बंधक बनाकर लूट मामला: डकैती की जगह पुलिस ने दर्ज किया लूट का केस, सीसीटीवी फुटेज से मिली बदमाशों की तस्वीरें
फाइनेंस कंपनी में डकैती के मामले में कर्मचारी भी संदेह के घेरे में, बदमाशों को दबोचने के लिए लगाई गई हैं पुलिस की छह टीमें।
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गोरखपुर जिले के चौरीचौरा इलाके के महादेवा जंगल गांव में स्थित फ्यूजन माइक्रोसॉफ्ट फाइनेंस कंपनी के दफ्तर में डकैती के मामले में पुलिस ने लूट का केस दर्ज कर लिया है। मैनेजर शशि कुमार यादव से लिखवाई गई तहरीर में बदमाशों की संख्या चार करके पुलिस ने बड़ी खामोशी से इसे लूट में बदल दिया। पुलिस का यह हाल तब है कि जब वहां पर डीआईजी जे.रविंद्र गौड़, एसएसपी डॉ. विपिन टांडा तक मौके पर पहुंचे थे।
इसे लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहा है। उधर, पुलिस को फाइनेंस कंपनी के सामने स्थित व्यापारी के गोदाम के सीसी टीवी कैमरे से पुलिस को तीन तस्वीरें हासिल हुई है। इसकी मदद से बदमाशों की पहचान कर गिरफ्तारी को दबिश दी जा रही है। उधर, पुलिस की जांच के दायरे में फाइनेंस कंपनी के कर्मचारी भी हैं। एक-एक कर्मचारी की भूमिका जांची जा रही है।
जानकारी के मुताबिक, गुरुवार रात 8:30 बजे कंपनी के ब्रांच मैनेजर शशि कुमार यादव अपने साथी कर्मचारियों के साथ कैश की गिनती कर रहे थे। इसी दौरान बाइक से आए पांच बदमाशों ने असलहे के दम पर बंधक बनाकर 4.10 लाख रुपये लूटे और फरार हो गए। विरोध करने पर एक कर्मचारी शुभम के सिर पर पिस्टल के बट से प्रहार कर घायल भी कर दिया था। तब मैनेजर ने बताया था कि दो बाइक पर पांच बदमाश आए थे। तीन बदमाश अंदर दाखिल होकर वारदात को अंजाम दिए, बाकी दो बाइक पर ही मौजूद थे।
सीसी टीवी कैमरे से मिली तस्वीर, तलाश तेज
वारदात के बाद पहुंचे अफसरों के सामने पूछताछ में यह बात सामने आई थी। मगर अफसरों के जाने के बाद पुलिस ने मैनेजर को तहरीर देने के लिए बुलाया और फिर बदमाशों की संख्या को चार करा दिया ताकि डकैती की धारा को लूट में बदला जा सके। फिर पुलिस ने तहरीर के हवाला देकर धारा 394 (लूट के लिए बल प्रयोग) का केस दर्ज कर लिया है।
पुलिस ने सीसीटीवी कैमरों की जांच की तो बदमाशों की तस्वीर मिल गई। तस्वीर साफ नहीं थीं लेकिन उसे पुलिस ने एक्सपर्ट की मदद से साफ करा लिया है। इसके बाद से ही बदमाशों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की छह टीमें लगाई गई हैं। आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए गैर जनपद में भी दबिश दी जा रही है। एसपी नार्थ मनोज अवस्थी ने बताया कि तहरीर के आधार पर केस दर्ज कर लिया गया है। सीसी टीवी कैमरे की मदद से बदमाशों की तस्वीर मिली है। पुलिस आरोपितों की तलाश में लगी है, जल्द ही घटना का पर्दाफाश कर लिया जाएगा। कर्मचारियों से भी पूछताछ की जा रही है।
लूट और डकैती में यह होता है अंतर
पुलिस ने इस मामले में धारा 394 के तहत केस दर्ज किया है। इसका मतलब होता है लूट और इस दौरान जानबूझकर किसी को चोट पहुंचाना। आईपीसी की इस धारा के तहत दोष साबित होने पर दस वर्ष की कैद, जुर्माना या फिर आजीवन कारावास की सजा हो सकती है। लूट में बदमाशों की संख्या चार या फिर उससे कम होती है। डकैती की धारा 395 होती है। इसमें बदमाशों की संख्या पांच या उससे ज्यादा होती है। इसमें अदालत में दोष साबित होने की स्थिति में दस साल की कैद, जुर्माना या फिर आजीवन कारावास की सजा हो सकती है। अगर पुलिस ने डकैती की धारा में केस दर्ज किया होता तो आला अफसरों के स्तर से तमाम तरह के सवाल हो सकते थे।