फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   Police eye on it servant of Gorakhnath temple change his dress and name

Ram Mandir: पुलिस की थी नजर, गोरखनाथ मंदिर के सेवक को बदलनी पड़ी वेशभूषा और नाम

Mon, 22 Jan 2024 01:00 PM IST
vivek shukla टीपी शाही, गोरखपुर।
टीपी शाही, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 22 Jan 2024 01:00 PM IST
सार

द्वारिका तिवारी ने बताया कि झारखंड के रहने वाले करीब 50 की संख्या में आदिवासी कारसेवक भी मंदिर आ गए। वह अयोध्या जा रहे थे, लेकिन उन्हें गोरखपुर में रोक लिया गया। वे लोग मंदिर आए। उनके हाथ में तीर-कमान था। रात को वह मंदिर में रुके। सुबह उनमें से एक कारसेवक जो धनुष लिया था, उसने कारसेवकों को करतब दिखाया।

विज्ञापन
Police eye on it servant of Gorakhnath temple change his dress and name
गोरखनाथ मंदिर। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

राम जन्मभूमि आंदोलन में गोरक्षपीठाधीश्वर के साथ ही गोरखनाथ मंदिर की व्यवस्था देखने वालों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उस समय गोरखनाथ मंदिर इस आंदोलन का प्रमुख केंद्र था। मंदिर में आने-जाने वालों पर पुलिस की नजर रहती थी। इस बीच मंदिर के सेवक सचिव द्वारिका तिवारी ने न सिर्फ मंदिर में आने वाले रामभक्तों की व्यवस्था की, बल्कि पुलिस से बचने के लिए उन्हें अपना वेशभूषा भी बदलनी पड़ी। वह नाम भी बदलकर संदेश भेजते थे। पुलिस से बचने के लिए वह आठ दिनों तक अंडरग्राउंड रहे।

विज्ञापन


द्वारिका तिवारी बताते हैं-1990 में जब विहिप ने कारसेवा का ऐलान किया तो असम, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल से लोग कारसेवा के लिए अयोध्या जाने के लिए निकले, लेकिन गोरखपुर पहुंचने पर उन्हें यहीं रोक दिया जाता था। वे लोग ठौर की तलाश में गोरखनाथ मंदिर आते थे। उनके रहने और भोजन का इंतजाम करना पड़ता था। मंदिर में दिन-रात भंडारा चलता था। ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ उस समय अयोध्या में थे। इस नाते सारी जिम्मेदारी मुझे ही करनी थी।
विज्ञापन


उन्होंने बताया-पुलिस की निगाह मुझ पर थी और तलाश भी रही थी। इसलिए मैंने अपना नाम द्वारिका से बदलकर दिवाकर रख लिया था। जहां संदेश भेजते थे, वहां दिवाकर नाम से ही जाता था। लोग समझ जाते थे कि द्वारिका तिवारी ने संदेश भेजा है। इस तरह से आठ दिनों तक अंडरग्राउंड होकर काम किया।
विज्ञापन
विज्ञापन


इसे भी पढ़ें: गोरखपुर विश्वविद्यालय में 'अयोध्या अध्ययन केंद्र' की होगी स्थापना

झारखंड से आए थे आदिवासी कारसेवक
द्वारिका तिवारी ने बताया कि झारखंड के रहने वाले करीब 50 की संख्या में आदिवासी कारसेवक भी मंदिर आ गए। वह अयोध्या जा रहे थे, लेकिन उन्हें गोरखपुर में रोक लिया गया। वे लोग मंदिर आए। उनके हाथ में तीर-कमान था। रात को वह मंदिर में रुके। सुबह उनमें से एक कारसेवक जो धनुष लिया था, उसने कारसेवकों को करतब दिखाया। फिर उन कारसेवकों को वह स्टेशन छोड़ने गए। ट्रेन से वापस झारखंड चले गए।

इसे भी पढ़ें: भामाशाह बन गए थे गोरक्षनगरी के व्यापारी, खोल दिया था खजाना

जब ढांचा गिरा तो मंदिर में गूंजा जयश्रीराम का जयकारा
द्वारिका तिवारी ने बताया-1992 में प्रदेश में भाजपा की सरकार थी। कल्याण सिंह प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। वह उस समय भी मंदिर में ही थे। अयोध्या की एक -एक गतिविधियों पर नजर थी। महंत अवेद्यनाथ अयोध्या में ही जमे हुए थे। कारसेवकों को अयोध्या जाने पर रोक नहीं होने के कारण लाखों कारसेवक अयोध्या पहुंच गए। 6 दिसंबर को कारसेवकों ने विवादित ढांचा गिरा दिया। यह सूचना मिलते ही मंदिर में जयकारा गूंजने लगा। जय श्रीराम के उद्घोष से पूरा परिसर गुंजायमान हो गया। शाम होते ही कल्याण सिंह के इस्तीफे की खबर आते ही पूरा नजारा बदल गया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed