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गोरखपुर: प्री पीएचडी विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ दी तहरीर, भविष्य बर्बाद करने की धमकी देने का आरोप
Wed, 12 Jan 2022 04:10 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Wed, 12 Jan 2022 04:10 PM IST
सार
प्रश्नपत्र में 45 अंक के बहु विकल्पीय और 20 अंक की लिखित परीक्षा के दो प्रश्नपत्र आए। परीक्षा कक्ष मेें आने से पूर्व ही प्रश्न पत्र के लिफाफे की सील पूर्णतया क्षतिग्रस्त और खुली हुई थी।
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गोरखपुर विश्वविद्यालय।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
गोरखपुर विश्वविद्यालय के सत्र 2019-20 प्री पीएचडी छात्रों ने विवि प्रशासन के खिलाफ अभद्रता, मारपीट करने का आरोप लगाते हुए कैंट थाने में तहरीर दी है।
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विद्यार्थियों के अनुसार सात जनवरी को प्री पीएचडी प्रथम प्रश्नपत्र की परीक्षा होनी थी। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से सूचित किया गया था कि 45 अंक की लिखित परीक्षा और 55 अंक का आंतरिक मूल्यांकन होगा। आरोप है कि परीक्षा कक्ष में जो प्रश्नपत्र मिला उसमें बताए गए प्रारूप के अनुसार प्रश्न नहीं थे।
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प्रश्नपत्र में 45 अंक के बहु विकल्पीय और 20 अंक की लिखित परीक्षा के दो प्रश्नपत्र आए। परीक्षा कक्ष मेें आने से पूर्व ही प्रश्न पत्र के लिफाफे की सील पूर्णतया क्षतिग्रस्त और खुली हुई थी। इसकी शिकायत करने सभी विद्यार्थी विश्वविद्यालय प्रशासन से करने जा रहे थे।
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आरोप है कि विवि प्रशासन के कुछ अधिकारियों ने विद्यार्थियों को जबरन एक कमरे में बंद कर दिया। आरोप है कि अधिकारियों ने शिकायत सुनने के बजाय छात्र-छात्राओं से अभद्रता की, पंजीकरण निरस्त करने और भविष्य बर्बाद करने की धमकी भी दी थी।
कैंट इंस्पेक्टर शशिकांत राय ने कहा कि विश्वविद्यालय की तरफ से दर्ज केस के आरोपित विद्यार्थियों ने अधिवक्ता के माध्यम से तहरीर दी है। मामले की जांच की जा रही है।
गोविवि कुलसचिव विश्वेश्वर प्रसाद ने कहा कि प्री पीएचडी विद्यार्थियों के आरोप सरासर गलत हैं। प्रश्नपत्र का लिफाफा परीक्षा केंद्र प्रभारी के सामने ही खोला जाता है। विद्यार्थियों ने ही उत्तर पुस्तिकाएं फाड़ी थीं। इसका मुकदमा कैंट थाने में दर्ज है।