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गोरखपुर जेल में अलग ही 'खेल', यहां 21 की उम्र में भी नाबालिग की सुविधा ले रहे बंदी
Fri, 03 Jan 2020 12:48 PM IST
विजय जैन
विष्णु त्रिपाठी, गोरखपुर
विष्णु त्रिपाठी, गोरखपुर
Published by: विजय जैन
Updated Fri, 03 Jan 2020 12:48 PM IST
सार
सरकारी दस्तावेज में बदलाव को गुजर गए 31 साल, जेल मैनुअल में सुधार की पहल नहीं
18 से 21 साल की उम्र तक के आरोपित को अवयस्क मानता है जेल प्रशासन
अन्य बंदियों से अलग बैरक में रखे गए है इस उम्र के 84 अवयस्क बंदी
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मंडलीय कारागार।
विस्तार
वर्ष 1988 में बालिग होने की उम्र 18 साल तय की गई, लेकिन 31 साल बाद भी जेल के नियम कायदे आज भी पुराने ही हैं। इसका फायदा बालिग हो चुके वे बंदी उठा रहे हैं जिनकी उम्र 18 से 21 साल तक की है। बड़ी बात यह है कि समय के साथ जेल मैनुअल में इस नियम में बदलाव के लिए न तो कोई पहल हुई है और ना ही किसी ने ध्यान दिया है।
देश के कानून के अनुसार, 18 साल या उससे अधिक उम्र के लोगों को बालिग माना जाता है। किसी अपराध में पुलिस इस उम्र (18-21) वालों को बालिग मानकर जेल भेजती है, लेकिन जेल मैनुअल के मुताबिक ये अवयस्क हैं और इनके लिए अलग बैरक होता है। इनके साथ आम बंदियों की तरह व्यवहार नहीं किया जाता, बल्कि बाल सुधार गृह की तरह ही सुधारने की कोशिश की जाती है। वर्तमान में जेल में इस तरह के 84 बंदी हैं।
जेल मैनुअल के मुताबिक, 18 से 21 वर्ष की उम्र के लोगों को अल्पवयस्क की श्रेणी में रखा जाता है। ऐसा नहीं है कि यह कोई नया कानून बनाया गया है। दरअसल, पहले वयस्क होने की उम्र 21 साल हुआ करती थी। तब से बने जेल मैनुअल में बदलाव नहीं किया गया है। यही परंपरा तभी से चली आ रही है। ऐसे में गंभीर अपराध में पकड़े जाने के बावजूद यह नाबालिग बंदियों को दी जाने वाली सुविधाओं का फायदा जेल जाने के बाद भी उठाते हैं। जबकि जेल भेजने के पीछे उद्देश्य ही यही होता है कि इन्हें सजा दी जाए ताकि सुधार हो सके। जेल मैनुअल अलग होने की वजह से जेल में इन्हें खेलने की सुविधा तो दी ही जाती है, साथ ही अन्य बंदियों से अलग रखकर कोई काम भी नहीं लिया जाता।
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देश के कानून के अनुसार, 18 साल या उससे अधिक उम्र के लोगों को बालिग माना जाता है। किसी अपराध में पुलिस इस उम्र (18-21) वालों को बालिग मानकर जेल भेजती है, लेकिन जेल मैनुअल के मुताबिक ये अवयस्क हैं और इनके लिए अलग बैरक होता है। इनके साथ आम बंदियों की तरह व्यवहार नहीं किया जाता, बल्कि बाल सुधार गृह की तरह ही सुधारने की कोशिश की जाती है। वर्तमान में जेल में इस तरह के 84 बंदी हैं।
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जेल मैनुअल के मुताबिक, 18 से 21 वर्ष की उम्र के लोगों को अल्पवयस्क की श्रेणी में रखा जाता है। ऐसा नहीं है कि यह कोई नया कानून बनाया गया है। दरअसल, पहले वयस्क होने की उम्र 21 साल हुआ करती थी। तब से बने जेल मैनुअल में बदलाव नहीं किया गया है। यही परंपरा तभी से चली आ रही है। ऐसे में गंभीर अपराध में पकड़े जाने के बावजूद यह नाबालिग बंदियों को दी जाने वाली सुविधाओं का फायदा जेल जाने के बाद भी उठाते हैं। जबकि जेल भेजने के पीछे उद्देश्य ही यही होता है कि इन्हें सजा दी जाए ताकि सुधार हो सके। जेल मैनुअल अलग होने की वजह से जेल में इन्हें खेलने की सुविधा तो दी ही जाती है, साथ ही अन्य बंदियों से अलग रखकर कोई काम भी नहीं लिया जाता।
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20 दिसंबर 1988 को हुआ था बदलाव
पहले बालिग होने की उम्र 21 साल हुआ करती थी। 20 दिसंबर 1988 को कानून में संशोधन कर यह उम्र घटाकर 18 साल कर दी गई थी। तब से देश की सभी योजनाओं व अन्य सुविधाओं में 18 साल को ही बालिग माना जाता है।
वर्तमान समय में मंडलीय कारागार में कुल 1756 बंदी हैं। इनमें से 84 अवयस्क हैं, जिनकी उम्र 18 से 21 वर्ष के बीच है। इन्हें अन्य बंदियों से अलग बैरक में रखा गया है। जेल मैनुअल जब बना था तब वयस्कता की उम्र 21 वर्ष थी। तभी से यह चल रहा है। मैनुअल के हिसाब से उन्हें 21 की उम्र के बाद पूर्ण वयस्क माना जाता है।
डॉ रामधनी, वरिष्ठ जेल अधीक्षक
वर्तमान समय में मंडलीय कारागार में कुल 1756 बंदी हैं। इनमें से 84 अवयस्क हैं, जिनकी उम्र 18 से 21 वर्ष के बीच है। इन्हें अन्य बंदियों से अलग बैरक में रखा गया है। जेल मैनुअल जब बना था तब वयस्कता की उम्र 21 वर्ष थी। तभी से यह चल रहा है। मैनुअल के हिसाब से उन्हें 21 की उम्र के बाद पूर्ण वयस्क माना जाता है।
डॉ रामधनी, वरिष्ठ जेल अधीक्षक