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कोरोना: आरएमआरसी करेगा ओ पॉजिटिव ग्रुप वाले मरीजों पर शोध, जानिए क्या है वजह
Wed, 28 Jul 2021 03:08 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Wed, 28 Jul 2021 03:08 PM IST
सार
ऐसे ग्रुप के लोग संक्रमित तो हुए लेकिन सबसे कम खतरा उन्हें ही रहा, कई राज्यों में शोध के बाद हुई पुष्टि, जीन मैपिंग के तहत जांची जाएगी उनकी क्षमता।
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कोरोना वायरस की जांच। (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
क्षेत्रीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान केंद्र (आरएमआरसी) कोरोना संक्रमित हुए पूर्वांचल के ओ-पॉजिटिव ग्रुप वाले लोगों पर शोध करेगा। अलग-अलग स्थानों पर हुए शोध में यह बात सामने आई है कि संक्रमित होने वालों में ओ-ब्लड ग्रुप वालों की संख्या बेहद कम रही। जो संक्रमित हुए भी वे गंभीर स्थिति में नहीं पहुंचे। आरएमआरसी की ओर से जीन मैपिंग के द्वारा इसका कारण जाना जाएगा।
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आरएमआरसी की सीनियर वैज्ञानिक डॉ. हीरावती ने बताया कि वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की तरफ देश के कई संस्थानों में शोध किया गया है। इसमें यह बात सामने आई है कि कोरोना संक्रमण का शिकार हुए ओ-पॉजिटिव ब्लड ग्रुप के लोग गंभीर रूप से बीमार नहीं हुए, जबकि अन्य ब्लड ग्रुप वाले लोगों के साथ ऐसा नहीं रहा है। पूर्वांचल के मरीजों की स्थिति जानने के लिए ओ पॉजिटिव ब्लड ग्रुप वाले मरीजों पर शोध का फैसला लिया गया है।
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शोध में यह जानने की कोशिश की जाएगी कि आखिर ओ पॉजिटिव ग्रुप के लोगों को संक्रमण का खतरा कम क्यों रहा है? उनके शरीर की इम्युनिटी किन वजहों से बेहतर रही है। वह कितने दिनों में ठीक हो गए और उन्होंने संक्रमण के दौरान कौन से दवा और क्या खानपान अपनाया। इस बारे में इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) को प्रस्ताव भी भेजा गया है। आईसीएमआर की देखरेख में यह शोध किया जाएगा।
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अलग-अलग समूहों के लिए जाएंगे सैंपल
डॉ. हीरावती ने बताया कि इसके लिए अलग-अलग समूह के ठीक हो चुके मरीजों के सैंपल इकट्ठा किए जाएंगे। इसमें युवा,अधेड़ और बुजुर्ग शामिल किए जाएंगे। उनके ठीक होने का समय और एंटीबॉडी की स्थिति भी जांची जाएगी।
विदेशों में भी इस पर हो चुके हैं शोध
डॉ. हीरावती ने बताया कि कोरोना संक्रमित मरीजों के ब्लड ग्रुप को लेकर कई देशों में शोध हो चुके हैं। इसके रिसर्च पेपर भी प्रकाशित हो चुके हैं। इसमें ओ पॉजिटिव ब्लड ग्रुप के लोगों का जिक्र भी किया गया है। इन देशों में फ्रांस, इटली, अमेरिका आदि शामिल हैं।