्दीन पिछले छह माह से मुंबई में पलंबर का कार्य कर रहा है। वह नगर निगम में कार्य नहीं कर रहा है।
इस संबंध में बैंक में जांच कराने पर पता चला कि सीएलसी पर कार्यरत मेट दीपू द्वारा कयामुद्दीन के पासबुक में अपना नंबर दर्ज कराया गया है और फर्जी तरीके से उसके द्वारा कयामुद्दीन के वेतन का भुगतान लिया जा रहा है। नगर आयुक्त ने बताया कि मेट दीपू को बर्खास्त कर वेतन की रिकवरी की जा रही है।
अब सुपरवाइजर को ही जारी होगा मस्टर रोल
फर्जी तरीके से सफाई कर्मचारी के नाम पर वेतन निकालने के मामले में नगर आयुक्त अविनाश सिंह ने व्यवस्था में सुधार को लेकर निर्देश दिया है।
नगर आयुक्त ने कहा है कि जोन के अधिष्ठान लिपिकों द्वारा सुपरवाइजर के अलावा अन्य कर्मचारी को भी मस्टर रोल दे दिया जा रहा है। इससे फर्जी तरीके से कर्मचारियों का वेतन जारी होने की आशंका बनी रहती है।
अब अधिष्ठान लिपिक केवल सुपरवाइजर को ही मास्टर रोल जारी करेगें। मेठ या किसी सफाई कर्मचारी को किसी भी हाल में मस्टर रोल नही देगें। इसके साथ ही जोन के अधिष्ठान लिपिक महीने की 20-23 तारीख तक सुपरवाईजर से पिछले माह का मस्टर रोल लेने के बाद ही अगले माह का मस्टर रोल देगें। कोई भी मस्टर रोल सीधे सीएलसी कार्यालय में वेतन भुगतान के लिए नहीं जाएगा।