गोरखपुर विश्वविद्यालय: मरीज नहीं, एंबुलेंस से भेज रहे हैं पेपर
विश्वविद्यालय मीडिया सेल के हवाले से आई प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश के अधिकांश विश्विद्यालयों में नोडल सेंटर्स के माध्यम से परीक्षा प्रश्न पत्रों को भेज कर ही परीक्षा सुनिश्चित कराई जाती है। सीबीसीएस सेमेस्टर प्रणाली का क्रियान्वयन की वजह से परीक्षाओं की संख्या बढ़ गयी है, इससे विश्वविद्यालय के ऊपर वित्तीय भार बढ़ गया है।
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दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में अब एंबुलेंस से पेपर व कॉपियां भेजी जा रही हैं। प्रशासनिक भवन पर दो एंबुलेंस लगाए गए हैं। ऐसे में अगर किसी छात्र, शिक्षक व कर्मचारी की तबीयत बिगड़ती है तो फौरन उसे अस्पताल ले जाना आसान नहीं होगा। बृहस्पतिवार को विश्वविद्यालय परिसर में नई व्यवस्था की चर्चा पूरे दिन रही।
दोपहर में प्रशासनिक भवन स्थित स्ट्रांग रूम से कॉपी, पेपर भेजने के लिए दो एंबुलेंस के अलावा तीन बोलेरो, एक डीसीएम और एक बस लगाई गई थी। रोजाना नोडल केंद्रों तक शाम तक सभी पेपर पहुंचा दिए जा रहे हैं। वहां से महाविद्यालयों को शाम को ही पेपर रिसीव करना है। दरअसल, गोरखपुर विश्वविद्यालय इस समय आर्थिक तंगी से जूझ रहा है। राज्य सरकार से मिलने वाले अनुदान की राशि भी पूरी नहीं मिल पाई है।
ऐसे में अब विश्वविद्यालय ने खर्च में कटौती कम करने की योजना बनाई है। लेकिन, इस बार परीक्षा में पेपर और कापियों को भी भेजने में विश्वविद्यालय की गाड़ियों के साथ एंबुलेंस को भी लगा दिया गया है।
ट्रेवल्स एजेंसी ने बिना भुगतान गाड़ी भेजने से मना कर दिया है। एजेंसी का करीब 35 लाख रुपये बकाया है। इस संबंध में परीक्षा नियंत्रक से बातचीत करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। जब भी उनका पक्ष आएगा प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
पांच महीने पहले छात्रा बेहोश हुई तो नहीं मिला था एंबुलेंस
26 नवंबर 2021 को विवि परिसर स्थित खेल मैदान में ही स्नातक तृतीय वर्ष की एक छात्रा अचानक बेहोश हो गई थी। तत्कालीन नगर विधायक डॉ. आरएमडी अग्रवाल ने अपनी गाड़ी से उसे अस्पताल पहुंचाया था। उस समय एंबुलेंस परिसर में नहीं बल्कि, एक वीआईपी के आवास पर खड़ी थी। मामला गरमाया तो विवि प्रशासन ने यह व्यवस्था शुरू की कि अब प्रत्येक कार्य दिवस पर सुबह से शाम तक एंबुलेंस मुख्य नियंता कार्यालय के बाहर खड़ी रहेगी, चालक भी मौजूद रहेगा।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने रखा पक्ष
वार्षिक परीक्षा में व्यवस्था बदलकर प्रश्नपत्रों को नोडल केंद्र पर पहुंचाने के मामले में विवि प्रशासन ने अपना पक्ष रखा है। विश्वविद्यालय मीडिया सेल के हवाले से आई प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश के अधिकांश विश्विद्यालयों में नोडल सेंटर्स के माध्यम से परीक्षा प्रश्न पत्रों को भेज कर ही परीक्षा सुनिश्चित कराई जाती है। सीबीसीएस सेमेस्टर प्रणाली का क्रियान्वयन की वजह से परीक्षाओं की संख्या बढ़ गयी है, इससे विश्वविद्यालय के ऊपर वित्तीय भार बढ़ गया है।
इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए तथा अन्य विश्विद्यालयों का अनुकरण करते हुए दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय ने भी नोडल सेंटर्स की व्यवस्था कर प्रश्न पत्रों के वितरण की व्यवस्था को अपनाया है। विश्विद्यालय से चिन्हित ट्रेवल एजेंसी का अनुबंध समाप्त हो गया है। नई एजेंसी के चयन के लिए ई-टेंडरिंग किया गया है। नई एजेंसी के चयन होने तक परीक्षा प्रश्न पत्रों को नोडल सेंटर्स तक पहुचाने के लिए विश्विद्यालय की गाड़ियों का इस्तेमाल किया गया है। हालांकि, इसमें एंबुलेंस से कॉपी-पेपर भेजने पर कोई चर्चा नहीं की गई है।