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खुद के भट्ठे की ईंट से रेलवे ने बनाई थी अपनी एक खास बिल्डिंग, अब म्यूजियम में दिखते हैं अवशेष

Wed, 27 May 2020 08:12 PM IST
vivek shukla राजन राय, गोरखपुर।
राजन राय, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 27 May 2020 08:12 PM IST
सार

  • 1921 से लेकर 1948 में बनी ईंट का वजन है चार से पांच किलो
  • रेलवे स्टेशन परिसर में अपूर्वा कॉफी हाउस की थी अलग पहचान

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Railways built special building of their own kiln brick in Gorakhpur
इसी ईंट से बनाया गया था बिल्डिंग। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

बहुत कम लोग जानते होंगे कि अंग्रेजों के शासनकाल में रेलवे का अपना ईंट भट्ठा होता था। गोरखपुर में भी अंग्रेज अफसरों ने भट्ठे की ईंट से एक खास बिल्डिंग बनवाई थी। जिसे बाद में अर्पूवा रेस्टोरेंट एंड कॉफी हाउस का नाम दिया गया।

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स्टेशन के सुंदरीकरणा के क्रम में इस बिल्डिंग को अब गिरा दिया गया है, इसमें से निकली ईंट 1921 से लेकर 1948 तक की हैं और इनका वजन चार से पांच किलो है। ईंटों के ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए कुछ ईटों को रेल म्यूजियम में रखवा दिया गया है।
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अब उस जगह बना है पार्क
काफी हाउस की जमीन पर बच्चों के खेलने के लिए पार्क बना गया है। काफी हाउस का भवन जर्जर हो गया था इसलिए उसे गिरा दिया गया। यहां बनने वाले पार्क में चकरी, झूला सहित कई अन्य संसाधन भी लगेंगे। इसमें लोगों के सुबह-शाम टहलने की भी व्यवस्था होगी।

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कॉफी हाउस का डोसा था मशहूर, बड़े नेता चखे थे स्वाद

रेलवे स्टेशन के जनरल क्लास गेट के सामने बने अपूर्वा रेस्टोरेंट कॉफी हाउस का इडली और डोसा बहुत मशहूर था। लोग दूर-दूर से सिर्फ इसका जायका लेने आते थे। गोरखपुर के प्रबुद्ध, राजनीतिक और शिक्षाविदों के संवाद के लिए यह कॉफी हाउस सबसे मुफीद जगह थी। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर, मधुकर दीघे, माधव राव सिंधिया, बलराम जाखड़ जैसे दिग्गज नेता काफी के साथ ही डोसा और इडली का स्वाद ले चुके हैं।

1921 से 1948 तक की ईटें
काफी हाउस से जो ईटें निकल रही हैं वह 1921 से लेकर 1940 तक की हैं। जो ईटें निकल रही हैं उन सभी में सन और रेलवे का नाम अंकित है। उस दौरान कंपनी रेलवे हुआ करती थीं।
  • साल                   रेलवे का नाम
  • 1921   बीएनडब्ल्यूआर बंगाल एण्ड नार्थ वेस्टर्न रेलवे
  • 1929   बीएनडब्ल्यूआर बंगाल एण्ड नार्थ वेस्टर्न रेलवे
  • 1930   बीएनडब्ल्यूआर बंगाल एण्ड नार्थ वेस्टर्न रेलवे
  • 1947  आरएनएस
  • 1948  ओटीआर अवध एंड तिरहुत रेलवे
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