सुमेर सागर के सात एकड़ जमीन में फिर से बनेगा तालाब, प्रशासन ने शुरू की तैयारी
- तीन दिन में ताल की 22 एकड़ जमीन में से 10 एकड़ से हटाया गया कब्जा
- पैमाइश के बाद तय होगा रिहायशी समेत बाकी अन्य निर्माण का भविष्य
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ज्वाइंट मजिस्ट्रेट गौरव सिंह सोगरवाल और सदर तहसीलदार डॉ. संजीव दीक्षित की निगरानी में तीन दिन तक चले अभियान के बाद ताल सुमेर सागर की 22 में से 10 एकड़ जमीन खाली करा ली गई। इनमें से सात एकड़ जमीन को जिला प्रशासन फिर से तालाब का स्वरूप देगा।
सोमवार की शाम मौके पर निरीक्षण करने पहुंचे डीएम के. विजयेंद्र पांडियन ने जेसीबी की मदद से तीन से चार मीटर गड्ढा खोदकर तालाब तैयार करने का निर्देश दिया। वहीं जिन 14 लोगों ने जमीन पर मालिकाना हक को लेकर दस्तावेज दिए हैं तथा मौके पर जो रिहायशी मकान बने हैं, उनका भविष्य ताल की पूरी जमीन की पैमाइश के बाद तय होगा।
डीएम के निर्देश पर सोमवार से पैमाइश का काम शुरू हो गया। इसके लिए ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने नायब तहसीलदार पिपराइच सुमित सिंह के नेतृत्व में पांच लेखपाल और दो कानूनगो की टीम गठित की गई है। तीन दिन में टीम को काम पूरा कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।
लेखपालों की टीम ने नक्को शाह बाबा की मजार को लैंड मार्क मानकर पैमाइश शुरू कर दी है। उधर डीएम ने नगर निगम को कब्जा हटाने के बाद जो मलबा मौके पर जमा है, उसे हटाने का निर्देश दिया। मंगलवार को मलबा हट जाएगा जिसके बाद दो से तीन दिन में तालाब खोदने का काम शुरू हो जाएगा।
14 लोगों ने बैनामा होने का किया है दावा
प्रशासन ने जब पहले दिन कब्जा हटाने की कवायद शुरू की तो 14 लोगों ने डीएम, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट से मुलाकात पर जमीन का रजिस्टर्ड बैनामा होने का दावा किया। इसके अलावा कुछ लोगों के रिहायशी मकान भी है। सदर तहसीलदार डॉ. संजीव दीक्षित का कहना है कि इनमें से तीन ने ही मूल खाताधारक से बैनामा कराया है जबकि कुछ ने सेकेंड या थर्ड पार्टी से बैनामा कराया।
वहीं सात लोगों ने पावर ऑफ अटार्नी के जरिए। ताल की करीब सात एकड़ जमीन प्राइवेट लैंड है लेकिन उसकी नवैयत (स्वरूप) जलमग्न है। ताल से जुड़े कई अभिलेख गायब हो गए थे मगर काफी खोजबीन के बाद मूल जिल्द मिल गई है। इसी के आधार पर कार्रवाई की गई है।
मोहल्ले वालों ने जताया आभार
कब्जा हटाने से खुश सुमेर सागर एवं उसके आसपास रहने वाले 50 से अधिक लोगों के एक प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को सदर तहसील पहुंचकर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट गौरव सिंह सोगरवाल और उनकी टीम के प्रति आभार जताया। उनका कहना था कि एक दशक से वह कब्जेदारों के खिलाफ कार्रवाई के लिए गुहार लगा रहे थे। ताल को पाटकर जमीन कब्जा कर लेने से उनके मोहल्लों में जरा सी बारिश होने पर भी जलभराव की स्थिति बन जाती थी।
महिलाओं ने कहा कि फिर से तालाब बनाने से उनकी जलभराव की समस्या खत्म हो जाएगी। इस पर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट और सदर तहसीलदार ने यह भरोसा दिलाया कि प्रशासन हमेशा उनके साथ है। आभार जताने वालों में लीलावती, जय प्रकाश उपाध्याय, मोहम्मद सईद, आसिफ जमाल, गौतम कुमार शर्मा, विवेक कुमार, विनोद कुमार, जितेंद्र कुमार साहनी, सुनील कुमार आदि शामिल हैं।
कई लोग कोर्ट जाने की तैयारी में
डॉ हरिओम के समय हुई जांच की रिपोर्ट में गाटा संख्या 1002, 736, 737 और 839 को निजी खातेदार के नाम से दर्ज बताया गया था। कुछ के बारे में रिपोर्ट में कहा गया था कि बैनामा कराने के बाद जिन लोगों ने बिना मानचित्र स्वीकृत हुए निर्माण कराया है, प्राधिकरण सुसंगत नियमों के तहत उनके मानचित्र स्वीकृत करे। इनका कहना है कि जिला प्रशासन अब जबरन उन्हें बेदखल करना चाहता है।
डीएम के. विजयेंद्र पांडियन ने कहा कि सुमेर सागर की 22 एकड़ जमीन को कुछ भू-माफियाओं ने अवैध तरीके से कब्जा कर पाट दिया था। मोटी रकम लेकर उन्होंने इसे कई लोगों को बेच भी दिया। वहीं रोड किनारे रह रहे लोग भी अवैध तरीके से काबिज हो गए थे। ताल का सीमांकन कराया जा रहा है। सभी अवैध निर्माण ध्वस्त कराए जाएंगे। काफी जमीन खाली करा ली गई है। इसे फिर से ताल का स्वरूप दिया जाएगा।
ज्वाइंट मजिस्ट्रेट गौरव सिंह सोगरवाल ने कहा कि 10 एकड़ से अधिक जमीन खाली करा ली गई है। तमाम अवैध निर्माण ध्वस्त कराए गए हैं। कुछ लोगों ने जमीन बैनामा कराने का दावा किया था। कुछ रिहायशी मकान भी हैं। जमीन का सीमांकन कराया जा रहा है। तीन दिन में रिपोर्ट आ जाएगी। इसके बाद नोटिस जारी कर रिहायशी मकान भी ध्वस्त कराए जाएंगे।