आरएमआरसी: जीनोम सीक्वेंसिंग और एंटीबाडी की हो सकेगी जांच, बाहर नहीं भेजना होगा नमूना
माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अमरेश सिंह ने बताया कि नए स्ट्रेन का पता लगाने के लिए नमूने केजीएमयू भेजे गए हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि तीन से चार दिनों के अंदर रिपोर्ट आ जाएगी। ब्यूरो
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क्षेत्रीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान केंद्र (आरएमआरसी) को जीन सीक्वेंसर और फ्लोसाइकोमीटर मशीनें मिल गई हैं। अब वायरस के नए स्ट्रेन का पता भी लगाया जा सकेगा। साथ ही जीनोम सीक्वेंसिंग की जांच भी की जा सकेगी। मशीनों को इंस्टाल करने का काम भी शुरू कर दिया गया है।
जानकारी के मुताबिक, अब तक जीनोम सीक्वेंसिंग जांच के लिए बीआरडी मेडिकल कॉलेज नमूना केजीएमयू भेजता था। रिपोर्ट मिलने में चार से पांच दिन का समय लगता था। कभी-कभी तो नमूने खराब हो जाते थे। इसे देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल आरएमआरसी के पांच मंजिला भवन का उद्घाटन किया था। इसके बाद मशीनें आनी थी, लेकिन कुछ कारणों की वजह से मशीनें उस वक्त नहीं आ सकी थीं। इस बीच अब आरएमआरसी को नई मशीनें मिल गई हैं।
आरएमआरसी के मीडिया प्रभारी व सीनियर वैज्ञानिक डॉ. अशोक पांडेय ने बताया कि जीन सीक्वेंसर मशीन और फ्लोसाइकोमीटर मशीनें मिल गई हैं। दोनों के इंस्टाल करने का काम भी शुरू कर दिया गया है। इसमें करीब 15 से 20 दिन का समय लगता है। फ्लोसाइकोमीटर से खून की जांच और एंटीबाडी का पता लगाया जाता है। इस सुविधा के शुरू होने के बाद पूर्वांचल में नई बीमारियों पर शोध भी हो सकेगा। साथ ही नई बीमारियों की जानकारी भी हो सकेगी।
65 लोगों के नमूने जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए भेजे गए
नए स्ट्रेन का पता लगाने के लिए बीआरडी मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग ने एक बार फिर 65 नमूने जीनोम सीक्वेसिंग जांच के लिए केजीएमयू भेजा है। तीन से चार दिनों के अंदर इनकी रिपोर्ट आ जाएगी। इसके बाद से यह पता लगेगा कि मौजूदा समय में कौन सा स्ट्रेन जिले में मिल रहा है। माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अमरेश सिंह ने बताया कि नए स्ट्रेन का पता लगाने के लिए नमूने केजीएमयू भेजे गए हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि तीन से चार दिनों के अंदर रिपोर्ट आ जाएगी।
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8,812 लोगों को लगा कोरोनारोधी टीका
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