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बस्ती: आरएफसी की रिपोर्ट पर मिल मालिक का पलटवार, संबद्धता पत्र लापता करने का लगाया आरोप
Thu, 07 Oct 2021 11:00 AM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, बस्ती।
अमर उजाला नेटवर्क, बस्ती।
Published by: vivek shukla
Updated Thu, 07 Oct 2021 11:00 AM IST
सार
जिले में न्यूनतम मूल्य समर्थन योजना 2020 में धान खरीद के दौरान कुटाई करने के बाद जब उसका मेहनताना मांगने उत्कर्ष राइस मिल मालिक पहुंचे तो उन्हें कुछ दिन दौड़ाने के बाद बताया गया कि संबद्धता पत्र नहीं है, इसलिए भुगतान नहीं हो सकता।
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
बस्ती जिले में खाद्य एवं रसद विभाग पर राइस मिल मालिकों ने हमला बोल दिया है, क्योंकि आरएफसी ने मिल की संबद्धता न होने पर सवाल उठाते हुए कार्रवाई के लिए पत्र लिखा है। इसका जवाब देते हुए मिल मालिकों ने जिम्मेदारों को तत्कालीन डीएम आशुतोष निरंजन के संबद्धता पत्र को लापता करने का आरोप लगाया है। प्रमुख सचिव को पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग की है। इस पर प्रमुख सचिव ने मामले की जांच के लिए डीएम को पत्र लिखा है।
जिले में न्यूनतम मूल्य समर्थन योजना 2020 में धान खरीद के दौरान कुटाई करने के बाद जब उसका मेहनताना मांगने उत्कर्ष राइस मिल मालिक पहुंचे तो उन्हें कुछ दिन दौड़ाने के बाद बताया गया कि संबद्धता पत्र नहीं है, इसलिए भुगतान नहीं हो सकता। इस मामले में आरएफसी ने कार्रवाई के लिए पत्र लिख दिया, मगर अब उनका यह दांव उल्टा पड़ गया है।
उत्कर्ष ट्रेडर्स के प्रोपराइटर महेश कुमार ने प्रमुख सचिव को पत्र भेजकर बताया है कि वर्ष 20-21 में उसने खाद्य एवं रसद विभाग, पीसीएफ व पीसीयू के धान क्रय केंद्रों से कुटाई के लिए मिले धान के सापेक्ष देय सरकारी चावल एफसीआई में नियमानुसार जमा कर दिया। उसने इसके एवज में दिए जाने वाले भुगतान के लिए प्रस्तुत बिल के साथ संबद्धीकरण आदेश दिया लेकिन जिम्मेदारों ने इस आदेश को लापता कर दिया।
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इसके बाद आरोप लगाया गया कि बिना संबद्धीकरण के धान सदर बी क्रय केंद्रों की कुटाई की गई है। जबकि वास्तविकता यह है कि तत्कालीन डीएम आशुतोष निरंजन ने 12 दिसंबर 2020 को उनका मिल संबद्ध किया था। इस मामले में प्रमुख सचिव खाद्य एवं रसद मीना कुमारी ने डीएम को मामले की जांच करने कर रिपोर्ट एक पखवाड़े में देने के निर्देश दिए हैं।
आरएफसी सरयू प्रसाद ने प्रमुख सचिव को राइस मिल के खिलाफ रिपोर्ट देने की बात स्वीकारते हुए कहा कि उनका संबद्धीकरण पत्र नहीं मिला है। प्रमुख सचिव ने डीएम को जांच के लिए लिखने के सवाल पर कहा कि यह उनके संज्ञान में नहीं है।
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जिले में न्यूनतम मूल्य समर्थन योजना 2020 में धान खरीद के दौरान कुटाई करने के बाद जब उसका मेहनताना मांगने उत्कर्ष राइस मिल मालिक पहुंचे तो उन्हें कुछ दिन दौड़ाने के बाद बताया गया कि संबद्धता पत्र नहीं है, इसलिए भुगतान नहीं हो सकता। इस मामले में आरएफसी ने कार्रवाई के लिए पत्र लिख दिया, मगर अब उनका यह दांव उल्टा पड़ गया है।
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उत्कर्ष ट्रेडर्स के प्रोपराइटर महेश कुमार ने प्रमुख सचिव को पत्र भेजकर बताया है कि वर्ष 20-21 में उसने खाद्य एवं रसद विभाग, पीसीएफ व पीसीयू के धान क्रय केंद्रों से कुटाई के लिए मिले धान के सापेक्ष देय सरकारी चावल एफसीआई में नियमानुसार जमा कर दिया। उसने इसके एवज में दिए जाने वाले भुगतान के लिए प्रस्तुत बिल के साथ संबद्धीकरण आदेश दिया लेकिन जिम्मेदारों ने इस आदेश को लापता कर दिया।
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इसके बाद आरोप लगाया गया कि बिना संबद्धीकरण के धान सदर बी क्रय केंद्रों की कुटाई की गई है। जबकि वास्तविकता यह है कि तत्कालीन डीएम आशुतोष निरंजन ने 12 दिसंबर 2020 को उनका मिल संबद्ध किया था। इस मामले में प्रमुख सचिव खाद्य एवं रसद मीना कुमारी ने डीएम को मामले की जांच करने कर रिपोर्ट एक पखवाड़े में देने के निर्देश दिए हैं।
आरएफसी सरयू प्रसाद ने प्रमुख सचिव को राइस मिल के खिलाफ रिपोर्ट देने की बात स्वीकारते हुए कहा कि उनका संबद्धीकरण पत्र नहीं मिला है। प्रमुख सचिव ने डीएम को जांच के लिए लिखने के सवाल पर कहा कि यह उनके संज्ञान में नहीं है।