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Gorakhpur News: कप्तानगंज की मिट्टी से बनेगी रेलवे स्टेडियम की पिच
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पूर्वोत्तर रेलवे क्रिकेट स्टेडियम की पिच अब नए सिरे से बनाई जाएगी। पिच क्यूरेटर और विशेषज्ञों ने कुशीनगर के कप्तानगंज में एक तालाब किनारे मिट्टी खोजी है, जिससे उच्च स्तर की क्रिकेट पिच बनाई जा सकती है। यदि यह सफल हुआ तो इस मिट्टी से पूरे प्रदेश के क्रिकेट ग्राउंड की पिच तैयार की जा सकेगी। कई पिचों को बनाने के लिए प्रदेश के बाहर से मिट्टी मंगवानी पड़ती है।
क्रिकेट ग्राउंड की पिच को करीब पांच साल पहले बनाया गया था। खेलते-खेलते अब यह खराब हो गई है तो कुछ समय पहले इसकी मिट्टी को नीचे से ऊपर किया गया। इससे यह एक से दो सीजन तक चल गई। अब मिट्टी पूरी तरह से उखड़ चुकी है। बरसात के सीजन में वैसे भी मैच नहीं होते। ऐसे में रेलवे प्रशासन की योजना है कि इसी बीच पिच को सही से तैयार कर दिया जाए, ताकि आने वाले चार से पांच सालों तक इस पर मुकाबले खेलने में कोई समस्या न आए।
बनाई जाएगी पांच पिच
रेलवे क्रिकेट ग्रांउड पर कुल पांच पिच हैं, जिनको नए सिरे से बनाया जाएगा। इसके लिए करीब 25 से 30 ट्रॉली मिट्टी की जरूरत पड़ेगी। पिच बनाने के बाद उसको काफी समय तक पानी दिया जाएगा। साथ ही बरसात में भी खुुला छाेड़ा जाएगा, ताकि उसकी मिट्टी अच्छे से बैठ सके। मिट्टी जितनी अच्छे से बैठ जाएगी, पिच पर बाउंस उतना ही सही रहेगा। पांच में से करीब तीन पिच को तेज गेंदबाजी के अनुरूप बनाया जाएगा। वहीं, दो पिच सपाट रखी जाएगी।
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घास से तेज गेंदबाजी को मदद
पिच पर यदि घास रहती है, तो उससे तेज गेंदबाजी को मदद मिलती है। घास से गेंद स्विंग करती है और साथ ही तेज गति और उछाल के साथ जाती है। इसके साथ ही बल्लेबाजों को भी इससे मदद मिलती है, क्योंकि बाउंस पर विश्वास कर शॉट खेल सकते हैं। ऐसे तीन पिच बनाए जाएंगे।
सपाट विकेट पर बनते हैं खूब रन
ग्राउंड पर दो पिच सपाट बनाई जाएगी। छोटी उम्र के खिलाड़ियों के लिए घास वाली पिच पर खेलना आसान नहीं होता। सपाट पिच पर रन खूब बरसते हैं। दरारें खुलने के बाद स्पिन गेंदबाजी को भी मदद मिलती है।
क्रिकेट स्टेडियम की सभी पिच को नए सिरे से बनाया जाएगा। इस बार कप्तानगंज स्थित एक तालाब की मिट्टी से इसको बनाने की तैयारी है। विशेषज्ञों के अनुसार यहां की मिट्टी पिच के लिए उत्तम है।
- पंकज कुमार सिंह, सीपीआरओ
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क्रिकेट ग्राउंड की पिच को करीब पांच साल पहले बनाया गया था। खेलते-खेलते अब यह खराब हो गई है तो कुछ समय पहले इसकी मिट्टी को नीचे से ऊपर किया गया। इससे यह एक से दो सीजन तक चल गई। अब मिट्टी पूरी तरह से उखड़ चुकी है। बरसात के सीजन में वैसे भी मैच नहीं होते। ऐसे में रेलवे प्रशासन की योजना है कि इसी बीच पिच को सही से तैयार कर दिया जाए, ताकि आने वाले चार से पांच सालों तक इस पर मुकाबले खेलने में कोई समस्या न आए।
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बनाई जाएगी पांच पिच
रेलवे क्रिकेट ग्रांउड पर कुल पांच पिच हैं, जिनको नए सिरे से बनाया जाएगा। इसके लिए करीब 25 से 30 ट्रॉली मिट्टी की जरूरत पड़ेगी। पिच बनाने के बाद उसको काफी समय तक पानी दिया जाएगा। साथ ही बरसात में भी खुुला छाेड़ा जाएगा, ताकि उसकी मिट्टी अच्छे से बैठ सके। मिट्टी जितनी अच्छे से बैठ जाएगी, पिच पर बाउंस उतना ही सही रहेगा। पांच में से करीब तीन पिच को तेज गेंदबाजी के अनुरूप बनाया जाएगा। वहीं, दो पिच सपाट रखी जाएगी।
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घास से तेज गेंदबाजी को मदद
पिच पर यदि घास रहती है, तो उससे तेज गेंदबाजी को मदद मिलती है। घास से गेंद स्विंग करती है और साथ ही तेज गति और उछाल के साथ जाती है। इसके साथ ही बल्लेबाजों को भी इससे मदद मिलती है, क्योंकि बाउंस पर विश्वास कर शॉट खेल सकते हैं। ऐसे तीन पिच बनाए जाएंगे।
सपाट विकेट पर बनते हैं खूब रन
ग्राउंड पर दो पिच सपाट बनाई जाएगी। छोटी उम्र के खिलाड़ियों के लिए घास वाली पिच पर खेलना आसान नहीं होता। सपाट पिच पर रन खूब बरसते हैं। दरारें खुलने के बाद स्पिन गेंदबाजी को भी मदद मिलती है।
क्रिकेट स्टेडियम की सभी पिच को नए सिरे से बनाया जाएगा। इस बार कप्तानगंज स्थित एक तालाब की मिट्टी से इसको बनाने की तैयारी है। विशेषज्ञों के अनुसार यहां की मिट्टी पिच के लिए उत्तम है।
- पंकज कुमार सिंह, सीपीआरओ