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पंचायत चुनाव आरक्षण आपत्ति: लोगों ने कहा- साहब! लगातार तीसरी बार भी कैसे आरक्षित हो गया प्रधान पद
Sat, 06 Mar 2021 03:58 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sat, 06 Mar 2021 03:58 PM IST
सार
- 68 आपत्तियां आईं, दो दिन में संख्या पहुंची 83
- ज्यादातर आपत्तियां प्रधान पद को लेकर आ रहीं, आठ मार्च तक मिलेगा मौका
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पंचायत चुनाव।
- फोटो : amar ujala
विस्तार
गोरखपुर में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के मद्देनजर जिला पंचायत वार्ड, क्षेत्र पंचायत वार्ड, ग्राम पंचायत वार्ड एवं ग्राम पंचायत प्रधान पदों के लिए आरक्षण आवंटन जारी होने के बाद दो दिन में कुल 83 आपत्तियां आ चुकी हैं। दूसरे दिन शुक्रवार को सर्वाधिक 68 आपत्तियां आईं। पहले दिन 15 लोगों ने आपत्ति दर्ज कराई थी। ज्यादातर आपत्तियां प्रधान पद को लेकर हैं। इनमें इस बात पर ज्यादा एतराज जताया जा रहा है कि कई गांवों के प्रधान पद लगातार तीसरी बार भी आरक्षित कर दिए गए हैं। आठ मार्च तक आपत्तियां दर्ज कराई जा सकती हैं। नौ मार्च को आपत्तियों का संकलन होगा और 10, 11 व 12 को इनका निस्तारण किया जाएगा।
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जिला पंचायत राज अधिकारी के कार्यालय में दो दिनों के भीतर 24 आपत्तियां आई हैं। वहां सबसे ज्यादा जिला पंचायत वार्ड के आरक्षण से जुड़ी आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। वहीं प्रधान पद के लिए अलग-अलग ब्लॉकों पर 59 लोगों ने लिखित आपत्ति की है। कौड़ीराम में तीन, बेलघाट में दो, पिपराइच में एक, गगहा में छह, ब्रह्मपुर में 11, खोराबार में तीन, भटहट में 10, चरगांवा में सात, सरदारनगर में सात व उरुवां में नौ आपत्तियां मिली हैं। ज्यादातर आपत्तियों में आबादी का हवाला दिया गया है।
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आपत्ति करने वालों का कहना है कि उनके यहां जिस वर्ग की आबादी कम है, उसी के लिए सीट आरक्षित हो गई है। तीन बार लगातार प्रधान पत्र आरक्षित करने पर आपत्ति की गई है तो गांव में सवर्ण की आबादी न होने के बावजूद अनारक्षित करने पर भी सवाल उठाए गए हैं। झंगहा क्षेत्र के जिला पंचायत वार्ड 63 को लेकर आयी आपत्ति में तर्क दिया गया है कि पिछली बार यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी और इस बार भी उसी वर्ग के लिए आरक्षित कर दिया गया है। दावा किया गया है कि यह सीट अनारक्षित या अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित होनी चाहिए थी।
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निस्तारण के समय बताएंगे किस आधार पर तय हुआ आरक्षण
दो दिनों के भीतर 83 आपत्तियां प्राप्त हो चुकी हैं। सभी आपत्तियों को प्राप्त करने के बाद रजिस्टर पर दर्ज किया जा रहा है। सभी को रिसीविंग भी दी जा रही है। नौ मार्च से नियमानुसार निस्तारण किया जाएगा। इस दौरान आपत्ति करने वालों को भी बुलाया जाएगा।
डीपीआरओ हिमांशु शेखर ठाकुर का कहना है कि आरक्षण, शासन द्वारा तय नियमों के आधार पर ही हुआ है। आपत्तियों के निस्तारण के समय आवेदन करने वालों को भी बुलाया जाएगा। उनके सामने अवरोही क्रम की सूची भी दिखाई जाएगी। यदि कोई आपत्तिकर्ता कंप्यूटर पर पूरा विवरण देखना चाहेगा तो उसे वह भी दिखाया जाएगा। डीपीआरओ ने कहा कि हर आपत्तिकर्ता को पूरी तरह संतुष्ट किया जाएगा।
अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों पर हो चुनाव: नायक
नायक जनसेवा संस्थान के अध्यक्ष विजय नायक एवं महामंत्री योगेंद्र प्रसाद नायक ने शुक्रवार को गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेसक्लब में पत्रकारों से बातचीत की। कहा कि अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित छह सीटों पर चुनाव को लेकर कोई संशय नहीं होना चाहिए। इन गांवों में इस वर्ग के लोग हैं और वहां चुनाव कराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि 2011 की जनगणना के अनुसार जिले में 18172 लोग अनुसूचित जनजाति के हैं।
दावा किया कि 2015 में जिले की छह ग्राम पंचायतों में इस वर्ग के लोग चुनाव लड़कर विजयी हुए थे। इस बार भी छह गांवों में प्रधान पद इस वर्ग के लिए आरक्षित हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब 2015 में अपने जाति प्रमाण पत्र के साथ लोग गांव में निवास करते थे तो पांच साल में विलुप्त कैसे हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा आरक्षण का लाभ वैधानिक एवं संवैधानिक रूप से दिया गया है, इससे वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
डीपीआरओ हिमांशु शेखर ठाकुर का कहना है कि आरक्षण, शासन द्वारा तय नियमों के आधार पर ही हुआ है। आपत्तियों के निस्तारण के समय आवेदन करने वालों को भी बुलाया जाएगा। उनके सामने अवरोही क्रम की सूची भी दिखाई जाएगी। यदि कोई आपत्तिकर्ता कंप्यूटर पर पूरा विवरण देखना चाहेगा तो उसे वह भी दिखाया जाएगा। डीपीआरओ ने कहा कि हर आपत्तिकर्ता को पूरी तरह संतुष्ट किया जाएगा।
अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों पर हो चुनाव: नायक
नायक जनसेवा संस्थान के अध्यक्ष विजय नायक एवं महामंत्री योगेंद्र प्रसाद नायक ने शुक्रवार को गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेसक्लब में पत्रकारों से बातचीत की। कहा कि अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित छह सीटों पर चुनाव को लेकर कोई संशय नहीं होना चाहिए। इन गांवों में इस वर्ग के लोग हैं और वहां चुनाव कराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि 2011 की जनगणना के अनुसार जिले में 18172 लोग अनुसूचित जनजाति के हैं।
दावा किया कि 2015 में जिले की छह ग्राम पंचायतों में इस वर्ग के लोग चुनाव लड़कर विजयी हुए थे। इस बार भी छह गांवों में प्रधान पद इस वर्ग के लिए आरक्षित हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब 2015 में अपने जाति प्रमाण पत्र के साथ लोग गांव में निवास करते थे तो पांच साल में विलुप्त कैसे हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा आरक्षण का लाभ वैधानिक एवं संवैधानिक रूप से दिया गया है, इससे वंचित नहीं किया जाना चाहिए।