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गोरखपुर: आरएमआरसी प्रदेश के कई और सीएचसी को बनाएगा रिसर्च सेंटर, लखनऊ में आयोजित बैठक में लिया गया फैसला
Wed, 11 May 2022 01:05 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Wed, 11 May 2022 01:05 PM IST
सार
डॉ. अशोक पांडेय ने बताया कि सीएचसी ठर्रापार प्रदेश का पहला ऐसा सीएचसी होगा, जहां पर इलाज के लिए आने वाले हर मरीज और उसके परिवार में होने वाली बीमारियों का पूरा रिकॉर्ड रखा जाएगा। इस काम के लिए आरएमआरसी के 16 स्वास्थ्यकर्मी लगाए जाएंगे।
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गोरखपुर आईसीएमआर आरएमआरसी।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
उत्तर प्रदेश की कुछ और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) को रिसर्च सेंटर के रूप में विकसित किया जाएगा। यह जिम्मेदारी रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर (आरएमआरसी) गोरखपुर को मिली है। आरएमआरसी पहले से ही सहजनवां के ठर्रापार सीएचसी को रिसर्च सेंटर के रूप में विकसित कर रहा है।
स्वास्थ्य महकमे की मंगलवार को वर्चुअल बैठक हुई है। इसकी अध्यक्षता महानिदेशक व स्वास्थ्य सचिव ने की है। बैठक के दौरान ही उत्तर प्रदेश की कुछ और सीएचसी की स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की बात कही गई। आरएमआरसी के मीडिया प्रभारी डॉ. अशोक पांडेय ने बताया कि मॉडल रूरल रिसर्च यूनिट (एमआरएचआरयू) के तर्ज पर सीएचसी को विकसित किया जाएगा।
डॉ. अशोक पांडेय ने बताया कि सीएचसी ठर्रापार प्रदेश का पहला ऐसा सीएचसी होगा, जहां पर इलाज के लिए आने वाले हर मरीज और उसके परिवार में होने वाली बीमारियों का पूरा रिकॉर्ड रखा जाएगा। इस काम के लिए आरएमआरसी के 16 स्वास्थ्यकर्मी लगाए जाएंगे। मई में काम शुरू हो जाएगा। इसे लेकर आरएमआरसी और स्वास्थ्य विभाग के बीच अनुबंध हो चुका है।
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सीएचसी पर इलाज के लिए सप्ताह में एक दिन अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) और बीआरडी मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर जाएंगे। आईसीएमआर ने रिसर्च यूनिट में पांच विषयों पर शोध करने की अनुमति भी दी है। इसमें टीबी, निमोनिया, इंसेफ्लाइटिस, पोषण व रेसपिरेटरी वायरल इंफेक्शन शामिल है।
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स्वास्थ्य महकमे की मंगलवार को वर्चुअल बैठक हुई है। इसकी अध्यक्षता महानिदेशक व स्वास्थ्य सचिव ने की है। बैठक के दौरान ही उत्तर प्रदेश की कुछ और सीएचसी की स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की बात कही गई। आरएमआरसी के मीडिया प्रभारी डॉ. अशोक पांडेय ने बताया कि मॉडल रूरल रिसर्च यूनिट (एमआरएचआरयू) के तर्ज पर सीएचसी को विकसित किया जाएगा।
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डॉ. अशोक पांडेय ने बताया कि सीएचसी ठर्रापार प्रदेश का पहला ऐसा सीएचसी होगा, जहां पर इलाज के लिए आने वाले हर मरीज और उसके परिवार में होने वाली बीमारियों का पूरा रिकॉर्ड रखा जाएगा। इस काम के लिए आरएमआरसी के 16 स्वास्थ्यकर्मी लगाए जाएंगे। मई में काम शुरू हो जाएगा। इसे लेकर आरएमआरसी और स्वास्थ्य विभाग के बीच अनुबंध हो चुका है।
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सीएचसी पर इलाज के लिए सप्ताह में एक दिन अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) और बीआरडी मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर जाएंगे। आईसीएमआर ने रिसर्च यूनिट में पांच विषयों पर शोध करने की अनुमति भी दी है। इसमें टीबी, निमोनिया, इंसेफ्लाइटिस, पोषण व रेसपिरेटरी वायरल इंफेक्शन शामिल है।