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UP News: सुअर के मांस की बिक्री पर प्रतिबंध, अफ्रीकन स्वाइन फीवर वायरस को लेकर अलर्ट जारी
Fri, 22 Jul 2022 01:51 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Fri, 22 Jul 2022 01:51 PM IST
सार
गोरखपुर जिले में चार हजार सुअर व 500 बाड़े हैं। सभी से सुअर पालन को छोड़ने की अपनी की जा रही है। सुअरों में गंभीर संक्रामक बीमारी फैल रही है।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : REUTERS
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विस्तार
लखनऊ में सुअरों में अफ्रीकन स्वाइन फीवर (एएसएफ) वायरस की पुष्टि के बाद पूरे प्रदेश में अलर्ट जारी किया गया है। साथ ही सुअरों के मांस बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया। यह भी सलाह दी गई कि सुअरों को बाड़े में ही रहने दिया जाए।
पशु पालन विभाग सुअरों की जांच के लिए रक्त, सीरम का नमूना लेकर राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान, भोपाल भेजेगा। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. बीपी सिंह ने बताया कि लखनऊ में एएसएफ वायरस की पुष्टि हुई है। गोरखपुर में वायरस नहीं मिला है। इसके बावजूद सतर्कता बरती जा रही है। एएसएफ के खतरे को देखते हुए ही सुअर के मांस की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
सुअर पालन छोड़ने की सलाह
डॉ. बीपी सिंह ने बताया कि जिले में चार हजार सुअर हैं। इनमें से 500 सुअर बाड़े में रखे गए हैं। 267 गांव ऐसे हैं, जहां पर सुअर पाला जाता है। गांवों में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। लोगों को बताया जा रहा है कि सुअर पालना छोड़ दें। अब दूसरा व्यवसाय करें। इससे संक्रामक बीमारियों की चुनौती से निपटने में आसानी होगी। सुअर से ही जापानी इंसेफेलाइटिस भी होता है।
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सैंपल लेकर करेंगे जांच
डॉ. बीपी सिंह ने बताया कि सुअरों में किसी भी प्रकार की बीमारी या फिर मौत होने पर जांच कराई जाएगी। सुअरों के सैंपल लिए जाएंगे। रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर उस क्षेत्र के लोगों की भी जांच कराई जाएगी।
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पशु पालन विभाग सुअरों की जांच के लिए रक्त, सीरम का नमूना लेकर राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान, भोपाल भेजेगा। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. बीपी सिंह ने बताया कि लखनऊ में एएसएफ वायरस की पुष्टि हुई है। गोरखपुर में वायरस नहीं मिला है। इसके बावजूद सतर्कता बरती जा रही है। एएसएफ के खतरे को देखते हुए ही सुअर के मांस की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
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सुअर पालन छोड़ने की सलाह
डॉ. बीपी सिंह ने बताया कि जिले में चार हजार सुअर हैं। इनमें से 500 सुअर बाड़े में रखे गए हैं। 267 गांव ऐसे हैं, जहां पर सुअर पाला जाता है। गांवों में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। लोगों को बताया जा रहा है कि सुअर पालना छोड़ दें। अब दूसरा व्यवसाय करें। इससे संक्रामक बीमारियों की चुनौती से निपटने में आसानी होगी। सुअर से ही जापानी इंसेफेलाइटिस भी होता है।
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सैंपल लेकर करेंगे जांच
डॉ. बीपी सिंह ने बताया कि सुअरों में किसी भी प्रकार की बीमारी या फिर मौत होने पर जांच कराई जाएगी। सुअरों के सैंपल लिए जाएंगे। रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर उस क्षेत्र के लोगों की भी जांच कराई जाएगी।