Russia Ukraine War: यूक्रेन से लौटी छात्रा ने सुनाई आप बीती, बोली- बमबारी और मिसाइल के हमले के बीच खाने-पीने का संकट
यूक्रेन के खारकीव शहर में भारतीय छात्रों के सामने खड़ी हो गईं हैं मुश्किलें, एक घंटे के लिए खुलीं दुकानें, दुकानदारों ने दी स्थानीय लोगों को प्राथमिकता, घंटों लाइन में लगने के बाद भी भारतीय छात्रों को नहीं मिल पाई खाद्य सामग्री।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
यूक्रेन के खारकीव में बमबारी और मिसाइल हमले के बीच भारतीय छात्रों के सामने खाने-पीने का संकट पैदा हो गया है। सोमवार को एक घंटे के लिए बाजार खुला, लेकिन भारतीय छात्रों को घंटों लाइन में लगने के बाद भी सामान नहीं मिला। स्थानीय लोगों को सामान देकर दुकानदारों ने दुकानें बंद कर दीं। खाने-पीने का सामान नहीं मिलने के कारण छात्रों ने खारकीव छोड़ने का फैसला किया और रेलवे स्टेशन पहुंच गए। इस शहर में करीब 2,500 एमबीबीएस के विद्यार्थी बंकर में रह रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक, जिले के रामजानकी नगर निवासी अजीत सिंह के पुत्र आकाश सिंह यूक्रेन के खारकीव नेशनल मेडिकल इंस्टीट्यूट में एमबीबीएस चतुर्थ वर्ष के छात्र हैं। उन्होंने बताया कि राजधानी कीव में कर्फ्यू हटा लिया गया है। ट्रेनों का संचालन शुरू हो गया है।
दूतावास ने कहा है कि भारतीय छात्र कीव होते हुए ट्रेन से पोलैंड पहुंचे। लेकिन, खारकीव में लगातार हो रही बमबारी और मिसाइल के हमले से छात्र बंकर से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे। खाने-पीने का संकट होने और बमबारी नहीं रुकने पर छात्रों ने बाहर निकलना शुरू किया है। छात्रों ने तय किया है कि एक साथ पोलैंड या हंगरी की तरफ जाएंगे। पोलैंड और हंगरी में भारतीय विमान के आने की जानकारी दी गई है।
मनुशरण और सुशांत पहुंचे बुचारेस्ट एयरपोर्ट
शहर के बिछिया निवासी मनुशरण श्रीवास्तव और सिद्धार्थनगर के बांसी निवासी सुशांत पांडेय रोमानिया की राजधानी बुचारेस्ट एयरपोर्ट पहुंच गए हैं। दूतावास ने उनके पासपोर्ट की फोटोकॉपी ले ली है। उन्हें एयरपोर्ट के पास रखा गया है। हालांकि फ्लाइट के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है। केवल यह बताया गया है कि एक-दो दिन में फ्लाइट से दिल्ली व मुंबई भेजे जा सकते हैं।
45 में से चार छात्र पहुंचे अपने घर
यूक्रेन में गोरखपुर के 45 छात्र फंसे हैं। इनमें से छह छात्र घर लौट आए हैं। इन्हें जिला प्रशासन ने घर तक पहुंचाया। वहीं, यूक्रेन में रूसी हमले में एक छात्र की मौत के बाद अभिभावक दहशत में आ गए हैं। परिजन टीवी पर केवल रूस और यूक्रेन के बारे में खबरें सुन और देख रहे हैं।
धमाकों के बीच न नींद आती थी न खाने का मन करता था : पूजा
यूक्रेन से मंगलवार को पिपराइच अपने घर पहुंचीं पूजा गुप्ता ने बताया कि धमाकों के बीच न तो नींद आती थी न कुछ खाने का मन करता था। एक ही सवाल गूंजता रहता था कि कैसे घर पहुंचा जाए। चार दिनों तक सायरन की आवाज सुन-सुनकर मन बोझिल हो गया था। दिमाग ने काम करना बंद कर दिया था। सायरन की आवाज सुनते ही छात्र बेसमेंट की तरफ भागते थे। कानों में केवल बम और मिसाइल की आवाजें गूंजती थीं। 27 फरवरी को किसी तरह यूक्रेन की सीमा पार करके रोमानिया पहुंची। उसी दिन शाम को जहाज से 298 लोगों के साथ भारत के लिए रवाना हुई। यूपी भवन से सभी को अलग-अलग वाहनों से उनके घर भेजा गया। घरवालों और लोगों का आशीर्वाद और दुआ था कि सकुशल लौट आई।
इमरजेंसी अलार्म बजते ही रूह कांप जाती थी : शिवांजलि
शाहपुर की शिवांजलि परिवार के बीच पहुंचीं तो खुशी के आंसू निकल आए। बताया कि अगर सरकार ने मदद नहीं की होती तो घर नहीं आ पाती। यूक्रेन में हर तरफ बमबारी और मिसाइलों की आवाजें सुनाई दे रही थीं। स्थिति ऐसी थी कि दो रात बंकर में बिताई। इमरजेंसी अलार्म बजते ही रूह कांप जाती थी। लगता था कि एक बम गिरेगा और सब कुछ खत्म हो जाएगा।मां और पिता फोन कर हौसला बांधते थे। काफी मुश्किलों के बाद 26 फरवरी को प्राइवेट बस बुक करके रोमानिया पहुंची। साथ में 30 दोस्त थे। रोमानिया से बुकारेस एयरपोर्ट पहुंची। वहां से दिल्ली आई। घर पहुंची तो खुशी का ठिकाना न रहा। ईश्वर से प्रार्थना है कि यूक्रेन में फंसे सभी लोग सुरक्षित अपने घर आ जाएं।