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खुशखबर: गोरखपुर के लिए यादगार लम्हा, एक ही दिन दो विश्वविद्यालयों का मिलेगा तोहफा
Sat, 28 Aug 2021 12:45 AM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sat, 28 Aug 2021 12:45 AM IST
सार
शनिवार को आयुष विश्वविद्यालय की नींव रखेंगे राष्ट्रपति, गुरु गोरखनाथ विश्वविद्यालय का करेंगे लोकार्पण
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बाएं आयुष विश्वविद्यालय का (ले आउट) और दाएं गोरखनाथ विश्वविद्यालय।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
गोरखपुर के लिए 28 अगस्त की तारीख बहुत खास होगी। यह पहला मौका होगा जब जिले के लोगों को एक साथ दो विश्वविद्यालयों की सौगात मिलेगी। वह भी राष्ट्रपति के हाथों। यह सब संभव हो रहा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रयासों से।
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शनिवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद गोरखपुर के के भटहट ब्लॉक के पिपरी में राज्य के पहले आयुष विश्वविद्यालय की आधारशिला रखेंगे। साथ ही उनके हाथों गोरक्षपीठ के अधीन सोनबरसा में संचालित गुरु गोरखनाथ विश्वविद्यालय लोकार्पण भी होगा। सेवा और स्वावलंबन आधारित उच्च व दक्षतापूर्ण शिक्षण के ये दोनों ही संस्थान शिक्षा के साथ ही चिकित्सा के क्षेत्र में पूर्वांचल की पहचान को नया आयाम देंगे।
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दो नए विश्वविद्यालयों की सौगात मिलने के साथ ही गोरखपुर की शैक्षिक उपलब्धियों में कुल चार विश्वविद्यालय हो जाएंगे। पंडित दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय और मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की पहले से विशेष ख्याति रही है। अब महायोगी गुरु गोरक्षनाथ के नाम पर दो नए विश्वविद्यालय गोरखपुर को 'सिटी ऑफ नॉलेज' बनाने में बड़ी भूमिका निभाएंगे।
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बता दें कि एक विश्वविद्यालय की नींव रखने और दूसरे का लोकार्पण करने आ रहे राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद 10 दिसंबर 2018 को भी गोरखपुर आए थे। तब उन्होंने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक सप्ताह समारोह में बतौर मुख्य अतिथि परिषद के शताब्दी वर्ष 2032 तक गोरखपुर को सिटी ऑफ नॉलेज के रूप में प्रतिष्ठित होने की मंशा जताई थी।
तीन साल में ही दिख गया बदलाव
करीब तीन साल बाद जब वह दोबारा गोरखपुर में होंगे तो उनकी जताई मंशा पर सीएम योगी के प्रयास का परिणाम भी उन्हें दिखेगा। शिक्षा और चिकित्सा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का उनके राजनीतिक जीवन के शुरुआत से ही निजी प्राथमिकता का विषय रहा है।
गोरखपुर में अब होने जा रहे चार विश्वविद्यालयों में से तीन का जुड़ाव गोरक्षपीठ से है। इनमें सबसे पहले गोरखपुर विश्वविद्यालय की स्थापना का सबसे बड़ा श्रेय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दादागुरु और तत्कालीन गोरक्षपीठाधीश्वर ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ को है जिन्होंने अपने बनाए दो कॉलेज, विश्वविद्यालय बनाने के लिए राज्य सरकार को दान में दे दिए थे।
28 अगस्त को राष्ट्रपति के हाथों जिन दो विश्वविद्यालयों का इतिहास सृजित होने जा रहा है, उनमें से एक गुरु गोरखनाथ विश्वविद्यालय सोनबरसा मानीराम की स्थापना ही गोरक्षपीठ ने की है। गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में जनसेवा के लिए बनकर तैयार यह विश्वविद्यालय उसी महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद का नया शैक्षिक पड़ाव है जिसकी शुरुआत 1932 में ही महंत दिग्विजयनाथ ने कर दी थी।
राज्य के पहले आयुष विश्वविद्यालय की नींव के पत्थर के रूप में भी गोरक्षपीठ का नाम दर्ज रहेगा। इस विश्वविद्यालय का नामकरण महायोगी गुरु गोरक्षनाथ उत्तर प्रदेश राज्य आयुष विश्वविद्यालय किया गया है। इस विश्वविद्यालय की परिकल्पना से लेकर इसे धरातलीय स्वरूप देने का श्रेय सीएम योगी को है जो गोरक्षपीठ के कर्ताधर्ता भी हैं।
गोरखपुर में अब होने जा रहे चार विश्वविद्यालयों में से तीन का जुड़ाव गोरक्षपीठ से है। इनमें सबसे पहले गोरखपुर विश्वविद्यालय की स्थापना का सबसे बड़ा श्रेय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दादागुरु और तत्कालीन गोरक्षपीठाधीश्वर ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ को है जिन्होंने अपने बनाए दो कॉलेज, विश्वविद्यालय बनाने के लिए राज्य सरकार को दान में दे दिए थे।
28 अगस्त को राष्ट्रपति के हाथों जिन दो विश्वविद्यालयों का इतिहास सृजित होने जा रहा है, उनमें से एक गुरु गोरखनाथ विश्वविद्यालय सोनबरसा मानीराम की स्थापना ही गोरक्षपीठ ने की है। गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में जनसेवा के लिए बनकर तैयार यह विश्वविद्यालय उसी महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद का नया शैक्षिक पड़ाव है जिसकी शुरुआत 1932 में ही महंत दिग्विजयनाथ ने कर दी थी।
राज्य के पहले आयुष विश्वविद्यालय की नींव के पत्थर के रूप में भी गोरक्षपीठ का नाम दर्ज रहेगा। इस विश्वविद्यालय का नामकरण महायोगी गुरु गोरक्षनाथ उत्तर प्रदेश राज्य आयुष विश्वविद्यालय किया गया है। इस विश्वविद्यालय की परिकल्पना से लेकर इसे धरातलीय स्वरूप देने का श्रेय सीएम योगी को है जो गोरक्षपीठ के कर्ताधर्ता भी हैं।