अब 'जेम' पोर्टल से तैनात होंगे अंशकालिक कोच, 50 से अधिक उम्र वालों का नहीं होगा ट्रायल
- प्रमुख सचिव ने नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव का आदेश जारी किया
- खेल विभाग में वर्ष 2020-21 से किया जाएगा लागू
- डिप्लोमाधारक खेल प्रशिक्षक संघ ने किया इसका विरोध
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खेल विभाग में अब अंशकालिक खेल प्रशिक्षकों की भर्ती 'जेम' पोर्टल के जरिए आउटसोर्सिंग से होगी। अभी तक खेल विभाग ट्रायल लेकर सीधे प्रशिक्षकों की भर्ती करता था। मगर वर्ष 2020-21 से नई प्रक्रिया के तहत इन्हें तैनाती मिलेगी। इस संबंध में प्रमुख सचिव कल्पना अवस्थी ने आदेश जारी किए हैं। उधर, डिप्लोमाधारक खेल प्रशिक्षक संघ ने इसका विरोध किया है।
शासन के फैसले के बाद से गोरखपुर के रीजनल स्पोर्ट्स स्टेडियम और वीर बहादुर सिंह स्पोर्ट्स कॉलेज में प्रशिक्षण देने वाले 20 अंशकालिक प्रशिक्षकों की नौकरी पर संकट गहरा गया है। खेल विभाग पूरे राज्य में विभिन्न खेलों के लिए मानदेय के आधार पर अंशकालिक प्रशिक्षकों की भर्ती करता है। राज्य में 450 अंशकालिक प्रशिक्षकों की जरूरत होती है।
प्रमुख सचिव ने अंशकालीन मानदेय प्रशिक्षकों की भर्ती की गाइडलाइन जारी की है। इसके तहत 25 से 60 वर्ष तक की आयु के महिला एवं पुरुष प्रशिक्षण दे सकेंगे। सभी की भर्ती आउटसोर्सिंग से जेम पोर्टल के जरिए होगी। भर्ती के लिए प्रशिक्षकों को खेलो इंडिया एप पर पंजीकरण कराना जरूरी होगा। इस बार शिविर पहली अक्तूबर से मार्च 2021 तक लगेंगे।
50 से अधिक उम्र वालों का नहीं होगा ट्रायल
अंशकालिक प्रशिक्षकों की भर्ती के लिए ट्रायल का कार्यक्रम तैयार हो गया है। ट्रायल के मानक तय हैं। 25 से 35 वर्ष और 36 से 50 वर्ष की उम्र के मानक अलग-अलग होंगे। पचास वर्ष आयु के ऊपर वालों के ट्रायल नहीं होंगे। उन्हें फिटनेस प्रमाण पत्र देना होगा। विभिन्न स्तर के खिलाड़ियों के अंक निर्धारित हैं। इसके अलावा फिटनेस और स्किल टेस्ट के भी नंबर जुड़ेंगे। तीन माह से ज्यादा की गर्भवतियों को फिटनेस ट्रायल से छूट मिलेगी।
क्षेत्रीय क्रीड़ाधिकारी एके पांडेय ने बताया कि अंशकालिक कोच की नियुक्ति प्रक्रिया में शासन स्तर से बदलाव किया गया है। अब इनकी नियुक्ति जेम पोर्टल के माध्यम से होगी। सत्र 2020-21 से नई व्यवस्था लागू होगी। खेल विभाग का आदेश मिला है। इसके बारे में प्रशिक्षकों को जानकारी दी जा रही है।
भुखमरी के कगार पर पहुंच जाएंगे अंशकालिक कोच: संघ
डिप्लोमा धारक खेल प्रशिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष जीतेंद्र सिंह ने बताया कि शासन के फैसले से अंशकालिक कोच भुखमरी के कगार पर पहुंच जाएंगे। कोई 20 तो कोई 25 वर्षों से प्रशिक्षण दे रहा है। उम्र के इस पड़ाव पर उन्हें बाहर अगर निकाल दिया जाएगा तो रोजी रोटी के लाले पड़ जाएंगे।
सरकार अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी को कोच बनाना चाहती है। कोच बनने के लिए एनआईएस का डिप्लोमा करना अनिवार्य होता है। खुद ही सरकार इस मानक को दरकिनार कर रही है। एलएलबी करने वाला छात्र ही अधिवक्ता, बीएड करने वाला छात्र शिक्षक और एमबीबीएस करने वाले ही डॉक्टर बन सकते हैं। वैसे ही एनआईएस करने वाले ही कोच बनते हैं।