फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   Relief drug dealers License application canceled if not canceled

दवा व्यापारियों को राहत : लाइसेंस का आवेदन हुआ निरस्त तो नहीं भरना होगा दोबारा फॉर्म

Thu, 17 Dec 2020 01:03 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 17 Dec 2020 01:03 AM IST
विज्ञापन
Relief drug dealers License application canceled if not canceled
दवा व्यापारियों को राहत : लाइसेंस का आवेदन हुआ निरस्त तो नहीं भरना होगा दोबारा फॉर्म
विज्ञापन

गोरखपुर। दवा व्यापारियों की सुविधा के लिए नए लाइसेंस के आवेदन, पुराने का नवीनीकरण, ब्लड बैंक के आवेदन के साथ ही थोक लाइसेंस के लिए शासन ने नए निर्देश दिए हैं। इसके तहत अब आवेदन में खामी मिलने पर ड्रग इंस्पेक्टर निरस्त नहीं कर सकेंगे। ऐसे में व्यापारियों को दोबारा फॉर्म भरने की जरूरत नहीं होगी। इस फैसले से दवा विक्रेता समिति ने खुशी जताई है।
जानकारी के मुताबिक, अब तक खाद्य औषधि प्रशासन विभाग दवा व्यापारियों का शोषण लाइसेंस का आवेदन या फिर पुराने का नवीनीकरण करने के नाम पर करता था। व्यापारी को नए लाइसेंस के लिए आवेदन करना पड़ता है। साथ ही पुराने लाइसेंस का हर पांच साल पर नवीनीकरण करना पड़ता था। जिले में सात हजार से अधिक दवा व्यापारी हैं। इसकी वजह से हर साल करीब 1200 से 1500 दवा व्यापारियों का नवीनीकरण होता है। हर साल 400 से 500 नए लाइसेंस भी बनते हैं। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन किए जाते हैं। इसके लिए तीन हजार रुपये चालान फीस है। आवेदन के दौरान विभाग कोई खामी दिखाकर आवेदन निरस्त कर देता था। लेकिन अब सरकार के नए फैसले से विभाग आवेदन निरस्त नहीं कर सकता है। खामियां बताकर उसे सही करने को कह सकता हैं।
विज्ञापन

नहीं बदलेगा आईडी व पासवर्ड
नए नियम के तहत अब लाइसेंस के आवेदन को निरस्त करने के नियम हटा दिए हैं। अब ड्रग इंस्पेक्टर उस पर आपत्ति लगा सकेंगे। ऐसे में व्यापारी को बार-बार चालान जमा नहीं करना पड़ेगा। पहली बार जमा चालान के आईडी व पासवर्ड पर ही वह खामियों को दूर कर वही आवेदन आगे बढ़ा देंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन

दवा के लाइसेंस के आवेदन या नवीनीकरण में नियम बेहद जटिल है। इसका फायदा ड्रग इंस्पेक्टर उठाते थे। मामूली खामी निकालकर आवेदन निरस्त कर देते। इसके बाद व्यापारी को दोबारा प्रक्रिया फिर से शुरू करनी पड़ती थी। इसमें 20 से 25 दिन का समय लगता। इसके अलावा दोबारा चालान की रकम जमा करनी पड़ती थी।
- आलोक चौरसिया, महामंत्री, दवा विक्रेता समिति
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed