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सिपाही के सहयोगी खालिद व अनवर की तलाश में जुटी पुलिस

Sat, 26 Dec 2020 01:20 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 26 Dec 2020 01:20 AM IST
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Police engaged in search of soldiers Khalid and Anwar
सिपाही के सहयोगी खालिद व अनवर की तलाश में जुटी पुलिस
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गोरखपुर। गोवंश तस्करी के आरोप में गिरफ्तार देवरिया के सलेमपुर थाने में तैनात सिपाही व गाजीपुर के डेहमा कुसमा निवासी रामानंद यादव को पुलिस ने शुक्रवार को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया। सिपाही के जेल जाने के बाद एसटीएफ व चौरीचौरा पुलिस अब उसके सहयोगी बलिया के मोहम्मद खालिद उर्फ रिंकू और देवरिया के कंचनपुर गांव के पूर्व प्रधान अनवर की तलाश में जुट गई है। इनकी तलाश में एक टीम बलिया और दूसरी देवरिया गई है।
वहीं, इससे पिछले सप्ताह एसटीएफ द्वारा खोराबार व कुशीनगर के हाटा में पकड़े गए गो तस्करों से पूछताछ के आधार पर गिरोह के सरगना इश्तहाख की तलाश तेज कर दी गई है। एक टीम जानकारी जुटाने के लिए लखनऊ गई हुई है। सूत्रों के अनुसार, फरार तस्करों की गिरफ्तारी के बाद पशुओं की तस्करी में कुछ और पुलिसकर्मियों के नाम सामने आ सकते हैं।
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जानकारी के अनुसार, एसटीएफ गोरखपुर इकाई की टीम पिछले एक सप्ताह से गो तस्करी के नेटवर्क को तोड़ने में जुटी है। एक सप्ताह में उसने कुशीनगर के हाटा, गोरखपुर के खोराबार व चौरीचौरा इलाके से 14 तस्करों को गिरफ्तार कर 194 गोवंश को मुुक्त कराया। खोराबार व कुशीनगर के हाटा की कार्रवाई में सरगना के रूप में इश्तहाख का नाम सामने आया था, जोकि लखनऊ में रहता है। वहीं चौरीचौरा की गिरफ्तारी के बाद सामने आया कि सरगना गाजीपुर के डेमुसा कुसमा निवासी सिपाही रामानंद यादव है। उसका भी एक ट्रक कार्रवाई में पकड़ा गया था।
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उसके काम में बलिया निवासी मोहम्मद खालिद उर्फ रिंकू पार्टनर था। इस काम में देवरिया के कंचनपुर गांव का पूर्व प्रधान अनवर भी साथ देता था। खालिद ट्रक को महंगे रेट पर किराए पर लेता था और तस्करी करता था। वहीं, सिपाही अपने ट्रक से तस्करी कराता था। सिपाही रामानंद व अनवर रास्ते पर पड़ने वाले चेक पोस्ट पर गाड़ियों को निकलवाते थे। बृहस्पतिवार को पुलिस ने सिपाही रामानंद को गिरफ्तार किया था। एसटीएफ व पुलिस का मानना है कि खालिद, अनवर व इश्तहाख के पकड़े जाने पर कुछ और पुलिसकर्मियों के नाम सामने आ सकते हैं।
तबादले के बाद भी सरकारी आवास में रहता है परिवार
पुलिस सूत्रों के अनुसार, रामानंद खोराबार थाने में वर्ष 2010 से पहले सिपाही पद पर तैनात था। बाद में उसका देवरिया में तबादला हो गया। वहां प्रमोशन पाकर हेड कांस्टेबल बन गया। वह अक्सर गोरखपुर डाक लेने आता था और खोराबार थाने के सरकारी आवास में रह रहे अपने परिवार से मिलता था। उधर, उसकी गिरफ्तारी व परिवार के सरकारी आवास में रहने पर भी सवाल उठ रहे हैं। चर्चा है कि गैर जनपद तबादला होने के बाद भी इतने दिनों तक परिवार थाने के सरकारी आवास में कैसे रह रहा था? जबकि थाने में वर्तमान समय में तैनात कई पुरुष व महिला पुलिसकर्मी आवास न होने के कारण किराए पर मकान लेकर रह रहे हैं।
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गोला थाने के दरोगा की तलाश में पुलिस गाजीपुर गई
गोरखपुर। गोला पुलिस दरोगा विवेक चतुर्वेदी की तलाश में जुट गई है। दरोगा की तलाश में एक टीम उसके गांव गाजीपुर के गोविंदपुर गई है।
जानकारी के अनुसार, गोला थाने में तैनात दरोगा विवेक चतुर्वेदी पर झरकटा निवासी फुलवारी देवी ने केस दर्ज करने के लिए रुपये मांगने का आरोप लगाया था। उसने एसएसपी को बातचीत की वाइस रिकॉर्डिंग भी दी थी।

आरोप है कि 23 अक्तूबर को एक शख्स से हुए विवाद में दरोगा ने केस दर्ज करने के लिए महिला से रुपये मांगे थे। बीस हजार रुपये महिला ने दिए थे। पांच हजार रुपये बाकी थे। इस बारे में दरोगा ने मोबाइल फोन से बातचीत की थी। रुपये नहीं देने पर दरोगा ने दूसरे पक्ष की तहरीर पर 27 अक्तूबर को महिला के परिवार वालों पर केस दर्ज कर लिया था। साथ ही विवेचना में नाम निकालने के लिए भी रुपये मांग रहे थे। एसएसपी ने सीओ से जांच कराई तो आरोप सही मिला। जिसके बाद एसएसपी के निर्देश पर गोला थाने के दरोगा गाजीपुर के मदरह थाने के गोविंदपुर निवासी विवेक चतुर्वेदी के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप में केस दर्ज हुआ था। अपने ही थाने में केस दर्ज होता देख दरोगा फरार हो गया। देर रात एसएसपी ने दरोगा को निलंबित कर दिया था। अब उसकी तलाश में एक टीम गाजीपुर रवाना हुई है।
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