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रिंग रोड : किसानों के खातों में जल्द ही पहुंचेगी मुआवजे की रकम
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गोरखपुर/ जगदीशपुर। जंगल कौड़िया-जगदीशपुर रिंग रोड के लिए अधिग्रहित जमीन को समतल कराने का काम मंगलवार को किसानों ने रोक दिया। किसानों ने पहले मुआवजा के भुगतान कराने की बात कही। एनएचएआई के कांट्रैक्टर ने अधिकारियों से मोबाइल फोन पर बात कराकर जल्द ही मुआवजा की रकम बैंक खातों में भेजे जाने का आश्वासन दिया। इसके बाद जमीन की समतलीकरण का काम शुरू हो सका। इस दौरान करीब एक किमी तक सड़क का काम हुआ। अधिकारियों का कहना है कि किसानों के मुआवजा का मामला जल्द ही सुलझा लिया जाएगा।
जंगल कौड़िया-जगदीशपुर रिंग रोड के लिए 26 गांवों के किसानों की जमीन अधिग्रहित की गई है। वर्तमान सर्किल रेट पर मुआवजा की मांग की लेकर किसानों ने काम रोक दिया था। जिला प्रशासन की ओर से किसानों को आर्बिट्रेशन दाखिल कराने की सलाह दी। उधर, एनएचएआई की ओर से ताल जहदा से काम शुरू करा दिया गया है।
मानीराम क्षेत्र के बैजनाथपुर में मंगलवार को एनएचएआई के अधिकारी, राजस्व कर्मचारी और कांट्रैक्टर सड़क का काम शुरू कराने पहुंचे। तभी किसानों ने काम रोक दिया। लोगों ने कहा कि मुआवजा की रकम अभी उनके खाते में नहीं पहुंची है। इसलिए कोई काम न किया जाए। इस पर कांट्रैक्टर ने प्रशासनिक अधिकारियों से किसानों की बात कराई। इस दौरान अधिकारियों ने आश्वस्त किया कि मुआवजा भुगतान की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। जल्द ही सभी के बैंक खातों में मुआवजे की रकम पहुंच जाएगी।
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इंसेट
विधायक ने की सर्किल रेट बढ़ाने की मांग
पिपराइच। जंगल कौड़िया-जगदीशपुर रिंग रोड के निर्माण कार्य और कोनी सीलिंग प्रकरण पर विधायक महेंद्रपाल सिंह ने विधान सभा के प्रमुख सचिव को पत्र लिखा है। विधायक ने कहा है कि प्रदेश में समय-समय पर जमीनों के सर्किल रेट तय किए जाते हैं। गोरखपुर में वर्ष 2016 से सर्किल रेट नहीं बढ़ा है। इस वजह से किसानों को अधिग्रहित जमीनों का उचित मुआवजा नहीं मिल पा रहा है। इसलिए जनहित में सर्किल रेट वर्तमान स्थिति के अनुसार तय किया जाए। इसके अलावा विधायक ने कोनी सीलिंग प्रकरण के मामले में भी स्थिति स्पष्ट करने की बात कही है। विधायक ने अपने पत्र में कहा है कि जिस जमीन की दो बार चकबंदी हुई है, उसपर मालियत लगाकर दूसरे किसान का चक बना दिया गया है। इससे यह स्पष्ट नहीं हो रहा कि सीलिंग की जमीन कौन सी मानी जाएगी। इसके लिए चकबंदी कर्मचारी जिम्मेदार हैं, जिनकी वजह से किसान पीड़ित और आक्रोशित हैं।
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जंगल कौड़िया-जगदीशपुर रिंग रोड के लिए 26 गांवों के किसानों की जमीन अधिग्रहित की गई है। वर्तमान सर्किल रेट पर मुआवजा की मांग की लेकर किसानों ने काम रोक दिया था। जिला प्रशासन की ओर से किसानों को आर्बिट्रेशन दाखिल कराने की सलाह दी। उधर, एनएचएआई की ओर से ताल जहदा से काम शुरू करा दिया गया है।
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मानीराम क्षेत्र के बैजनाथपुर में मंगलवार को एनएचएआई के अधिकारी, राजस्व कर्मचारी और कांट्रैक्टर सड़क का काम शुरू कराने पहुंचे। तभी किसानों ने काम रोक दिया। लोगों ने कहा कि मुआवजा की रकम अभी उनके खाते में नहीं पहुंची है। इसलिए कोई काम न किया जाए। इस पर कांट्रैक्टर ने प्रशासनिक अधिकारियों से किसानों की बात कराई। इस दौरान अधिकारियों ने आश्वस्त किया कि मुआवजा भुगतान की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। जल्द ही सभी के बैंक खातों में मुआवजे की रकम पहुंच जाएगी।
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विधायक ने की सर्किल रेट बढ़ाने की मांग
पिपराइच। जंगल कौड़िया-जगदीशपुर रिंग रोड के निर्माण कार्य और कोनी सीलिंग प्रकरण पर विधायक महेंद्रपाल सिंह ने विधान सभा के प्रमुख सचिव को पत्र लिखा है। विधायक ने कहा है कि प्रदेश में समय-समय पर जमीनों के सर्किल रेट तय किए जाते हैं। गोरखपुर में वर्ष 2016 से सर्किल रेट नहीं बढ़ा है। इस वजह से किसानों को अधिग्रहित जमीनों का उचित मुआवजा नहीं मिल पा रहा है। इसलिए जनहित में सर्किल रेट वर्तमान स्थिति के अनुसार तय किया जाए। इसके अलावा विधायक ने कोनी सीलिंग प्रकरण के मामले में भी स्थिति स्पष्ट करने की बात कही है। विधायक ने अपने पत्र में कहा है कि जिस जमीन की दो बार चकबंदी हुई है, उसपर मालियत लगाकर दूसरे किसान का चक बना दिया गया है। इससे यह स्पष्ट नहीं हो रहा कि सीलिंग की जमीन कौन सी मानी जाएगी। इसके लिए चकबंदी कर्मचारी जिम्मेदार हैं, जिनकी वजह से किसान पीड़ित और आक्रोशित हैं।