गोरखपुर: बुजुर्ग का पुलिस ने दर्ज किया बयान, कल भेज दी जाएगी रिपोर्ट
डीएम से फरियाद के बाद मांगी गई थी पुलिस से रिपोर्ट, एसएसपी ने मामले की मॉनिटरिंग शुरू की तो हरकत में आ गई पुलिस।
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गोरखपुर में घर से बड़े बेटा द्वारा निकाले जाने के मामले में मंगलवार को पुलिस ने बुजुर्ग हरिशंकर सिंह का बयान दर्ज कर लिया। पुलिस ने बड़े बेटे सुनील सिंह से भी बातचीत कर उसका पक्ष जाना है। खबर है कि पुलिस ने इस प्रकरण में 27 जनवरी तक रिपोर्ट डीएम दफ्तर भेजने को कहा है। इस पूरे मामले में महज रिपोर्ट लगवाने के लिए भी पीड़ित को कई बार थाने का चक्कर काटना पड़ा था। अब एसएसपी ने जब मानीटरिंग शुरू की तो हरकत में आई पुलिस ने तेजी से जांच की है।
जानकारी के मुताबिक, पूर्वांचल ग्रामीण बैंक के मैनेजर पद से रिटायर्ड हरिशंकर सिंह का आरोप है कि उनके बड़े बेटे ने उन्हें घर से निकाल दिया है। इसी के बाद कई प्रार्थना पत्र दिए, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। बाद में डीएम के यहां पर उन्होंने 145 (विवादित संपत्ति को जब्त करना) के तहत डीएम के यहां पर प्रार्थना पत्र दिया था।
वहां से रामगढ़ताल पुलिस से रिपोर्ट मांगी गई थी, लेकिन रिपोर्ट नहीं लग पाई थी। अब पुलिस ने इस मामले में रिपोर्ट भेजने की बात कही है। इंस्पेक्टर ने प्रकरण की जांच चौकी इंचार्ज आजाद चौक विशाल को सौंपी है। विशाल ने बताया कि पीड़ित बुजुर्ग का बयान दर्ज किया गया है। रिपोर्ट एक दरोगा के पास पेडिंग है, उसे भेजा जाएगा। 27 जनवरी तक रिपोर्ट चली जाएगी।
बहकावे में आ गए है पिता जी
बड़े बेटे सुनील सिंह ने एक बार फिर छोटे भाई अजय पर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि छोटे भाई के बहकावे में आकर वह यह सब कर रहे हैं। उनका मकान है, मैंने कभी उन्हें नहीं रोका है। पुलिस प्रशासन इसकी जांच करें तो खुद ही सच्चाई सामने आ जाएगी।
यह है मामला
हरिशंकर सिंह ने अपने और पत्नी के नाम पर भरवलिया में जमीन खरीदी थी। 1999 में पत्नी की मौत हो गई। इसके बाद मकान बनकर तैयार हुआ। 1999-2000 के बीच वह मकान में परिवार के साथ रहने लगे थे। आरोप है कि 4 मई 2021 को बड़े बेटे सुनील सिंह ने जबरन उनके खाते से रुपये निकाल लिया। इसके बाद उन्हें अपने ही घर में बंधक बना दिया। इसकी जानकारी जब बेटी को हुई तो उसने छोटे भाई अजय प्रताप सिंह, जो गुरुग्राम में एक प्राइवेट कंपनी में कार्यरत है को सूचना दी। छोटा बेटा आया और जब बड़े भाई से प्रताड़ना की वजह पूछा तो वह मारपीट पर उतारू हो गया। इसके बाद अजय पिता को लेकर पहले रिश्तेदार और फिर सहारा स्टेट में किराए का कमरा लेकर रहने लगे। इस दौरान कई बार रामगढ़ताल थाने पर प्रार्थना पत्र दिए, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए डीएम से मिले तो सात मई 2021 को पुलिस ने धमकी देने का केस दर्ज किया। इसमें भी आगे कार्रवाई नहीं हुई है।