मैसेज फ्लैश यानी गैंगवार शुरू: सोशल मीडिया पर अपराध का खुला खेल, सो रहा है साइबर सेल
एसएसपी डॉ गौरव ग्रोवर ने कहा कि कुछ ग्रुप की जानकारी आई है। इसके बारे में पुलिस गहनता से जांच कर रही है। साइबर एक्सपर्ट की मदद से ग्रुप से जुड़े सभी लोगों की पहचान कर पुलिस कार्रवाई करेगी।
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कॉरपोरेट की तर्ज पर व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर जिले के बदमाश अपना गिरोह संचालित कर रहे हैं। देवा, महाकाल, गैंगस्टर, एके-47, गुंडों की टोली, एम के लिए काम जैसे नामों से संचालित हो रहे इन व्हाट्सएप ग्रुप के सदस्यों की संख्या 50 से 60 तक है। किसी भी आपराधिक घटना को अंजाम देने के लिए ग्रुप एडमिन की तरफ से मैसेज फ्लैश किया जाता है। चंद मिनटों में ही ग्रुप के सदस्य तय जगह पर पहुंच जाते हैं और गैंगवार शुरू हो जाती है। हैरत की बात यह है कि पुलिस खुद स्वीकार कर रही है कि व्हाट्सएप पर इस तरह के 10 ग्रुप संचालित किए जा रहे हैं, इसके बावजूद साइबर सेल सो रहा है।
फिलहाल स्थिति यह है कि वारदात के बाद पुलिस कुछ दिन तक सक्रिय होती है, लेकिन फिर निगरानी बंद कर दी जाती है और फाइल को फिर तब खोला जाता है, जब दूसरी वारदात हो जाती है। गोरखपुर जिले के बेलघाट का एक शख्स मध्य प्रदेश के उज्जैन से असलहे मंगाकर बेचने के आरोप में पकड़ा गया था। तीन लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर घटना का पर्दाफाश किया था, तब पहली बार कई ग्रुप के नाम सामने आए थे।
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24 मई 2020 को खोराबार के रामनगर कड़जहां गांव के चचेरे भाई दिवाकर निषाद और कृष्णा की झंगहा के गौरीघाट बांध के किनारे गोली मारकर हत्या की गई थी। बदमाशों ने दावत के बहाने बुलावा कर वारदात को अंजाम दिया था। पुलिस ने इस मामले में 12 आरोपियों को जेल भेजा था, जिसके बाद महाकाल ग्रुप और बिच्छू ग्रुप का नाम सामने आया था। तब पुलिस से पकड़े दो युवकों ने बताया कि उन्हें यही मालूम था कि सिर्फ भाइयों को डराना है। वह शराब लेने गए थे और आने के बाद हत्या हो चुकी था। मगर, बुलाने से लेकर शराब पिलाने तक में उनकी भूमिका थी, इस वजह से जेल गए।
केस एक
2018 में चौरीचौरा इलाके में रोडवेज की बस में तोड़फोड़ की गई थी। सामने आया कि ईगल ग्रुप के लोगों ने यह काम किया। पुलिस ने पर्दाफाश किया तो नई उम्र के लोग पकड़े गए। पता चला कि बस में एक यात्री से बहस हो गई थी। इसके बाद उसमें बैठे युवक ने ईगल ग्रुप पर संदेश चलाया और रात 12 बजे चौरीचौरा में बस के पहुंचते ही तोड़फोड़ की गई।
केस दो
24 मई 2020 को झंगहा इलाके में खोराबार के रहने वाले दो चचेरे भाइयों की दावत के बहाने बुलाकर हत्या कर दी गई थी। तब पुलिस ने 12 युवकों को गिरफ्तार किया था। सामने आया था कि महाकाल ग्रुप बनाकर यह लोग आपस में बातचीत करते है। एक संदेश पर वहां पर सभी युवक पहुंचे थे और फिर हत्या हो गई थी।
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केस तीन
मार्च 2023: गुलरिहा पुलिस ने चार युवकों को पकड़ा। यह सभी व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर असलहों की खरीद-फरोख्त करते थे। पहले असलहे की फोटो भेजी जाती थी, फिर उसका रेट तय होता था और एक युवक जाकर सप्लाई करता था। इसमें से एक युवक ने ही इसी असलहे का इस्तेमाल कर गुलरिहा इलाके में गैस एजेंसी के मैनेजर से लूटर की वारदात कर सनसनी फैलाई थी।
केस चार
11 जनवरी 2023 को बेलघाट पुलिस ने असलहा तस्करों को पकड़ा था। यह सभी व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर असलहों की खरीद फरोख्त करते थे। इनके पास से असलहे भी बरामद किए थे। सभी की उम्र 24 साल से कम थी। पुलिस को इनके पास से कई ग्रुप और लोगों के नाम भी मिले थे। जिसकी मदद से आजमगढ़ के बदमाश को पकड़ा गया, लेकिन इसके बाद पुलिस की जांच आगे नहीं बढ़ पाई।
इन वारदातों में भी सामने आया था ग्रुप का नाम
- 2021 में गोला के झरकटा गांव में सामने आया था। बिच्छू गैंग का जो वीडियो सामने आया था, उसमें बड़ी संख्या में गैंग में शामिल युवक हाथ में लाठी डंडा लेकर गांव में तांडव मचाते देखे गए थे। लेकिन, पुलिस ने तब भी ज्यादा ध्यान नहीं दिया था।
- मई 2021 में मिश्रौली गांव के भाजपा नेता के घर पर चढ़कर कुछ लोगों ने ईंट-पत्थर आदि चलाया था। इस मामले में भी सोशल मीडिया पर भाजपा नेता ने बिच्छू गैंग के घटना में शामिल होने की बात कही थी।
- मार्च 2021 में शिवपुर गांव में कुछ युवकों ने एक युवक को पीट दिया। इस मामले में भी बिच्छू गैंग की बात सामने आई थी। इससे पहले मेहड़ा गांव में भी हुई मारपीट में बिच्छू गैंग का नाम सामने आया था।
- पंचायत चुनाव के दौरान भर्रोह गांव में कुछ युवकों ने घेरकर लाठी-डंडों से चार-पांच युवकों का सिर फोड़ दिया था। इस मामले में भी बिच्छू गैंग का नाम सामने आया था।
- एसएसपी डॉ गौरव ग्रोवर ने कहा कि कुछ ग्रुप की जानकारी आई है। इसके बारे में पुलिस गहनता से जांच कर रही है। साइबर एक्सपर्ट की मदद से ग्रुप से जुड़े सभी लोगों की पहचान कर पुलिस कार्रवाई करेगी।
दबदबा बनाने की चाहत में तिकड़मी दिमाग की जाल में फंस बदमाश बन रहे नवयुवक
वह पेशेवर अपराधी तो नहीं है, लेकिन मन में अपराध के शौक से इस दलदल में फंस रहे हैं। कम उम्र में भौकाल बनाने की चाहत में युवा तिकड़मी दिमाग वाले बदमाशों के बिछाए जाल में फंसते है। गुंडा, महाकाल, बिच्छू, एके 47 जैसे ग्रुप से जुड़े ज्यादातर सदस्य 16 से 25 साल की उम्र के हैं।
आसानी से इलाके में भौकाल बनाने की चाहत में ग्रुप के सदस्य बनते हैं और फिर वह अपराध के रास्ते पर चल पड़ते है। घरवालों को भी इसकी भनक तभी लग पाती है, जब वह किसी मामले में पकड़े जाते हैं। पुलिस इनके मारपीट के कारनामों को छोटा समझकर नजरअंदाज कर देती है और फिर यह बड़ी वारदात कर बदमाश बन जाते है, जिसके बाद पीछे लौटने का रास्ता बंद ही हो जाता है।
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समाजशास्त्री डॉ. दीपेंद्र सिंह ने कहा कि किशोर अवस्था उम्र का वह पड़ाव है, जहां से जीवन के अनगिनत रास्ते निकलते हैं। इसी उम्र में ऊर्जा और क्षमता भी भरपूर होती है। हालांकि, किशोरावस्था में कुछ शारीरिक व मानसिक बदलाव आते हैं जिससे थोड़ा भटकने की आशंका रहती है लेकिन इस उम्र का भटकाव भविष्य को अंधकार में डाल सकता है।आजकल बच्चों की एक समस्या सामान्य होती जा रही है, वो है मोबाइल फोन और इंटरनेट का हद से ज़्यादा उपयोग। ये एक ऐसा आकर्षण या लत बन गई है जिसका सीधा संबंध बच्चे के मानसिक विकास और कॅरियर से होता है। यदि बच्चों से मोबाइल छीन लिया जाए या इंटरनेट एक्सेस नहीं दिया जाए तो वे और ज़्यादा बौखला जाते हैं। ऐसे में बहुत जरूरी है कि बच्चों के फोन उपयोग करने के समय को निर्धारित किया जाए। अभिभावकों को विशेष ध्यान देने की जरुरत है।