कोरोना संकट के बीच जरूर करें ये काम, भविष्य में परिवार को नहीं झेलनी होगी परेशानी, जानें कैसे
किसी व्यक्ति के जीवन का केंद्र बिंदु उसका परिवार ही होता है। उसकी हरेक गतिविधि परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए होती है। परिवार का भविष्य सुरक्षित हो, इसके लिए ही वह बैंक बैलेंस बनाता है, बीमा कराता है। इसके अलावा भी कई अन्य माध्यमों में अर्थ का निवेश करता है।
ऐसे में जब कोरोना महामारी की वजह से हर कोई डरा सहमा है, यह जरूरी है कि उन सारी औपचारिकताओं को अवश्य पूरा करें जिसके लिए आप सारी चीजें कर रहे हैं। ताकि किसी भी अनहोनी की स्थिति में उन्हें परेशानी न झेलनी पड़े।
इसलिए जरूरी है कि की जब भी हम बैंक में सेविंग्स अकाउंट खोलें, म्यूचुअल फंड में इन्वेस्ट करें, प्रॉपर्टी या शेयर्स खरीदे या फिर बीमा करवाएं तो निश्चित तौर पर 'नॉमिनी' जरूर बनाएं। लेकिन ज्यादातर लोगों को इस बात की गलतफहमी है कि उनकी मृत्यु के बाद सारी रकम नॉमिनी को मिल जाएगी, जबकि ऐसा नहीं है।
नॉमिनी सिर्फ आपके पैसों का केयरटेकर होता है, न कि मालिक। ऐसे में जानना जरूरी है कि नॉमिनी और उसके अधिकार क्या हैं। इस संबंध में भारतीय जीवन बीमा निगम के विकास अधिकारी भारत भूषण शाही ने अमर उजाला को विस्तार से जानकारी दी।
सिर्फ केयर टेकर होता है नॉमिनी
कानूनन नॉमिनी वह व्यक्ति है, जो आपकी मृत्यु के बाद बैंक, कंपनी से मिली रकम को आपके कानूनी वारिसों तक पहुंचाता है। वह कानूनन उस रकम का मालिक नहीं होता, सिर्फ एक ट्रस्ट होता है। हालांकि कुछ स्थितियों में नॉमिनी के अधिकार अलग-अलग निर्धारित हैं। इनको जानना भी बहुत जरूरी है।
जैसे, अगर आपका खाता ज्वाइंट है या फिर आपने वसीयत बनाई है तो वसीयत के मुताबिक आपकी सारी जमापूंजी आपके कानूनी वारिसों में बांट दी जाएगी। लेकिन अगर आपने अपने कानूनी वारिस को ही नॉमिनी बनाया है, तो उसके लिए चीजें आसान हो जाती हैं।
अब मान लीजिए कि आपने अपनी पत्नी को सब जगह नॉमिनी बनाया है और वह ही आपकी कानूनी वारिस भी है पर आपकी मृत्यु के बाद सब कुछ पत्नी को ही नहीं मिलेगा, आपकी जमापूंजी पत्नी और बच्चों में बराबर बंटेगी, लेकिन अगर आपने वसीयत में पत्नी और बच्चों के हिस्से का प्रतिशत निर्धारित कर दिया है तो दोनों एक-दूसरे के हिस्से पर क्लेम नहीं कर सकेंगे।
किसी न किसी को जरूर बनाएं नॉमिनी
इन निवेशों में आप बना सकते हैं नॉमिनी
जीवन बीमा: पॉलिसी होल्डर अपने माता/पिता, पति/पत्नी या फिर बच्चों को नॉमिनी बनाते हैं, तो वो अपने आप बेनीफीशियल नॉमिनी बन जाते हैं। इसलिए जीवन बीमा में हमेशा अपने कानूनी वारिस को ही नॉमिनी बनाएं। इसमें आप एक से ज्यादा नॉमिनी बना सकते हैं। बीमा में अधिकतम चार नॉमिनी बनाए जा सकते हैं।
बैंक अकाउंट: बैंक डिपॉजिट अकाउंट या फिर लॉकर अकाउंट के लिए भी निश्चित तौर पर नॉमिनी बनाना चाहिए। यहां आप किसी एक व्यक्ति को ही नॉमिनी बना सकते हैं। अगर ज्वाइंट अकाउंट हो तो दूसरे होल्डर को उक्त राशि मिलेगी और दोनों के न रहने पर नॉमिनी को।
फिक्स्ड डिपॉजिट: एफडी में निवेश करते समय भी आपको किसी को नॉमिनी बनाना पड़ता है। यहां भी केवल किसी एक व्यक्ति को ही नॉमिनी बनाया जा सकता है।
डीमैट अकाउंट: शेयर्स और सिक्योरिटीज के इन्वेस्टमेंट डीमैट अकाउंट के जरिए किए जाते हैं। इसके लिए आप मल्टीपल नॉमिनी नियुक्त कर सकते हैं। यहां नॉमिनी सिर्फ केयरटेकर नहीं, बल्कि मालिक होता है। उसे कानूनी वारिस को शेयर्स ट्रांसफर नहीं करने होते।
म्यूचुअल फंड: यहां आप तीन लोगों को अपना नॉमिनी बना सकते हैं। आप चाहें तो उनके लिए शेयर्स भी बांट सकते हैं। उदाहरण के लिए आप अपनी पत्नी और दो बच्चों को नॉमिनी बना सकते हैं। पत्नी को 50% और बच्चों को 25-25% शेयर्स दे सकते हैं।
प्रॉपर्टी: प्रॉपर्टी के मामले में वसीयत और सक्सेशन लॉ काम करते हैं, नॉमिनी की कोई खास भूमिका नहीं होती। लेकिन अगर आप किसी कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी में रहते हैं, तो आपको नॉमिनी नियुक्त करना जरूरी होता है, क्योंकि सोसाइटी में आप किसी एक फ्लैट में रहते हैं, जो एक बड़ी यूनिट है, इसलिए यहां नॉमिनी बनाना जरूरी हो जाता है।