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मुश्किल से कटा सफर: पूर्व मंत्री की रिहाई का जब आदेश आया, लखनऊ में था पूरा परिवार

Sat, 26 Aug 2023 10:49 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sat, 26 Aug 2023 10:49 AM IST
सार

शाम को 5 बजकर 29 मिनट पर जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय से रिहाई का आदेश लेकर पूर्व विधायक अमनमणि त्रिपाठी और उनके लोग मंडलीय कारागार पहुंचे। बेटे के साथ उनके अधिवक्ता रिहाई का कागज लेकर जेल के अंदर पहुंचे। कागज प्रस्तुत करने के बाद जेल में कैदियों के निरूद्ध वाली डायरी में रिहाई के नाम पते का मिलान करवाया गया।

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order came for release of Former Minister Amarmani Tripathi whole family was in Lucknow
अमनमणि त्रिपाठी अपनी बहन के साथ। (फाइल) - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी और उनकी पत्नी की रिहाई का जब आदेश आया तो उस समय पूरा परिवार लखनऊ में था। आदेश की प्रति मिलते ही देर शाम गोरखपुर के लिए सभी रवाना हो गए। सुबह नौ बजे से पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी के बेटे अमन मणि त्रिपाठी अपने चाचा अजीतमणि और भाई अनंतमणि के साथ अधिवक्ताओं और समर्थकों के साथ कचहरी पहुंच गए थे।

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सभी कागजातों पर उनकी पैनी नजर थी, बार अधिवक्ता से बात करते रहे ताकि कहीं कोई कमी न रह जाए। दिनभर परिवार के लोगों में बेचैनी रही, शाम को जब रिहाई का परवाना जेल से जारी हुआ तो राहत की सांस ली।
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परिवार के लोगों को रिहाई की प्रक्रिया की जानकारी नहीं थी। शुक्रवार की सुबह करीब नौ बजे उनके अधिवक्ताओं ने जमानतदार के बांड भरने की जानकारी दी। फिर तीन सेट में बांड तैयार किया गया। परिवार के लोगों ने ही कागजी कार्रवाई पूरी कराई।
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 सभी बांड के सेट तैयार होने के बाद जिला मजिस्ट्रेट के यहां दाखिल किया गया। इसके बाद आरटीओ ने सभी गाड़ियों का सत्यापन कराया। फिर जिला मजिस्ट्रेट के यहां प्रपत्र को दाखिल किया गया। शाम को 4:45 बजे जिला मजिस्ट्रेट ने रिहाई के आदेश पर हस्ताक्षर कर दिया।

करीब डेढ़ घंटे बाद जेल में तैयार हुआ रिहाई का परवाना

शाम को 5 बजकर 29 मिनट पर जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय से रिहाई का आदेश लेकर पूर्व विधायक अमनमणि त्रिपाठी और उनके लोग मंडलीय कारागार पहुंचे। बेटे के साथ उनके अधिवक्ता रिहाई का कागज लेकर जेल के अंदर पहुंचे। कागज प्रस्तुत करने के बाद जेल में कैदियों के निरूद्ध वाली डायरी में रिहाई के नाम पते का मिलान करवाया गया।

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कितनी बार जेल में आए और कितने मामले लंबित हैं, इसका सत्यापन किया गया। फिर जिस मामले में जेल में पूर्व मंत्री और उनकी पत्नी निरुद्ध थे, उसकी रिहाई के आदेश को डायरी में दर्ज करने के साथ ही उसी समय का परवाना तैयार किया गया। इसी परवाने पर पूर्व मंत्री और उनकी पत्नी मधुमणि के हस्ताक्षर के बाद उनकी रिहाई पूरी हो सकी।
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