Exclusive: साइबर ठगों के निशाने पर सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी, ऐसे कर सकते हैं अपना बचाव
डीआईजी जे. रविंद्र ने बताया कि साइबर ठग नए-नए तरीके अपना रहे हैं। जागरूकता बढ़ी है, फिर भी कुछ लोग ठगों के चक्कर में फंस जा रहे हैं। साइबर थाना पुलिस अच्छा काम कर रही है। तमाम लोगों की डूबी धनराशि मिली है।
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विस्तार
साइबर ठगों के निशाने पर अब सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी हैं। ठग, पेंशन बनाने व उसके भुगतान का झांसा देते हैं, फिर जरूरी जानकारी हासिल करके लाखों रुपये उड़ा देते हैं। सेवानिवृत्त पुलिस कर्मियों से अब तक 40 लाख रुपये से ज्यादा की ठगी की जा चुकी है।
साइबर ठगों के सामने विशेषज्ञ पुलिसकर्मी पूरी तरह से फेल हो गए हैं। ठगों के पास सेवानिवृत्त पुलिसकर्मियों का पूरा ब्योरा रहता है। वह आत्मविश्वास से सेवानिवृत्त पुलिस कर्मी को फोन करते हैं। अलग-अलग जिलों में तैनाती की जानकारी देते हैं, फिर सेवानिवृत्ति का जिला बताकर पेंशन बनाने की बात कहते हैं।
इस झांसे में आकर सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी अपनी गाढ़ी कमाई लुटा देते हैं। पिछले एक साल के दौरान ही छह सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी ठगी के शिकार हो चुके हैं। सभी मामले साइबर पुलिस थाने में दर्ज हैं, लेकिन एक का भी पर्दाफाश नहीं हो सका।
दो वर्षों में साइबर ठगी के दर्ज हुए 380 मुकदमे
पिछले दो वर्षों में साइबर ठगी के 380 मुकदमे दर्ज हुए हैं। इसमें से 30 फीसदी मामलों का पर्दाफाश ही हो सका है। 70 फीसदी मामलों का पर्दाफाश नहीं हुआ। ये वह मामले हैं, जिसमें केस दर्ज किया गया। कई ऐसे मामले भी सामने आए, जिसमें पुलिस ने केस ही नहीं दर्ज किया है। अब तक जिले में 3.18 करोड़ रुपये की साइबर ठगी हो चुकी है। इसमें से 2.26 करोड़ रुपये वापस कराने में पुलिस नाकाम साबित हुई।
चार घंटे में शिकायत तो प्रभावी कार्रवाई
विशेषज्ञों के मुताबिक, ठगी के चार घंटे के अंदर शिकायत मिलने पर पुलिस प्रभावी कार्रवाई कर पाती है। पीड़ित के बैंक खातों की जानकारी ली जाती है, फिर ई-मेल भेजकर बैंककर्मियों को सतर्क किया जाता है। बैंककर्मियों के सहयोग से ही कुछ घंटे के अंदर धनराशि वापस मंगाई जाती है।
इन दस्तावेजों के साथ करें शिकायत
- साइबर सेल प्रभारी के नाम एक प्रार्थना पत्र
- अपडेट बैंक पासबुक की फोटो कॉपी
- पासबुक न होने पर मोबाइल फोन पर खाते से निकली धनराशि का एसएमएस
ऐसे बचें
- अपने बैंक खाते का ब्योरा किसी के साथ साझा ना करें।
- अपने कंप्यूटर, फोन और टैबलेट को प्रोटेक्ट करने के लिए हमेशा अच्छे एंटी वायरस या एंटी मालवेयर सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करें।
- अलग-अलग ऑनलाइन बैंक खातों के लिए एक जैसा पासवर्ड मत रखिए।
- ई-मेल, बैंक लॉग इन और सोशल मीडिया एकाउंट के लिए अलग-अलग पासवर्ड का इस्तेमाल करें।
- डेट ऑफ बर्थ, एनिवर्सरी डेट या फोन नंबर को पासवर्ड ना बनाएं।
- बैंक से आने वाले हर संदेश को पढ़ें, ताकि जालसाजी की तुरंत जानकारी मिले।
- ऑफर देकर अमीर बनाने का वादा करने वाले लिंक से दूरी बनाएं।
- अंजान फोन आने पर झांसे में कभी भी ना आएं, अपनी कोई जानकारी साझा न करें।
- कोई भी कंपनी करोड़ रुपये का लकी ड्रा नहीं देती है।
डीआईजी जे. रविंद्र ने बताया कि साइबर ठग नए-नए तरीके अपना रहे हैं। जागरूकता बढ़ी है, फिर भी कुछ लोग ठगों के चक्कर में फंस जा रहे हैं। साइबर थाना पुलिस अच्छा काम कर रही है। तमाम लोगों की डूबी धनराशि मिली है। सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी भी ठगी के शिकार हुए हैं। हर मामले की जांच कराई जा रही है। प्रभावी कार्रवाई की जाएगी।
केस एक
बलरामपुर जिले से निरीक्षक पद से सेवानिवृत्त पदमाकर राय शाहपुर थाना क्षेत्र के धर्मपुर में किराये के मकान में रहते हैं। वह बलिया के सिकंदरपुर थाने के लिलकर गांव के मूल निवासी हैं। सेवानिवृत्त होने के बाद जालसाज ने फोन किया और जरूरी जानकारी लेकर उनके बैंक खाते से 10 लाख रुपये उड़ा दिए। पदमाकर बलरामपुर में क्राइम ब्रांच के प्रभारी भी रहे हैं।
केस दो
देवरिया निवासी श्याम नारायण सिंह बलरामपुर जिले से उपनिरीक्षक पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। श्याम नारायण सिंह शाहपुर थाना क्षेत्र के पादरीबाजार में मकान बनवाकर रहते हैं। साइबर ठगों ने उनके खाते से 13.20 लाख रुपये हड़प लिए हैं।
केस तीन
खजनी निवासी नरेंद्र राय उपनिरीक्षक के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। साइबर ठगों ने उनके बैंक खाते में ऑनलाइन पेंशन की धनराशि भेजने का झांसा दिया और जरूरी जानकारी हासिल करके 20 लाख रुपये उड़ा दिए।