फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   Pollution changed weather pattern in Gorakhpur

चिंताजनक: प्रदूषण ने बदला मौसम का मिजाज...अपने समय से खिसक गई बारिश-ठंड

Wed, 01 Nov 2023 11:38 AM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 01 Nov 2023 11:38 AM IST
सार

धरती का तापमान बढ़ने के साथ समुद्र का भी तापमान बढ़ रहा है। विकास को लेकर हो रहे निर्माण कार्य, बढ़ते वाहनों की संख्या और कम होती हरियाली के चलते लगातार प्रदूषण बढ़ने से उसका असर प्राकृतिक चक्र पर पड़ रहा है। इसके चलते बारिश और सर्दी के दिनों की अवधि कम हो गई है।

विज्ञापन
Pollution changed weather pattern in Gorakhpur
गोरखपुर मोहद्दीपुर में लगा जाम। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

वायुमंडल में बढ़ रहे प्रदूषण ने मौसम के मिजाज को ही बदल दिया है। वाहनों के जहरीले धुएं, ब्लैक कार्बन और निर्माण कार्यों के चलते उड़ रहे धूल के कण जहां लोगों को बीमार बना रहे हैं, वहीं विशेषज्ञों का दावा है कि प्रदूषण के चलते मौसम चक्र भी बदलता जा रहा है। अक्तूबर और नवंबर में पिछले कुछ सालों से धरती तप रही है, जबकि यह ठंड का मौसम होता है। सर्द मौसम खिसक कर अब मध्य दिसंबर तक पहुंच गया है और इसकी अवधि भी कम हो गई है।

विज्ञापन


गोरखपुर विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग के आचार्य और पर्यावरणविद प्रो. वीके पांडेय ने बताया कि बढ़ती जनसंख्या की डिमांड को पूरा करने के लिए कोयला, डीजल और पेट्रोल की खपत बढ़ी है। इससे निकलने वाली गैस, धुआं में कार्बन कण समेटे है। ऊपर से सूरज की किरण से कार्बन के कण को अवशोषित करने से तापमान बढ़ रहा है।
विज्ञापन


धरती का तापमान बढ़ने के साथ समुद्र का भी तापमान बढ़ रहा है। विकास को लेकर हो रहे निर्माण कार्य, बढ़ते वाहनों की संख्या और कम होती हरियाली के चलते लगातार प्रदूषण बढ़ने से उसका असर प्राकृतिक चक्र पर पड़ रहा है। इसके चलते बारिश और सर्दी के दिनों की अवधि कम हो गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन


इसे भी पढ़ें: दिवाली और छठ: इस माह नौ दिन बंद रहेंगे बैंक...निपटा लीजिए जरूरी काम

प्रदूषण बढ़ने के पीछे स्थानीय कारण भी

गोरखपुर एनवायरमेंटल एक्शन ग्रुप अध्यक्ष डॉ. शिराज अख्तर वजीह ने कहा कि स्थानीय मौसम पर व्यापक स्तर पर ग्लोबल वार्मिंग और स्थानीय कारणों का प्रभाव होता है। व्यापक स्तर पर होने वाले बदलाव वायु की गति, दिशा, वर्षा, नमी और समुद्री स्थितियों आदि को भी प्रभावित करता है।

स्थानीय हरित क्षेत्र, ताल-तलैये, वन आदि भी स्थानीय मौसम में अपना योगदान देते हैं। वर्तमान दिनों में घटती आर्द्रता और तापमान के कारण धूल व प्रदूषण के कणों की एक परत क्षेत्र के ऊपर जमा हो जाती है। इससे तापमान उसके नीचे ही बना रहता है और वायु की सघनता के कारण तापमान थोड़ा अधिक हो जाता है।

इसे भी पढ़ें: राहु-केतु की बदली राशि, गुरु चंडाल योग से मिली मुक्ति; जानिए 12 राशियों पर क्या होगा प्रभाव

एक पत्ता साल में छोड़ता है साढ़े पांच सौ लीटर ऑक्सीजन

गोविवि विभागाध्यक्ष बॉटनी प्रो. अनिल कुमार द्विवेदी ने कहा कि विकास कार्यों के चलते लगातार हो रहे निर्माण कार्य और उनसे उठने वाले धूल के कण भी प्रदूषण में काफी असरदायक हैं। इसके साथ ही सड़क चौड़ीकरण के लिए पेड़ों को काटने से भी प्रदूषण बढ़ रहा है। पेड़ का एक पत्ता साल में साढ़े पांच सौ लीटर ऑक्सीजन छोड़ता है। वहीं उसके पत्ते पर वायुमंडल में उड़ रहे कण चिपक जाते है। लेकिन हरियाली कम होने और प्रदूषण बढ़ने से उसका असर मौसम के चक्रानुक्रम पर भी पड़ा है।

ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में हो रही बढ़ोतरी
गोविवि बायोटेक्नोलॉजी विभाग प्रो. शरद कुमार मिश्रा ने कहा कि वर्तमान समय में वाहनों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि, चौड़ी सड़कों का निर्माण, शहरीकरण के फैलाव से वृक्षों की संख्या में लगातार गिरावट के कारण वायुमंडल का तापमान अपेक्षा से अधिक गर्म है। वैश्विक स्तर पर ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में लगातार बढ़ोतरी से हो रही ग्लोबल वार्मिंग भी अपेक्षाकृत अधिक तापमान के लिए उत्तरदायी है।

इसे भी पढ़ें: पति की हत्यारोपी महिला, प्रेमी के लिए रखेगी करवा चौथ व्रत; जेलकर्मी भी हैरान

गोरखपुर जिले में साल दर साल बढ़ते गए वाहन

वर्ष वाहनों की संख्या
2019 85154
2020 70208
2021 79540
2022 85270
2023 66646 (अबतक)

(आरटीओ के अनुसार)

इसे भी पढ़ें: जयमाल स्टेज पर असलहे के साथ दूल्हा-दुल्हन की फोटो वायरल...पुलिस ने शुरू की जांच

पांच साल में विकास की भेंट चढ़े हजारों पेड़

गोरखपुर व आसपास इलाकों में पिछले कुछ वर्षों में फोरलेन का निर्माण कार्य खूब हो रहा है। इसके चलते करीब 20 हजार पेड़ काट दिए गए हैं। पौधरोपण तो किया जाता है, पर कितने पौधे बच पाते हैं, यह कहना मुश्किल है। इसका सीधा असर पर्यावरण पर पड़ रहा है।

वन विभाग के अनुसार वर्ष 2018 में गोरखपुर-बड़हलगंज मार्ग पर 10448 पेड़ काट दिए गए। गोरखपुर-सोनौली मार्ग पर 1181 पेड़, गोरखपुर-महराजगंज मार्ग पर 8392 पेड़, गोरखपुर-देवरिया मार्ग पर 3140 पेड़, शहर के मोहद्दीपुर से लेकर जंगल कौड़िया तक 1,507 पेड़ों का कटान किया गया है।

इसे भी पढ़ें: दारू के लिए रुपये नहीं दिए तो पिता को पीटा, केस दर्ज

डीएफओ विकास यादव ने बताया कि जिले में वन विभाग ने पिछले पांच वर्षों में 6835 हेक्टेयर भूमि पर 72.06 लाख पौधे, जबकि वन विभाग सहित 27 विभागों ने मिलकर 2.15 करोड़ पौधे लगाए हैं। उन्होंने बताया कि फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, 2015 के 76 वर्ग किलोमीटर की तुलना में जिले में जंगल कवर के रूप में कुल क्षेत्रफल 79 वर्ग किलोमीटर बढ़ गया है। अभी भी गोरखपुर का वन आवरण 79 वर्ग किमी है।

नाक, कान व गला रोग विशेषज्ञ डॉ. अर्पित श्रीवास्तव ने कहा कि वायु प्रदूषण के चलते नाक में एलर्जी के मरीज बढ़े हैं। सर्दी-जुकाम के मरीज नियमित आ रहे हैं। इसके अलावा शोरगुल के चलते कान के मरीजों की संख्या भी बढ़ी है। इसलिए प्रदूषण वाले इलाके में जाएं तो मास्क जरूर पहनें। शोरगुल से बचें, अन्यथा अन्य बीमारियों की भी चपेट में आ जाएंगे।



 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed