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गोरखपुर: कोरोना के 10105 सैंपल लंबित होने पर पैथवर्ड डायग्नोस्टिक का लाइसेंस निरस्त
Sat, 22 May 2021 02:25 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sat, 22 May 2021 02:25 PM IST
सार
दबाव बढ़ा तो 1200 पॉजिटिव केस पोर्टल पर किए अपलोड, जांच के लिए कमेटी गठित
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कोरोना वायरस।
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
गोरखपुर में कोरोना मरीजों के 10105 सैंपल लंबित होने पर बेतियाहाता स्थित पैथवर्ड डायग्नोस्टिक का लाइसेंस निलंबित कर दिया गया है। यह लैब रीयल टाइम पालमरेज चेन रियेक्शन (आरटीपीसीआर) जांच नहीं कर पाएगी। इस बीच प्रशासन का दबाव बढ़ा तो लैब ने 1200 कोरोना पॉजिटिव मरीज की रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड कर दी। इससे प्रशासन के साथ ही शासन सकते में आ गया। मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई है। जवाब भी मांगा गया है।
जानकारी के मुताबिक, शासन स्तर से हुई समीक्षा में गत बृहस्पतिवार को जानकारी मिली कि प्रदेश में लगभग 26500 मरीजों की कोरोना जांच लंबित है। इनमें से 10 हजार से अधिक जांच पैथवर्ड डायग्नोस्टिक सेंटर में लंबित है। शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पैथोलॉजी की जांच की तो मामला सही मिला।
इसके बाद पैथवर्ड की आरटीपीआर जांच का लाइसेंस निरस्त किया गया। पैथवर्ड की ओर से 16 अप्रैल से ही जांच रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड नहीं की गई थी। मामला पकड़े जाने पर पैथोलॉजी ने एक दिन में 1200 से अधिक पॉजिटिव रिपोर्ट अपलोड कर दी। जांच में पता चला कि सभी रिपोर्ट पुरानी हैं।
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सीएमओ डॉ सुधाकर पांडेय ने बताया कि कोराना जांच की अनुमति जिन लैब को दी गई है, उन्हें एंटीजन जांच तुरंत और आरटीपीसीआर जांच 48 घंटे में पोर्टल पर अपलोड करनी होती है। मामले में लैब प्रबंधन का पक्ष मिलते ही प्रकाशित किया जाएगा।
सीएमओ डॉ. सुधाकर पांडेय ने कहा कि पैथवर्ड डायग्नोस्टिक की आरटीपीसीआर जांच का लाइसेंस निरस्त किया गया है। जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनी है। कमेटी जो रिपोर्ट देगी उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
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जानकारी के मुताबिक, शासन स्तर से हुई समीक्षा में गत बृहस्पतिवार को जानकारी मिली कि प्रदेश में लगभग 26500 मरीजों की कोरोना जांच लंबित है। इनमें से 10 हजार से अधिक जांच पैथवर्ड डायग्नोस्टिक सेंटर में लंबित है। शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पैथोलॉजी की जांच की तो मामला सही मिला।
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इसके बाद पैथवर्ड की आरटीपीआर जांच का लाइसेंस निरस्त किया गया। पैथवर्ड की ओर से 16 अप्रैल से ही जांच रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड नहीं की गई थी। मामला पकड़े जाने पर पैथोलॉजी ने एक दिन में 1200 से अधिक पॉजिटिव रिपोर्ट अपलोड कर दी। जांच में पता चला कि सभी रिपोर्ट पुरानी हैं।
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सीएमओ डॉ सुधाकर पांडेय ने बताया कि कोराना जांच की अनुमति जिन लैब को दी गई है, उन्हें एंटीजन जांच तुरंत और आरटीपीसीआर जांच 48 घंटे में पोर्टल पर अपलोड करनी होती है। मामले में लैब प्रबंधन का पक्ष मिलते ही प्रकाशित किया जाएगा।
सीएमओ डॉ. सुधाकर पांडेय ने कहा कि पैथवर्ड डायग्नोस्टिक की आरटीपीसीआर जांच का लाइसेंस निरस्त किया गया है। जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनी है। कमेटी जो रिपोर्ट देगी उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।